लॉक डॉउन में अपनों के साथ रहने का मौका मिला, रामायण-महाभारत आदत में आई, लौट आया 30 साल पुराना दौर

कोरोना का एक रूप ये भी : लॉक डॉउन 2.0 को यादगार बनाने में जुटे लोग
घर पर फ्री समय में सामने आ रहे तरह-तरह के एक्सपीरियंसेस, लोगों की जीवन शैली बदली

By: Rajesh Kumar Vishwakarma

Published: 18 Apr 2020, 07:44 PM IST

ब्यावरा.कोविड-19 के खौफ और तमाम प्रकार की नकारात्मकता के बीच एक सकारात्मकता यह भी है कि इसे लेकर जारी लॉक डॉउन ने अपनों को अपनों से मिला दिया है। सख्ती में ही सही लोग अपनों के साथ घरों में कैद हैं। पढऩे वाले विद्यार्थी, प्रोफेनल्स और अन्य तमाम दूर शहरों में नौकरी करने वाले भी अपने परिवार के साथ हैं।
ऐसे में 21 दिन के पहले चरण के लॉक डॉउन पीरियड लोगों के लिए यादगार बनाया है। दूरदर्शन पर प्रसारित रामायण-महाभारत लोगों की आदत में आ गया है, रोजाना लोग उसका इंतजार कर रहे हैं और यह आदत में आ गया है। इसके अलावा कोई कोरोना को लेकर पेंटिंग बना रहा तो किसी ने योगा की शुरुआत की है। साथ ही किसी ने स्टडी और अच्छी पुस्तकें पढऩे को आदत बना लिया। लोग तरह-तरह से इस फ्री समय को यादगार बनाने में जुटे हैं। हमें यह जानकर तमाम जिलेवासियों और शहरवासियों पर गर्व होना चाहिए कि अधिकतर आबादी करीब 90 फीसदी लोग लॉक डॉउन का पूरा पालन कर रहे हैं। कुछ ऐसे लोग हैं जो जनता कफ्र्यू के बाद से एक दिन भी घर से बाहर नहीं निकले हैं।

स्टूडेंट्स के साथ प्रोफेशनल्स सालों बाद परिवार के साथ
शहर में कई प्रोफेशनल्स जो कि निजी और सरकारी जॉब में सालों से बाहर रहे हैं और कई स्टूडेंट्स जो कि लंबे समय से बाहर ही अध्यनरत थे उन्हें परिजनों के साथ रहने का यह मौका मिला है। इसमें उन्हें अपने पुराने दिन, बचपन याद आ रहा है। दौड़भाग भरे व्यस्ततम जीवन में बहुत कम ही ऐसे अवसर आते थे जब ये लोग अपने परिवार के साथ रह पाते थे, ऐस में लॉक डॉउन का यह दूसरा रूप आपसी प्रेम और अपनेपन के लिए काफी सुखमय भी है।
लोगों ने लॉक डॉउन काल में बताए एक्सपीरियंस
कोरोना से फाइट करने में योग काफी कारगर है। इसके लिए लगातार योगा को आदत में लाएं। हम लोग निरंतर योगा करते हैं लेकिन यह सुनहरा अवसर है जब हम योग अपनाएं।
-संतोखसिंह अजमानी, योगा एक्सपर्ट, ब्यावरा
मैंने पेंटिंग बनाने की कोशिश की है जिसमें कहा है कि कोई रोड पर न निकले वरना कोई रोने वाला नहीं मिलेगा। सभी से अपील है कि अपने-अपने घरों में ही रहें।
-कनिष्का राणा, छात्रा, निवासी कर्मचारी कॉलोनी, ब्यावरा
हमारी जनरेशन रामायण-महाभारत से दूर थी, सालों पुराना इतिहास और संस्कृति को समझने का यह अवसर है। परिवार के साथ हर दिन रामायण-महाभारत आदत सी हो गई है।
-दीपेश गुप्ता, श्रीकृष्ण कॉलोनी, ब्यावरा
सभी के साथ रहने का मौका लंबे समय बाद मिला है। ***** प्रियंका अधिकतर समय मुंबई रही है। पहला मौका है जब इतने दिनों बाद हम सभी साथ हैं। सभी लॉक डॉउन का पालन करें।
-डॉ. अमित गर्ग, युवा डेंटिस्ट, ब्यावरा
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