तेजी से बढ़ रहे जलसंकट की ओर

तेजी से बढ़ रहे जलसंकट की ओर

chandan singh rajput | Publish: Mar, 12 2019 02:04:04 AM (IST) Raisen, Raisen, Madhya Pradesh, India

जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में बढ़ रहा जलसंकट। बेगमगंज, गैरतगंज क्षेत्र में जल स्तर में अधिक गिरावट

रायसेन. पेयजल को लेकर कई योजनाएं शासन ने शुरू की थी, ताकि जिले को जल संकट से बचाया जा सके। इसके लिए अच्छा खासा पैसा भी खर्च किया गया। मगर अब इसे जिले की बदकिस्मती कहें या जिम्मेदारों की लापरवाही। उन पेयजल योजनाओं का लाभ आमजन को नहीं मिल पाया और नतीजा ये है कि गर्मियों की शुरुआत में ही जिले में पानी की किल्लत बढऩे लगी है। जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल संकट मार्च में ही गहराने लगा है।

विशेषकर गैरतगंज और बेगमगंज तहसील के गांवों में पानी की समस्या बढ़ गई है। वहीं रायसेन तहसील के कुछ गांवों के अलावा बाड़ी तहसील के ग्रामीण क्षेत्रों में पानी का संकट है। बरेली नगर में जल स्तर तेजी से नीचे जा रहा है। गांवों में लगे हैंडपंप और नल जल योजनाएं भी साथ छोडऩे लगी हैं। हालांकि स्थिति फिलहाल बहुत गंभीर नहीं है, लेकिन लगातार गिर रहा जल स्तर आगामी समय में भीषण संकट का संकेत दे रहा है।

पीएचई विभाग ने जलसंकट संभावित इलाकों के लिए कार्ययोजना बनाई है, लेकिन विभाग के अनुसार अभी कहीं कोई संकट नहीं है। जबकि जिले के कुछ गांवों के लोग पानी को लेकर अपनी परेशानियों को अधिकारियों के सामने बयां कर चुके हैं। रायसेन के पास ही ग्राम रामपुर टोला के लोगों ने दस दिन पहले हाईवे पर जाम लगाया था।

यहां अधिक संकट
जिले की तहसील गैरतगंज और बेगमगंज में हर साल जलसंकट अधिक रहता है, जिसका असर दिखाई देने लगा है। पीएचई विभाग भी इन तहसीलों में जलसंकट को स्वीकार कर रहा है। इसके अलावा रायसेन के पहाड़ी क्षेत्र मउपथरई, पठारी, बम्होरी, रामपुर टोला, खरगावली, भदनेर, नेवली, गनिहारी, पिपलई, धनियाखेड़ी, मासरे आद गांवों में अभी से जलसंकट दिखाई देने लगा है। ये सभी गांव जिला मुख्यालय से पांच से २० किमी के दायरे में हैं। बाड़ी क्षेत्र के आदिवासी अंचल साढ़े बारह गांव, केमवाली, झिरपई, पोनिया, सेमरी, सिलारी आदि में जलसंकट शुरू हो रहा है।

106 गांव प्रभावित
जिले में 10 हजार से अधिक हैंडपंप पीएचई विभाग के लगे हैं। इनमें से विभाग के अनुसार 128 बंद हैं। हालांकि यह आंकड़े सही नहीं हैं, क्योंकि ग्रामीणों के अनुसार हर चौथ हैंडपंप बंद है, जिसके पीछे जलस्तर में गिरावट के साथ तकनीकी कारण हैं। इसी तरह कुल ३६५ नज-जल योजनाओं में से विभाग के अनुसार 106 बंद हैं, जिनमें अधिकतर जल स्तर गिरने के कारण बंद हैं, बाकी तकनीकी खराबी के कारण बंद हैं। 106 नल जल योजनाओं के बंद होने से इतने ही गांव सीधे प्रभावित हो रहे हैं।

नदी, तालाबों में नहीं पानी
जिले की प्रमुख नदियों में बेतवा नदी, बेगम नदी, बीना नदी, बारना नदी आदि हैं। ये सभी सूख चुकी हैं। किसी भी नदी में पानी की धार नही है। इसी तरह प्रमुख तालाबों में हलाली, बारना, पलकमती के हालात भी बुरे हैं। इन तालाबों से सिंचाई की जा रही है, जिससे तेजी से जल स्तर गिर रहा है। हालांकि जिला मुख्यालय पर पेयजल की पूर्ति हलाली बांध से हो रही है, लेकिन बाकी छोटे-बड़े तालाबों से पेय जल की आपूर्ति नहीं हो पा रही है।

पीएचई ने किया गांवों का चयन
पीएचई ने जिले के उन गांवों की सूची बनाई है, जिनमें बीते सालों में जलसंकट होता रहा है। ऐसे 60 गांवों की सूची बनाकर उनमें हैंडपंपों की स्थिति ओर नल जल योजनाओं की स्थिति की समीक्षा की है। इनके सुधार और संकट के समय पानी की उपलब्धता के लिए संभावित लागत का आंकलन कर शासन को प्रस्ताव भेजा है।

जिले में फिलहाल स्थिति नियंत्रण में है। खेतों में सिंचाई के चलते जल स्तर में गिरावट हुई है। सिंचाई बंद होने के बाद जल स्तर बढ़ जाएगा। जिलेभर के संभावित जल संकट वाले क्षेत्रों को चिन्हित कर लिया है। वहां जरूरत के मुताबिक इंतजाम किए जाएंगे।
आरके सिंह राजपूत, ईई पीएचई

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