गांव के लोगों की जीवनशैली का सर्वे करेगी जनपद की टीमें, फिर उन्हीं बिंदुओं पर जरूरतों के हिसाब से जारी होगा बजट

- ईज-ऑफ-लिविंग सर्वे-2020
- बीआरसी भवन में जीआरएस, सचिव, स्वच्छताग्राहियों को प्रशिक्षण दिया, इंडिया-2022 के लिए भारत सरकार ने तैयार किया प्लॉन

By: Rajesh Kumar Vishwakarma

Published: 11 Feb 2020, 03:46 PM IST

ब्यावरा. शासन स्तर आम लोगों को मिलने वाली विभिन्न सुविधाओं का आंकलन करने और जीवन शैली को परखने के लिए गांवों में अब जनपद की टीमें सर्वे करेंगी। ईज-ऑफ-लिविंग-2020 (जीवन में सुगमता-2020) का सर्वे पूरे प्रदेश में एक साथ शुरू हुआ है। इसमें 16 बिंदुओं पर व्यक्ति की जरूरतों का फीडबैक लिया जाएगा। फिर उसी आधार पर शासन अपना बजट पेश करेगा।

दरअसल, १३ फरवरी से शुरू होने वाला उक्त सर्वे 30 मार्च तक चलेगा। जिसमें शासन द्वारा निर्धारित 1६ मानकों के आधार पर लोगों की जीवनशैली का आंकलन किया जाएगा और वही रिपोर्ट शासन को भेजी जाएगी। साथ ही 2011 में हुई जनगणना में सामने आई बीपीएल और जरूरतमंद हितग्राहियों को मिलने वाली योजना के लाभ का आंकलन किया जाएगा।

साथ ही छूट चुके अन्य हितग्राहियों को इसमें जोड़ जाएगा। इसी प्रक्रिया के लिए मंगलवार को बीआरसी भवन में जनपद पंचायत ब्यावरा के तमाम सचिव, जीआरएस और स्वच्छता ग्राहियों को प्रशिक्षण दिया गया। उन्हें उक्त सर्वे से अवगत करवाया गया और ओब्जेक्टिव तरीके से लोगों से फीडबैक लेने का तरीका बताया।

इन 16 बिंदुओं पर जुटाई जाएगी जानकारी
आम जीवन में काम आने वाले 16 बिंदुओं के आधार पर ईज-ऑफ-लिविंग सर्वे होना है। इनमें एलपीजी कनेक्शन, बिजली कनेक्शन-एलईडी बल्ब का उपयोग, बैंक खाता, जीवन बीमा, दुर्घटना बीमा, टीकाकरण, पोषण आहार आपूर्ति, स्व-सहायता समूह की सदस्यता, आवास, प्राथमिक स्वास्थ्य सेवा, सामाजिक सुरक्षा, रोजगार गारंटी, कौशल विकास, शौचालय की उपलब्धता और ग्रामीण स्वच्छता, कनेक्टिविटी और खाद्य सुरक्षा शामिल है। इन्हीं १६ बिंदुओं पर आधारित 36 वैकल्पिक प्रश्न तैयार हैं, जिन पर हितग्राहियों को जवाब देना है। उसी हिसाब से उनकी जीवन-शैली का आंकलन होगा।

गरीबी का आंकलन इनकम नहीं, सुविधा से होगा
जनपद सीईओ सतीशदत्त शर्मा ने बताया कि उक्त सर्वे का सीधा मकसद है कि इन्फॉर्म डिसिजन मैकिंग, यानि संचार सीधे उस व्यक्ति से जिसका काम हो। साथ ही शासन का यह भी मानना है कि अब किसी भी व्यक्ति की गरीबी का आंकलन उसकी इनकम या रुपए से नहीं होगा, बल्कि सुविधा से होगा।

यानि भले ही उसकी इनकम न हो लेकिन उसे सुविधाएं कौन-कौन सी मिल रही हैं, यही बात उनकी जीवनशैली का निर्धारण करेगी। शुरूआत में यह सर्वे विभागीय स्तर पर था लेकिन शासन स्तर पर बेहतरीन कॉर्डिनेशन और जनता को जोडऩे के मकसद से यह शुरू किया गया है।

16 बिंदुओं पर जुटा रहे जानकारी
सचिव, जीआरएस और स्वच्छता ग्राहियों को हमने प्रशिक्षण दिया है। हितग्राहियों से 16 बिंदुओं के आधार पर जानकारी जुटाई जाना है। जिसमें उनकी जीवन शैली से जुड़ी बातें पूछी जाना हैं। 13 फरवरी से शुरू होने वाला सर्वे 30 मार्च तक चलेगा।
- सतीशदत्त शर्मा, सीईओ, जनपद पंचायत, ब्यावरा

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