कांसी गांव की वन भूमि पर धड़ल्ले से हो रहा अवैध रेत का कारोबार

न खनिज विभाग करता है कार्रवाई और ना ही वन विभाग देता है ध्यान

By: brajesh tiwari

Published: 13 Mar 2018, 10:45 AM IST

राजगढ़. रेत के अवैध कारोबार में कोई रोक लग रही हो। ऐसा नजर नहीं आता। जो मामले मीडिया के माध्यम से विभाग तक पहुंचाए जाते है। उनमें छुटपुट कार्रवाई होती है, लेकिन जो नजर नहीं आते। वहां धड़ल्ले से खनन हो रहा है। बात दूर की नहीं।
जिला मुख्यालय से सिर्फ चार किमी की दूरी पर स्थित कांसी गांव में नदी हो या फिर वन भूमि। दोनों में ही जमकर खनन हो रहा है और रोकने वाला कोई नहीं है। ग्रामीणों ने ही तेजी से रेत को लेकर काटे जा रहे पेड़ों को लेकर आपत्ति दर्ज की तो रेत के कारोबारी ग्रामीणों से भी लडऩे आ गए। मामला कोतवाली तक पहुंचा, लेकिन वहां से भी सार्थक परिणाम नहीं आए।

कांसी पंचायत में वन विभाग की बीट लगती है। यहां लंबे समय से रेत का खनन चल रहा है। पहले यह खनन नदी तक सीमित था, लेकिन अब वन भूमि पर ही रेत के कारोबारियों ने खनन की शुरुआत कर दी है। जिसके लिए वन विभाग की इस बीट में लगे पेड़ भी काटना शुरू कर दिया है।

हालात यह है कि वहां लगे पेड़ अब डंठल में बदल गए है। रेत का खनन कोई और नहीं कारोबारी गांव के ही कुछ लोगों से कराते है और वही रेत राजगढ़ बिकने के लिए आती है। जिसकी न कोई रायल्टी होती है न कोई रसीद।

कांसी की इस रेत खदान में आधा दर्जन लोग रेत खनन करते समय मौत के गाल में समा चुके है। जिनमें बच्चे तक शामिल है। रेत की खुदाई के लिए अंदर-अंदर चोल बनाते है और ऊपर मिट्टी जमी रहती है। यही मिट्टी कई बार नमी में फिसल जाती है। जिसके कारण नीचे रेत निकाल रहे लोग उसमें दबे रह जाते है।

मदापुरा, पाटन के पास ककेन नदी में खुदाई
राजगढ़ शहर से लगे कालीतलाई रोड के बीच आने वाले मदापुरा खदान में भी जमकर काली मिट्टी और रेत का खनन हो रहा है। प्रतिदिन दर्जनों ट्रैक्टर रेत खदान से निकाली जा रही है, लेकिन विभाग को मामले की जानकारी होने के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं की जाती। जिसके चलते दिनोंदिन अवैध खनन का कारोबार बढ़ता जा रहा है। वहीं पाटन गांव के पास ककेन नदी से भी रेत का अवैध खनन धड़ल्ले से जारी है।

अभी तक इस तरह की सूचना हम तक नहीं पहुंची है। संबंधित बीट प्रभारी से चर्चा करता हूं। क्या मामला है और शीघ्र ही वहां कार्रवाई भी देखने को मिलेगी।
- आरएन वर्मा, डीएफओ राजगढ़

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