सुनवाई नहीं होने पर एसडीएम की गाड़ी के सामने लेट गई पीडि़ता

सुनवाई नहीं होने पर एसडीएम की गाड़ी के सामने लेट गई पीडि़ता

Brajesh Kumar Tiwari | Publish: Mar, 14 2018 12:13:03 PM (IST) Rajgarh, Madhya Pradesh, India

जनसुनवाई: गुना जिले के मधुसुदनगढ़ का मामला, पीडि़त महिला बोली झगड़े के मांग रहे ५० लाख

राजगढ़. झगड़ा प्रथा से परेशान एक युवती राजगढ़ से लेकर गुना तक सभी अधिकारियों के कार्यालयों के दरवाजे खटखटा चुकी है, लेकिन एसपी हो या कलेक्टर आवेदन लेने के अलावा कोई कार्रवाई नहीं की।
ऐसे में एक बार फिर मंगलवार को वह राजगढ़ जनसुनवाई में पहुंची। जहां कलेक्टर कर्मवीर शर्मा की मौजूदगी में एसडीएम ममता खेड़े को आवेदन देते हुए पीडि़ता मनीषा ने आवेदन की पावती मांगी। जिस पर एसडीएम ने जो साइन किए थे।

वह भी काट दिए और एसपी के पास जाने को कह दिया। मनीषा ने बताया कि एसपी के पास पहले ही कई बार हो आई है, लेकिन वहां से कोई निराकरण नहीं हुआ। ऐसे में अब आपके सामने गुहार लगाने आई हूं, लेकिन सुनवाई नहीं हुई। जिसके बाद वह एसडीएम की गाड़ी के सामने ही लेट गई। यह देख एसडीएम ममता खेड़े गाड़ी से उतरी और उसे वहां से उठने के लिए कहा और बोली मुझे कोई आवेदन ही नहीं दिया तो मैं कहा कि पावती दूंगी। जो बात करना है एसपी और कलेक्टर साहब से करे और गार्डों के माध्यम से उठवा दिया।

झगड़ा न देने पर गांव में कर रहे नुकसान
गुना जिले के मधुसुदनगढ़ के पास स्थित श्यामपुर गांव में रहने वाली मनीषा ने बताया कि उसका विवाह वर्ष २०१४ में सुठालिया के पास ग्राम नारवे में किशनलाल से हुआ था,लेकिन विवाह के बाद वह लेने नहीं आया। मैं उसके साथ रहना भी चाहती हूं, लेकिन वह ले जाने की वजह ५० लाख रुपए का झगड़ा मांग रहा है।

जो हम पूरे परिवार की जमीन जायदाद बेचकर भी नहीं दे पाएंगे। झगड़ा न देने पर आए दिन गांव में नुकसान किया जा रहा है। करीब सात से दस लाख रुपए हम गांव वालों को झगड़ा के रूप में दे चुके है। यदि यही हाल रहा तो मैं किसी दिन यही आकर अपनी जान दे दूंगी। मेरी वजह से पूरा परिवार परेशान हो रहा है।

भाई और पिता को भिजवा चुके जेल
पीडि़ता मनीषा ने बताया कि ससुराल पक्ष के लोग दबंग है। वे मेरे भाई मेहरबानसिंह व पिता धीरपसिंह पर आगजनी के दो झूठे प्रकरण दर्ज कराते हुए एक मामले में भेज भी भिजवा चुके है। जबकि दूसरा मामला अभी कुछ दिन पहले ही दर्ज हुआ है।

क्या है झगड़ा
जिले की कई जातियों ने नातरा, झगड़ा प्रथा प्रचलित है। जिसके तहत विवाह या सगाई की रस्म किसी भी पक्ष की तरफ से टूटती है तो उसका हर्जाना झगड़े के रूप में वर पक्ष लेता है। यह राशि समाज की पंचायत द्वारा तय होती है। जिसकी लिमिट नहीं होती। झगड़ा नहीं देने पर गांव में पड़ोसियों को आर्थिक नुकसान पहुंचाते है। जिसकी भरपाई वधु पक्ष द्वारा की जाती है। हालात यह है कि पुलिस भी ऐसे मामलों में तुरंत कार्रवाई के सामाजिक स्तर पर उसे सुलझाने की सलाह देती है।

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