scriptWater storage system near Har Mahal | हर महल के पास पानी भंडारण की व्यवस्था | Patrika News

हर महल के पास पानी भंडारण की व्यवस्था

आठ सौ साल पहले रायसेन किले पर जल संरक्षण के लिए अपनाई गई तकनीक आज भी कारगर है

रायसेन

Published: May 25, 2022 12:50:46 am

रायसेन. रायसेन दुर्ग का आठ सौ साल पुराना रूफ वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम जल संरक्षण का अद्भुत नमूना है। तब की तकनीक आज के इंजीनियरिंग कौशल को भी चुनौती दे रही है। आज जहां जल संरक्षण के लिए सरकारी मशीनरी तरह-तरह के उपाय कर रही है, वहीं आठ सौ साल पहले रायसेन किले पर जल संरक्षण के लिए अपनाई गई तकनीक आज भी कारगर है, जो जल प्रबंधन तथा निर्माण कौशल का अनुपम उदाहरण है। आठ सौ साल पहले पानी के सदुपयोग, वर्षा जल के भंडारण और संरक्षण के लिए रूफ वाटर हार्वेस्टिंग पद्धति का उपयोग अद्भुत है। किले का रूफ वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम बताता है कि उस समय शासक और आमजन पानी के प्रति कितने संदवेनशील और दूरदर्शी थे। लगभग 10 वर्ग किलोमीटर में फैला किला 11वीं और १२वीं शताब्दी के बीच बना था। यहां आने वाले पर्यटक किले का रूफ वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम देखकर हतप्रभ रह जाते हैं और वे इसे जल संचय का दुनिया का सबसे अच्छा उदाहरण बताते हैं।

आठ सौ साल पहले रायसेन किले पर जल संरक्षण के लिए अपनाई गई तकनीक आज भी कारगर है
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पूरी पहाड़ी का जल होता है संरक्षित
बारिश के पानी को संरक्षित करने के लिए अपनाई गई तकनीक से पूरी पहाड़ी पर गिरने वाला पानी किले के अंदर बने टांकों और आस-पास बने तालाबों में पहुंचता है। अलग-अलग महलों की छतों का पानी एक जगह जमा करने के लिए भूमिगत नालियां बनाई गई हैं। बारिश के दिनों में छत का पानी इन्हीं नालियों से होता हुआ तालाब, टांकों और भूमिगत टैंकों में पहुंचता है। किले के चारों तालाब मदागन, धोबी, मोतिया और डोला-डोली तालाब सहित कई टांके एवं रानी महल स्थित रानीताल में पानी भरता है। किले के प्रत्येक महल, निवास और भवन के नीचे मिले अवशेषों से ज्ञात होता है कि यहां जल संग्रह के लिए भूमिगत कुंड भी बने थे।

किले के नीचे सारे उपाय बेकार
किले से नीचे बसे रायसेन शहर में हर साल गर्मियों में जलसंकट होता है। यहां सरकार, नगर पालिका ने कई उपाय किए, लेकिन पानी को बचाने में सफल नहीं हुए। शहर में आठ तालाब हैं, लेकिन सूखे हैं। शहर में रूफ वाटर हार्वेस्टिंग के प्रयास केवल औपचारिक हुए हैं, जबकि इसी तकनीक को आठ सौ साल पहले अपनाकर किले पर पानी का भंडारण किया जाता था, जो सैकड़ों साल बाद भी सुरक्षित और कामयाब है। रायसेन में 10 हजार से अधिक मकान हैं, जिनमें मात्र सौ-डेढ़ सौ मकानों में ही वाटर हार्वेस्टिंग को अपनाया गया है। अन्य में बारिश का पानी सहेजने की कोई व्यवस्था नहीं है। सरकारी भवनों में भी रूफ वाटर हार्वेस्टिंग की आधुनिक तकनीक दम तोड़ रही है। यही कारण है कि शहर के लोगों को पीने के लिए पानी हलाली बांध से लाना पड़ रहा है।

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