सीआरएम टीम का दौरा: कमियां नहीं काम का रिव्यू किया, इसी से तय होगी जिले की रेटिंग

सीआरएम टीम का दौरा: कमियां नहीं काम का रिव्यू किया, इसी से तय होगी जिले की रेटिंग

Deepesh Tiwari | Publish: Sep, 09 2018 04:04:38 PM (IST) Rajgarh, Madhya Pradesh, India

सीआरएम टीम का दौरा: कमियां नहीं काम का रिव्यू किया, इसी से तय होगी जिले की रेटिंग

राजगढ़@राजेश विश्वकर्मा की रिपोर्ट...

12 सदस्यों का केंद्रीय दल जमीनी लेवल पर स्वास्थ्य विभाग की हकीकत तलाश रहा है। शासन की योजनाओं का हर तरह से रिव्यू करने आई कॉमन रिव्यू मिशन (सीआरएम) की टीम योजनाओं और काम की गेप तलाशने आई है। टीम ने रविवार को सिविल अस्पताल, सिटी डिस्पेंसरी के साथ ही बारिश के बीच अर्बन एरिया के वार्डों का निरीक्षण किया। टीम ने पूरा जोर काम का रिव्यू करने पर दिया। यह पहला मौका है जब किसी टीम ने कमियों पर जोर नहीं दिया। रिव्यू के आधार पर ही जिले की रेटिंग तय की जाएगी।

टीम ने सिविल अस्पताल में मैटरनिटी, जनरल वार्ड, एएनएसी क्लीनिक, सोनोग्रॉफी, लैब, नेत्र रोग विभाग, कुष्ठ रोग विभाग सहित कोल्ड चैन का निरीक्षण किया। टीम कॉर्डिनेटर भारत सरकार के सलाहाकार डॉ. पी. देव ने कुष्ठ रोग के बारे में संबंधित से पूछा कि कैसे मरीज का ट्रीटमेंट करते हैं। उन्होंने तमाम विभागों में एक-एक बिंदुओं से जानकारी ली। जो लोग बता पा रहे थे उनसे जाना और जो नहीं बता पाए उन्हें समझाया कि कैसे काम करना है।

उनकी टीम में रघुनाथ सैनी, भास्कर के दास और भानुप्रिया शर्मा ने भी अर्बन एरिया की विजिट की। सिटी डिस्पेंसरी में आशा स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं, एएनएम से उन्होंने काम का तरीका जाना। रिव्यू मिशन के दौरे में खास बात यह है कि किसी भी काम की अनदेखी या कमी पर कोई डांट-फटकार किसी कर्मचारी को नहीं मिली, बल्कि एक सामान्य रिपोर्ट बनाकर टीम ले गई। करीब 12 सदस्यीय टीम में स्टेट के भी ज्वॉइंट डायेक्टर लेवल के अधिकारी शामिल हैं।

टीवी दिखाने से नहीं प्रैक्टिकली समझाने से मिलेगा पोषण
डॉ. देव ने ब्यावरा एनआरसी का निरीक्षण किया वहां की चकचौंध और बेहतर व्यवस्थाओं से काफी प्रभावित हुए, उन्होंने मौजूद नर्स से पूरी जानकारी ली कि कैसे एक बच्चे को पोषण किया जाता है कैसे उसकी मां को इसके लिए प्रेरित करते हैं। वहीं, एनआरसी में ही लगी टीवी को देख वे बोले कि इसे दिखाने से समझ नहीं आएगा, बच्चे और उनकी माताओं को प्रैक्टिकली आपको समजाना होगा, तब जाकर बात बनेगी।

रिव्यू दिल्ली जाएगा, वहीं से तय होंगे प्लॉन
सीआरएम टीम के दौरे के बाद जिलेभर की सिटी डिस्पेंसरी, अर्बन, रूरल सहित जिला अस्पताल और सविल अस्पतालों की रिपोर्ट को सेंट्रल मिनिस्ट्री को भेजा जाएगा जो कि सीधे पीएमओ को रिपोर्ट करेंगे। वहां मॉनीटरिंग की जा रही है कि सेंट्रल से जिन योजनाओं के लिए राशि खर्च की जा रही है उनका सही उपयोग ग्राउंड लेवल पर हो पा रहा है या नहीं? उस रिव्यू के हिसाब से ही योजनाओं में और विस्तार की संभावनाओं पर जोर दिया जाएगा।

बड़ी चुनौती : फर्टिलिटी रेट जिले में सर्वाधिक
वैसे निरीक्षण में भले ही शासन की योजनाओं का जो भी रिव्यू टीम ले लेकिन परिवार नियोजन में जिले की स्थिति दयनीय है। फर्टिलिटी रेट जिले में सर्वाधिक होने से जिले का आंकड़ा बिगड़ा हुआ है। नियमानुसार प्रति महिला एक-दो (यानी एक महिला के दो बच्चे) का आंकड़ा होना चाहिए, लेकिन हकीकत में यह आंकड़ा एक-तीन, एक-चार का औसत है। इससे जनसंख्या वृद्धि के साथ ही परिवार नियोजन पर कोई काम जमीनी लेवल पर नहीं हो पा रहा है।

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