हाथों में तिरंगा लिए नम आंखों से शहीद को अंतिम विदाई देने उमड़ा जनसैलाब

भोपाल से खुनजेर तक नम हुई हर आंख, जहां से गुजरा आखें नम कर गया शहीद मनीष का काफिला, लोगों ने रुककर किया शहीद को सेल्यूट..

By: Shailendra Sharma

Published: 26 Aug 2020, 06:59 PM IST

राजगढ़. देश की रक्षा में आतंकवादियों की साजिश में शहीद होने वाले राजगढ़ के लाल मनीष कारपेंटर को अंतिम विदाई देने के लिए जनसैलाब उमड़ा। भोपाल से जैसे ही मनीष के पार्थिव देह को लेकर आर्मी के विशेष वाहन और साथ के काफिले ने जिले की सीमा में प्रवेश किया तो हर नगर, कस्बे, गांव में लोग स्वागत की तैयारी में खड़े थे। कहीं फुट ओव्हर ब्रिज पर लोग जमा थे तो कहीं रोड के आस-पास कतार बनाकर पुष्प अर्पित करने लोग जमा थे। जिस शहर, जिस गांव और जिस भी नगर से मनीष का पार्थिव देह गुजरा वहां के लोगों की आंखें नम हो गईं। राष्ट्र भक्ति का जज्बा लोगों में इस तरह जागा कि सुबह से लेकर शाम तक लोग मनीष के लिए डटे रहे। जहां भी स्वागत हुआ वहीं से लोग काफिले के साथ निकल लिए।

 

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जो जहां रुका वहीं से किया सेल्यूट
लालघाटी से रवाना होने के बाद काफिला श्यामपुर, दोराहा चौराहा, कुरावर, नरसिंगढ़, छोटा बैरसिया, बोड़ा, मंडावर, पचोर और खुजनेर... जहां भी पहुंचा जगह-जगह आतिशबाजी और स्वागत तो हुआ ही लेकिन जितने भी लोग रास्ते में मिले उन्होंने वहीं से सेल्यूट किया। गांवों में लोग फूल हाथों में लिए खड़े थे, किसान खेतों से ही काम छोडक़र मनीष के पार्थिव देह को सेल्यूट कर रहे थे। राहगीर भी साइड में खड़े हुए थे और सलाम करने लगे।

 

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सेल्फी लेने की होड़, हर कस्बे-नगर में भीड़
शहीद की पार्थिव देह को लेकर चल रहे आर्मी के विशेष वाहन को छूने, उसके साथ सेल्फी लेने की मानो होड़ मच गई। जो जहां से जुड़ा वहीं से काफिले के साथ हो लिया। बाइक, कार सभी वाहन लेकर लोग शहीद की अंत्येष्टि में शामिल होने निकल पड़े। हाथ में तिरंगा थामे, नारेबाजी करते हुए युवाओं का हुजूम उमड़ पड़ा, मानो कोई राष्ट्रीय त्योहार हो, बिन बुलाए ही इतने ज्यादा लोग इसमें शामिल हुए कि नगर, कस्बों में जाम लग गया। भोपाल से खुजनेर का करीब 120 किलो मीटर का सफर करने में काफिले को छह घंटे से अधिक का समय लगा।

 

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प्रशासन, पुलिस के अनुमान से ज्यादा लोग जुटे
करीब 10 हजार से अधिक लोगों के साथ काफिला विभिन्न नगर, गांवों से होता हुआ खुजनेर पुहंचा। करीब दो दिन पहले ही सूचना मिल जाने के बाद तमाम तरह की तैयारियों में प्रशासन जुटा था लेकिन उन्हें भी इस बात का अनुमान नहीं था कि इतने लोग जमा होंगे। पचोर, मिट्ठनपुर से खुजनेर के बीच तो स्थिति यह थी पूरे मार्ग पर लोग जमा थे। संकरे नगर खुजनेर की हर गली, छतों पर लोगों की भीड़ जमा थी जहां जिलेभर से आए लोग मौजूद थे।

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