पारा 44 के पार, भीषण गर्मी में ब्यावरा में सातवें दिन मिल रहा पानी, कुरावर में निजी ट्यूबवेलों का सहारा

कोरोना के कहर के बीच पेय जल के लिए जद्दोजहत
कलेक्टर ने समीक्षा की लेकिन अधिकारी जमीनी स्तर पर काम नहीं कर पा रहे, निर्देशों के बावजूद कुरावर में अमल नहीं

By: Rajesh Kumar Vishwakarma

Published: 28 May 2020, 06:00 AM IST

जिले में कोरोना के कहर के बीच भीषण जल संकट का सामान भी लोगों को करना पड़ रहा है। शासन-प्रशासन की तमाम प्लॉनिंग धरी रह गई है। शहरी क्षेत्र के साथ ही कस्बों और गांवों में भी हालत खराब है। सरकारी स्त्रोत न के बराबर हैै। लोग निजी जल स्त्रोंतो के भरोसे हैं। तमाम प्रकार की समीक्षा, दिशा-निर्देशों के बावजूद पेय जल की आपूर्ति नहीं हो पा रही है। जिले के सबसे बड़े और पानी के लिए हमेशा चर्चा में रहे ब्यावरा शहर में सातवें-आठवें दिन सप्लाई हो रही है। ऐसे ही हालत कुरावर के है, यहां पूरी आबादी निजी जल स्त्रोतों के भरोसे है।

ब्यावरा.शहर में कुशलपुरा और घोड़ापछाड़ परियोजना के भरोसे की जल व्यवस्था लगभग अधर में है। सातवें-आठवें दिन होने वाली सप्लाई से लोग खासे परेशान है। भरी दोपहरी मे कुछ समय के लिए चालू होने वाले नल से लोग सात दिन की व्यवस्था नहीं कर पा रहे हैं। हालात यह है कि पानी की टंकियों, पीपे इत्यादि में पानी संग्रह कर रखे रहे हैं लेकिन इतना पानी उपलब्ध ही नहीं हो पा रहा।

दरअसल, भंवरगंज क्षेत्र की महिलाएं पानी और जलापूर्ति के लिए पहले ही हंगामा कर चुकी हैं। ऐसे ही हालात शहर के अन्य हिस्सों के हैं। मातामंड और सुठालिया रोड क्षेत्र में भी ऐसी ही स्थिति बनीं हुई है। जहां की महिलाओं ने आरोप लगाया कि सात-आठ दिन बाद पानी मिलता है जिसमें भी पूर्ति नहीं हो पाती। नपा की ओर से कोई वैकल्पिक व्यवस्था भी यहां के लोगों के लिए नहीं की जाती। सार्वजनिक टंकी में भी इस संक्रमण काल में पानी नहीं मिल पा रहा। इसलिए हर दिन ऐसे हालात बन रहे हैं।
वैकल्पिक प्रबंध करवाएंगे
हम हर दिन जल सप्लाई को लेकर मॉनीटरिंग कर रहे हैं। यदि कोई दिक्कत है या परेशानी आ रही है तो हम दिखवाते हैं, संबंधित क्षेत्रों में वैकल्पिक टैंकर या अन्य माध्यम से जलापूर्ति करवाएंगे।
-इकरार अहमद, सीएमओ, नपा, ब्यावरा

Rajesh Kumar Vishwakarma
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