छुट्टी के दिन जनपदकर्मियों का हंगामा, लगाया आरोप-महिला स्टॉफ के सामने देते हैं गालियां सीईओ

ब्यावरा सीईओ का विरोध, की नारेबाजी
आए दिन बदतमीजी करते हैं सीईओ, रविवार को ११ बजे बुलाकर खुद 2 बजे आए बात की तो अश्लील गालियां देने लगे

By: Rajesh Kumar Vishwakarma

Published: 22 Nov 2020, 07:39 PM IST

ब्यावरा.आए दिन विवादों में रहने वाले ब्यावरा जनपद सीईओ (CEO) का विरोध रविवार को फिर से हुआ। उनके खिलाफ छुट्टी के दिन भी कर्मचारियों ने हंगामा किया, नारेबाजी करते हुए हटाने की मांग की। साथ ही आरोप लगाया कि सीईओ महिला स्टॉफ (Female staff) के सामने भी अश्लील शब्दों, गालियों का प्रयोग करते हैं।
दरअसल, कर्मचारियों से तालमेल बैठाने और अन्य बातचीत करने में शुरू से ही विवादों में रहे सीईओ के. के. ओझा का सीधा विरोध किया जा रहा है। रविवार को उन्होंने सभी कर्मचारियों को सुबह 11 बजे बुला लिया और खुद दो बजे आए। इसी बात पर कर्मचारियो ने हंगामा कर दिया और सीईओ को हटाने के लिए नारेबाजी करने लगे। उन्होंने कलेक्टर को लिखित शिकायत की है कि आए दिन सीईओ विवाद करते हैं, काम पर फोकस करने की बजाए बेवजह का दबाव बनाते हैं। फिल्ड में काम करने वालों को बुलाकर न खुद काम करते न ही उन्हें करने देते। उन्होंने तत्काल प्रभाव से सीईओ को हटाकर किसी अन्य को जिम्मेदारी देने की मांग की है। इस दौरान जनपद अध्यक्ष प्रतिनिधि जगदीश दांगी, उपयंत्री बलबीरसिंह अहिरवार, अमित तिवारी, नरेंद्र तायवाड़े, राखी श्रीवास्तव, सहायक यंत्री प्रवीण्सिंह भिलाला, हेमंत दायमा, राजेंद्र दांगी, कमल करासिया, दिग्विजयसिंह धाकड़, संजीव राजपूत, जनपदकर्मी परमानंद दुबे, लोकेश आर्य सहित तमाम जनपदकर्मी, उपयंत्री, रोजगार सहायक, सचिव, सरपंच सहित समूचा स्टॉफ विरोध में खड़ा रहा।

सीआर खराब करने,वेतन काटने की देते हैं धमकी
कर्मचारियों ने आरोप लगाया कि सीईओ मनचाहे समय पर फोन लगाकर दबाव बनाते हैं। आए दिन धमकी देते हैं कि अगर ऐसे काम नहीं किया तो सीआर खराब करवा दूंगा, तनख्वाह काट दूंगा। बेवजह का दबाव बनाकर मानसिक रूप से प्रताडि़त करते हैं। कभी रात को 11 बजे तो कभी 10 बजे, तो कभी सुबह ८ बजे ही फोन कर दबाव बनाया जाता है। रविवार को भी बैठक के लिए बाध्य किया जाता है।
महिला स्टॉफ को जल्दी बुलाया, अन्य से भी करते हैं अभद्रता
हाल ही में एक महिला स्टॉफ को सीईओ ने फोन कर सुबह ९.३० बजे बुला लिया, जिसे लेकर भी दोनों में काफी बहस हुई, तीखी नोंक-झोंक भी हुई। इसके अलावा महिला कर्मचारियों, स्टॉफ ने आरोप लगाया कि उनके सामने ही अश्लील शब्दों का प्रयोग वे करते हैं, जानबुझकर महिला जीआरएस, महिला प्रधान, महिला सचिव और महिला जनपदकर्मियों के ग्राम पंचायत, घर में पहुंचकर अभद्रता करते हैं। पूरा स्टॉफ और जनपद का मैदानी अमला सीईओ से त्रस्त हैं, इसी का विरोध किया जा रहा है।

पहले भी की जा चुकी सीईओ की शिकायत
सीईओ ओझा ज्वॉइनिंग समय से ही विवादों में रहे हैं। कलेक्टर से लेकर सीईओ जिला पंचायत तक उनकी शिकायत की जा चुकी है बावजूद इसके उन्हें कोई फर्क नहीं पड़ा। पहले भी इसी तरह की अश्लीलता और हटधर्मिता का आरोप लगाया गया था, जिसमें सीधी तौर पर बेवजह प्रताडि़त करने का आरोप लगाया था। वरिष्ठ अफसरों ने इन्हें समझाया भी लेकिन इनकी कार्यप्रणाली में कोई परिवर्तन नहीं आया, इसीलिए अब फिर से विरोध जताया जा रहा है।
तनख्वाह तो रविवार की भी मिलती है
कोई विरोध नहीं है, जिपं सीईओ बैठक ले रहे हैं मैंने ले ली तो क्या गलत है, रविवार की भी तो तनख्वाह लेते हैं सभी कर्मचारी। हमने उन्हें समझा दिया है। हमने उन्हें समझा दिया है, ऐसा कुछ नहीं है हमने कोई बदतमीजी नहीं की।
-के. के. ओझा, सीईओ, जनपद पंचायत, ब्यावरा
पहले भी मेरे पास ऐसी शिकायतें आई हैं, हम बात करेंगे। शासन स्तर पर हम बात करेंगे। शासन स्तर पर ही सीईओ की नियुक्तियां होती हैं, ऐसे में हमने वरिष्ठ अफसरों से बात की है। जरूरी परिवर्तन भी करना पड़ा तो करेंगे।
-नीरज कुमार सिंह, कलेक्टर, राजगढ़

Rajesh Kumar Vishwakarma
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