टमाटर की बंपर पैदावार, किसानों की मुसीबत, नहीं निकल रही लागत

किसानों की स्थिति सुधरे, उन्हें फसलों का उचित मूल्य मिले।

By: brajesh tiwari

Published: 13 Mar 2018, 10:07 AM IST

रायसेन. किसानों की स्थिति सुधरे, उन्हें फसलों का उचित मूल्य मिले। इन सब बातों को ध्यान में रखकर सरकार उद्यानिकी फसलों को बढ़ावा देने में जुटी थी, जो साकार भी हुई। मगर अब इसे कुदरत का खेल कहें या किसानों की दुर्भाग्य, जब पैदावार ज्यादा हुई तो खरीदार नहीं मिलने से किसानों को फसलों का दोगुना मूल्य तो दूर लागत मूल्य भी नहीं मिल पा रहा है।

जी हां, जिले में उद्यानिकी फसल टमाटर की बंपर पैदावार अब किसानों की मुसीबत के साथ नुकसान का कारण बन गई है। हालात ये हैं कि किसान अपनी टमाटर की उपज ट्रालियों में भरकर नदियों के किनारे, सड़क किनारे फेंक रहे हैं और पशुओं को खिला रहे हैं।

जिले की बाड़ी तहसील में सबसे अधिक टमाटर की खेती की जाती है। यहां हर साल टमाटर की बंपर पैदावार होती है, लेकिन इस साल दाम और खरीदार नहीं मिलने से हालात कुछ ज्यादा ही बिगड़ गए हैं। मजबूरीे में किसानों को अपनी उपज फेंकना पड़ रहा है, जिससे उन्हें बड़े पैमाने पर नुकसान हो रहा है। यहां तक कि टमाटर की तुड़ाई भी महंगी पड़ रही है।
ये है स्थिति
किसानों का कहना है कि इन दिनों टमाटर की एक कैरिट (३० किलो) की कीमत २० से ३० रुपए मिल रही है।

जो बीते साल २०० रुपए थी, जबकि एक कैरिट टमाटर तोडऩे के लिए ३० रुपए मजदूरी लगती है। ऐसे में किसान के हाथ कुछ नहीं लग रहा है। पकी फसल को तोडऩे के लिए ही जेब से मजदूरी देना पड़ रही है।

उद्यानिकी विभाग से मिली जानकारी के अनुसार जिले में २७ हजार हेक्टेयर में उद्यानिकी खेती की जाती है, जिसमें से नौ हजार हेक्टेयर में सब्जी की खेती होती है। इस साल ४९०० हेक्टेयर में टमाटर की खेती की गई है। बाड़ी तहसील क्षेत्र में सबसे अधिक टमाटर की खेती की जाती है।

सालों से की जा रही अनदेखी
जिले में टमाटर की अच्छी पैदावार सालों से हो रही है। बाड़ी, बरेली तहसील में सबसे अधिक टमाटर पैदा होता है, लेकिन इसके बाद भी टमाटर की प्रोसेसिंग के बारे में पहले विचार नहीं किया गया।

अपनी मेहनत का उचित मूल्य नहीं मिलने से निराश किसानों और जनप्रतिनिधियों की मांग के बाद भी जिले का टमाटर बाजार में खपाने या कोई प्रोसेसिंग यूनिट स्थापित करने की पहल नहीं की गई।

हालांकि बीते दिनों एक सोसायटी बनाकर प्रोसेसिंग यूनिट खोलने की योजना बनी है, लेकिन इसमें भी एक साल का समय लगेगा।

80 हजार से एक लाख आती है लागत
किसानों और उद्यानिकी विभाग के अनुसार एक हेक्टेयर में टमाटर की खेती करने में ८० हजार से एक लाख रुपए की लागत आती है। यदि फसल अच्छी हो और समय पर अच्छे दाम मिल जाएं, तो एक हेक्टेयर की उपज सवा लाख तक बिकती है, लेकिन इस साल हालात उलट हैं।

उद्यानिकी विभाग के उपसंचालक एनएस तोमर का कहना है कि दूसरे प्रांतों से कई व्यापारी हर साल रायसेन जिले से टमाटर खरीदकर ले जाते थे, लेकिन उन प्रदेशों में भी इस बार टमाटर की अधिक पैदावार हुई है, इसलिए बाहर के व्यापारी नहीं आ रहे हैं।
अगले 10-15 दिन बाद बाहर के व्यापारी आने लगेंगे, तब दाम बढ़ जाएंगे।

क्षेत्र में टमाटर की बंपर पैदावार हुई है। हमने १२ एकड़ में टमाटर लगाया था, लेकिन अब उसे तोड़कर पशुओं को खिला रहे हैं। कोई खरीदार नहीं मिल रहा है। फसल की लागत तो क्या तोड़कर फेंकने का खर्च भी नहीं निकल रहा।
- कृष्ण कुमार जाट, उद्यानिकी कृषक

बाहर के व्यापारियों के नहीं आने से टमाटर के दाम गिरे हैं। जल्द ही स्थिति सुधर जाएगी। 10-15 दिन में दाम बढ़ जाएंगे। अगले साल से टमाटर प्रोसेसिंग यूनिट शुरू हो जाएगा। फिर जिले के किसानों को अच्छा लाभ मिलेगा।
- नरेंद्र सिंह तोमर, उपसंचालक उद्यानिकी

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