अस्पताल में न शव वाहन न डी- फ्रीजर

अस्पताल में न शव वाहन न डी- फ्रीजर
rajgarh

Ram kailash napit | Publish: Oct, 03 2016 11:14:00 PM (IST) Rajgarh, Madhya Pradesh, India

रोकस की बैठक में दिए गए निर्देशों का नहीं हुआ पालन


ब्यावरा. हर बार की तरह इस बार भी जनप्रतनिधियों और प्रशासन के तमाम दावे धूमिल होते नजर आ रहे हैं। हाल ही में सिविल अस्पताल में हुई रोगी कल्याण समिति की बैठक में किए गए नेताओं के दावे और अफसरों के आश्वासन झूठे साबित हो रहे हैं।

रविवार को आकाशीय बिजली के कहर ने दो ग्वालियर और श्योपुर निवासी शिक्षकों की जान ले ली  पोस्टमॉर्टम के लिए उन्हें सिविल अस्तपाल लाया गया, लेकिन सरकारी ढर्रे की हकीकत सामने आ ही गई। पहले घटनास्थल पर ही करीब दो से तीन घंटे शव पड़े रहे। पुलिस अपनी खानापूर्ति करती रही, 108  ने शव उठाने से मना कर दिया। फिर बची हुई कसर सिविलअस्पताल में पूरी हो गई। शाम करीब साढ़े पांच पहुंचे शव को पोस्टमॉर्टम के लिए पीएम रूम तक कीचड़ भरे मार्ग से ले जाना पड़ा। बिना बाउंड्री के पीएम रूम में परेशानियों की बीच पीएम करना पड़ा। साथ ही दोनों शिक्षकों के शव पीएम के बाद निजी वाहनों से भेजे गए। जबकि सिविल अस्पताल में एम्बुलेंस है, लेकिन बावजूद इसके उन्हें निजी वाहन से घर भेजना पड़ा। दो प्रमुख हाईवे के संगम स्थल ब्यावरा में आए दिन हादसे होना आम बात है। मीटिंग 15 दिन बाद ही जिम्मेदारों के तमाम दावे-आश्वासनों की हकीकत सामने आ गई।

 मृतकों को न शव वाहन की सुविधा मिली न ही डी-फ्रीजर की। बैठक में तमाम नेताओं और अफसरों की मौजूदगी में दिएगए सख्त दिशा-निर्देशों के बावजूद बात नहीं बनी। 15 दिन बाद भी शव वाहन बैठक के दावों से बाहर निकलकर नहीं आ पाए। साथ ही डी-फ्रीजर भी जिला अस्पताल से ब्यावरा नहीं पहुंच पाया है। इसके अलावा पीएम रूम की मरम्मत और बाउंड्री का निर्माण होना भी अभी कोसों दूर है।

MP/CG लाइव टीवी

खबरें और लेख पढ़ने का आपका अनुभव बेहतर हो और आप तक आपकी पसंद का कंटेंट पहुंचे , यह सुनिश्चित करने के लिए हम अपनी वेबसाइट में कूकीज (Cookies) का इस्तेमाल करते हैं। हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति (Privacy Policy ) और कूकीज नीति (Cookies Policy ) से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned