रातापानी अभ्यारण्य में बाघ का शिकार, बाघ के काटे पंजे

चार दिन बाद पता चला वन अमले को, पीएम कराया

By: chandan singh rajput

Published: 10 Apr 2019, 02:04 AM IST

रायसेन/सुल्तानपुर/बिनेका. एक तरफ शासन द्वारा सेव टाइगर के नारे दिए जाते हैं, मगर टाइगर प्रदेश और देश में कितने सेव हैं, ये आए दिन होने वाले वन्य जीवों के शिकार की खबरें बताती हैं। जी हां, जंगल कटाई और शिकार की चर्चा में रहने वाले रातापानी अभ्यारण में एक बार फिर बाघ के शिकार का मामला सामने आया है। दिसंबर 2018 में हुए शिकार की तरह इस बार भी शिकारियों ने बाघ के पैर के पंजे काटे हैं।

बिनेका रेंज के बगासपुर बीट में लगभग पांच दिन पूर्व हुए शिकार की जानकारी वन अमले को सोमवार को मिली। मंगलवार को बाघ के शव का पीएम जंगल में ही कराया गया। इससे पहले भी रातापानी अभयारण्य में बाघ के शिकार के मामले सामने आते रहे हैं। बिनेका रेंज क्षेत्र से बरखेड़ा रेंज तक अभयारण्य में कई बाघ जिम्मेदारों की लापरवाही के चलते शिकार हो चुके हैं। ताजा मामला भी इसी लापरवाही का परिणाम है।

घटना की जानकारी मिलते ही सीसीएफ, डीएफओ सहित अन्य अधिकारी भोपाल से घटना स्थल पर पहुंचे। उनकी मौजूदगी में ही बाघ का पीएम कराया गया। बाद में उसका अंतिम संस्कार कर दिया गया। होशंगाबाद और पचमढ़ी से डॉग स्क्वॉड, डॉक्टरों का दल पहुंचा। जानकारी के अनुसार शिकारी बाघ के चारों पंजे, दांत और मूंछ काटकर ले गए।

दोहराई दिसंबर की घटना
बिनेका रेंज के बगासपुर के जंगल में हुए इस शिकार से पहले दिसंबर २०१८ में रातापानी में ही एक बाघ का शिकार किया गया था। उसके भी पंजे शिकारियों द्वारा काटे गए थे, हालांकि बाद में वन अमले ने एक चरवाहे को गिरफ्तार किया था। उससे पहले गौहरगंज क्षेत्र में एक बाघिन का शिकार किया गया था। इसके अलावा दाहोद वन परिक्षेत्र में भी बाघ का शिकार किया गया था।

तीन संदिग्धों से पूछताछ
बाघ के शिकार के मामले में वन अधिकारियों ने बगासपुर निवासी तीन संदिग्ध व्यक्तियों को हिरासत में लिया है। उनसे पूछताछ की जा रही है। पचमढ़ी से आए डॉग स्क्वॉड द्वारा क्षेत्र की सर्चिंग के बाद उक्त लोगों को हिरासत में लिया गया।

शिकारियों के लिए मुफीद रायसेन के जंगल
जिले में दो अभयारण्य हैं रातापानी और सिंघोरी, जिनमें बड़ी संख्या में बाघ सहित अन्य जंगली जानवर हैं। इनके अलावा बाकी जंगलों में भी जानवरों की संख्या बढ़ी है, लेकिन सुरक्षित और प्रतिबंधित कहे जाने वाले अभयारण्य में ही बड़े पैमाने में जानवरों का शिकार होता रहा है। भोपाल से आने वाले शिकारियों के लिए रायसेन जिले के जंगल बहुत मुफीद हैं। कई बड़े और नामी शिकारी यहां पकड़े जा चुके हैं। वन विभाग के कर्मचारी भी श्किार के मामले में संलिप्त पाए गए हैं।

चार दिन बाद चला पता
बगासपुर के पास बाघ का शिकार हुआ और शिकारी उसके पंजे काटकर ले गए, शव पांच दिन जंगल में पड़ा रहा। किसी ग्रामीण ने वन विभाग को इसकी सूचना दी, लेकिन विभाग के बीट प्रभारी, नाकेदार आदि को इसकी कोई जानकारी नहीं थी। इससे स्पष्ट है कि मैदानी अमला अपनी जिम्मेदारी के प्रति मुस्तैद नहीं है।

तंत्र-मंत्र की आशंका
बाघ का शिकार और फिर उसके पंजे काटना, दांत निकालना तंत्र-मंत्र की ओर संकेत करता है। वन विभाग के अधिकारी भी इस बात की संभावना व्यक्त करते हैं। साथ ही बाघ के दांत, नाखून की तस्करी की संभावना भी व्यक्त की जाती है। बताया जाता है कि बाघ के नाखून और दांत बड़ी कीमत पर बिकते हैं।

बिनेका रेंज के अंतर्गत बगासपुर के जंगल में बाघ का शव पड़ा होने की जानकारी मिली थी। मौके पर पहुंचकर जांच की। शिकारियों ने बाघ के चारों पंजे काटे हैं और दांत निकाले हैं। तीन संदिग्धों को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है। बाघ के शव का पीएम कराकर अंतिम संस्कार कर दिया है।
आरके सिंह, एसडीओ रातापानी

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