कोई मानने को तैयार नहीं, तीन घंटे की छूट में भीड़ के साथ मार्केट में पहुंच रहे लोग, सोशल डिस्टेंस का पालन नहीं कर रहे

लॉक डाउन का गंभीरता से पालन नहीं कर रहे कुछ लोग
पीपल चौराहे पर मेला जैसा दृश्य, गलियों में सब्जी पहुंच रही फिर भी ठेलों पर भीड़, गुड़ और अन्य गैर जरूरी सामान की दुकानें भी खुलीं

By: Rajesh Kumar Vishwakarma

Published: 29 Mar 2020, 11:32 PM IST

ब्यावरा.जहां लॉक डॉउन के प्रोटोकॉल में शासन-प्रशासन, पुलिस और डॉक्टर्स पुरजोर कोशिश अपने कर्तव्य स्थल पर कोरोना से लडऩे के लिए कर रहे हैं वहीं कुछ लोगों की जिद उनकी मेहनत पर हर दिन पानी फेर रही है। लगातार अह्वान और समझाइश के बावजूद लोग तीन घंटे की सुबह की जरूरी सामान की छूट को भी गलत ले रहे हैं। उसमें भी लोग भीड़ लगाने से नहीं चूक रहे, इससे न सिर्फ चैन टूट रही है बल्कि सोशल डिस्टेंसिंग का कोई मतलब नहीं रह गया है।
दरअसल, शहर में सुबह आठ से 11 बेज तक की छूट का भी लोग दुरुपयोग करने में लगे हैं। लगातार समझा देने पर भी नहीं मान रहे हैं। किराना दुकानों और दूध डेयरियों की आड़ में गुड़, पान, फोटो स्टूडियो, इलेक्ट्रिक सहित अन्य दुकानें भी लोग खोल रहे हैं, कोई इसकी गंभीरता को नहीं समझ पा रहा। एसडीएम, प्रशासन द्वारा दो दिन पहले एक नियत व्यवस्था कर देने के बावजूद लोग इसका गंभीरता से पालन नहीं कर पा रहे। इसी कारण लोगों की भीड़ हर दिन की सुबह तीन घंटे की छूट में लग रही है। ऐसे में उन तमाम लोगों की लॉक डॉउन की मेहनत खराब हो रही जो अपने घरों में कैद रहकर बखूबी इसका पालन कर रहे हैं। वहीं, उन स्वास्थ्य कर्मियों, पुलिस व अन्य जाबाजों की मेहनत भी बेकार हो रही है जो दिन-रात आप और हमारे लिए लड़ रहे हैं।

होम डिलिवरी फेरल, किराना दुकानों पर भी भीड़
होम डिलिवरी को लेकर दिए गए निर्देश ब्यावरा में सफल नहीं हो पाए। ऐसे में जिन किराना व्यवसाइयों को एक-एक मीटर दूरी पर लोगों को खड़ा करने की व्यवस्था करना थी वह भी फेल होती नजर आ रही है। किराना दुकानों के बाहर आम दिनों की ही तरह भीड़ लगी हुई है, इससे लॉक डॉउन की चैन हर दिन सुबह टूट जाती है और लगातार खतरा बढ़ता जा रहा है।
सोशल डिस्टेंस की गंभीरता को समझना होगा
लोगों को सोशल डिस्टेंस की गंभीरता को समझना होगा, यही एक मात्र इस गंभीर बीमारी का उपचार है। विशेषज्ञ डॉक्टर्स और डब्ल्यूएचओ तक यह सलाह दे चुका है फिर भी लोग गंभीर नहीं है। अस्पताल उसी स्थिति में आएं जब बहुत जरूरी है। वाकई यदि इस कोराना के खिलाफ जंग को जीतना है तो घर रहकर सहयोग करना होगा।
-डॉ. राकेश गुप्ता, सीनियर सर्जन, सिविल अस्पताल, ब्यावरा
और कम कर देंगे समय
लोगों से हमने काफी अपील कर ली है, यहां तक कि सब्जियां गलियों में पहुंचा दी, दूध के लिए भी व्यवस्था की है। किराना में जरूर दिक्क थी तो इसके लिए भी हम अल्टरनेट दिन की व्यवस्था कर देंगे और जरूरत पड़ी तो जरूरी सामान के लिए दी जाने वाली छूट के समय में भी कटौती कर देंगे।
-संदीप अस्थाना, एसडीएम, ब्यावरा
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Rajesh Kumar Vishwakarma
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