प्याज के 100 रुपए किलो बिकने ये है बड़ा कारण

-प्याज में तेजी का एक कारण ये भी, किसानों के हिस्से सिर्फ नुकसान...
-किसानों ने नाम पर जारी तो हुए लेकिन जमीनी स्तर पर बने नहीं, उद्यानिकी ने कागजों में ही बनना दर्शा दिया

By: Rajesh Kumar Vishwakarma

Published: 03 Jan 2020, 11:21 AM IST

ब्यावरा @राजेश विश्वकर्मा की रिपोर्ट...

दो से तीन रुपए प्रति किलो में बिकने वाली प्याज के 100 रुपए किलो बिकने के पीछे एक बड़ा कारण उद्यानिकी की अनदेखी का भी सामने आया है। शासन ने 50 फीसदी सब्सिडी योजना के माध्यम से जो वेयर हाउसेस प्याज के लिए दिए थे हकीकत में वे बने ही नहीं। हां, उनके नाम की राशि जरूर निकाल ली गई और संंबंधित किसान के नाम से अलॉट भी कर दी गई लेकिन जमीनी स्तर पर बने नहीं।


दरअसल, मप्र शासन द्वारा उद्यानिकी के माध्यम से अलग-अलग योजनाओं में प्याज के हाउसेस के लिए 50 फीसदी सब्सिडी दी जाती है। इसके तहत ऑनलाइन और मैनुअली आवेदन कर आवेदन करना होता है। बीते तीन सालों में (2017, 2018 और 2019) म इसके लिए आवेदन हुए और शासन स्तर से संबंधित किसानों के नाम राशि भी जारी हुई लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि ये वेयर हाउस बने ही नहीं? कई जगह किसानों की राशि निकाल दी गई और वेयर हाउस बनाए नहीं?


वहीं, कई किसानों के नाम पर विभागीय स्तर पर मिलीभगत कर राशि निकाल ली गई। इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि उद्यानिकी का दावा है कि महज 105 वेयर हाउस जिले में अभी तक बने हैं, उनमें से कुछ में किसानों ने प्याज रखी भी है। ये वे चुनिंदा गांव हैं जहां उद्यानिकी ने दिखाने के लिए प्याज के वेयर हाउसेस बनवा दिए और बड़ी तादात में शासन स्तर पर इसमें गड़बड़ी कर दी, जिस पर किसी जिम्मेदार अधिकारी ने जांच करने की कोशिश नहीं की।

जहां का दावा उद्यानिकी ने किया वहां वेयर हाउस है ही नहीं
पत्रिका ने प्याज के वेयर हाउसेस का जब रेंडमली सर्वे किया तो सामने आया कि जिन गांवों में उद्यानिकी की फाइलों में वेयर हाउस बने हैं हकीकत में वहां कुछ नहीं है। करीब दर्जनभर वेयर हाउस आमल्या हाट गांव में बनवाए हैं लेकिन हकीकत में वहां एक भी नहीं है। विभाग का दावा है कि झरखेड़ा में बने हैं लेकिन एक या दो ही चालू स्थिति में है। ऐसे कई जगह की स्थितियां हैं जहां हकीकत में वेयर हाउसेस बने नहीं हैं और उनके नाम की राशि निकाल ली गई।
शासन देता है 50 फीसदी सब्सिडी
मप्र शासन के वेयर हाउस कॉर्पोरेशन की गाइडलाइन के हिसाब से संबंधित किसान को जमीन दर्शाना होती है। इसके तहत 25 मैट्रिक टन का वेयर हाउस 01 लाख 75 हजार (लगभग) में बनता है। इस पर करीब 85 हजार रुपए की सब्सिडी है। वहीं, 50 मैट्रिक टन का वेयर हाउस 03 लाख 50 हजार रुपए में बनता है, जिसमें 01 लाख 75 हजार रुपए की सब्सिडी मिलती है। किसान और उद्यानिकी के अफसर मिलीभगत कर सब्सिडी के फेर में वेयर हाउस जारी तो करवा लेते हैं लेकिन हकीकत में यह जरूरतमंद किसानों को मिल नहीं पाती।

फैक्ट-फाइल
-105 वेयर हाउस बने (उद्यानिकी का दावा)
-50 फीसदी होती है सब्सिडी।
-100 प्रतिशत वास्तविक आंकड़ा नहीं दे पा रहा विभाग।
-03 साल में कई वेयर हाउस आए लेकिन रिकॉर्ड नहीं।
-10 फीसदी वेयर हाउस भी हकीकत में गांवों में नहीं बनें।
(नोट : उद्यानिकी से प्राप्त जानकारी के अनुसार)


जो बने हैं उनकी जानकारी है
कुछ शासन स्तर पर बने हैं उनके फोटो भी हमारे पास हैं, कुछ किसानों ने प्याज भी रखी हुई है। हम पूरी जानकारी मुहैया करवा देंगे। शासन से प्राप्त अनुदान के हिसाब से जितने आवेदन आते हैं हम उसी हिसाब से बनवाते हैं। ब्यावरा में झरखेड़ा व बूढ़ाखेड़ा में वेयर हाउस बने हैं।
-पी. आर. पांडे, उप-संचालक, उद्यानिकी, राजगढ़

Show More
Rajesh Kumar Vishwakarma
और पढ़े
हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति और कूकीज नीति से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned