नातरा-झगड़ा की तर्ज पर एनीमिया मुक्त राजगढ़ के लिए चलाएंगे अभियान

- आंकड़े सामने आए तो बनाया मिशन
- कलेक्टर ने बनाई कार्य योजना, गांव-गांव जाकर जुटाई जोगी जानकारी, किशोरी बालिकाओं सहित प्रसूताओं पर रहेगा ध्यान

ब्यावरा. स्वास्थ्य विभाग के सर्वे में सामने आए जिले के चौंका देने वाले आंकड़ों के बाद एनीमिया को लेकर जिला प्रशासन ने योजना तैयार की है। इसके तहत मौजूदा स्थिति में नातरा-झगड़ा पर अंकुश लगाने चलाए जा रहे अभियान की तर्ज पर एनीमिया मुक्त राजगढ़ करने का अभियान चलाया जाएगा।

इस अभियान के तहत तमाम एनीमिक महिलाओं, प्रसूताओं और किशोरियों को चिह्नित किया जाएगा। इसके बाद उनमें सुधार की कार्य योजना तैयार की जाएगी। इसके लिए प्रशानिक स्तर की टीमें इसके कारणों को खोजेगी।

साथ ही इसके लिए प्रमुख प्लॉन तैयार करेगी। ऐसे ग्रामीण अंचलों का सर्वे किया जाएगा जहां की महिलाओं, प्रसूताओं में हीमोग्लोबीन का आंकड़ा Óयादा गड़बड़ है। उन्हें चिह्नित किए जाने के बाद आंगनबाड़ी केंद्रों को यह जवाबदेही दी जाएगी कि वे सुुनिश्चित करें कि हीमोग्लोबीन मैनेज कैसे करना है?

एनीमिक मरीज की कैटेगिरी (सीवियर एनीमिक, एनीमिक और नॉर्मल) डिसाइड करेंगे, इसी हिसाब से उनका ट्रीटमेंट करेंगे। इसके लिए पहले चरण में प्रशासन जागरूकता अभियान चलाएगा, जिसमें लोगों को समझाया जाएगा कि एनीमिया के दुष्परिणाम क्या हो सकते हैं और यह किस वजह से होता है?

उल्लेखनीय है कि एनीमिया को लेकर चिंता जनक आंकड़े से रूबरू पत्रिका ने 1& जनवरी के अंक में करवाया था। इसके बाद से जिला प्रशासन ने इसे गंभीरता से लिया और न सिर्फ अभियान के तौर पर शुरुआत की बल्कि टीएल बैठक में भी तमाम जिम्मेदारों के बीच प्लॉन के तौर पर प्रस्तुत किया गया और जिम्मेदारी सौंपी गई।

जानें एनीमिया के प्रमुख कारण
बाल विवाह : एनीमिया हो जाने का प्रमुख कारण बाल विवाह है। जिले में यह बड़ी समस्या है जिस पर अंकुश लगाने नातरा-झगड़ा प्रथा के खिलाफ अभियान चलाया जा रहा है।

जल्दी मां बन जाना : दूसरा प्रमुख कारण है जल्दी मां बन जाना। जल्दी शादी हो जाने के बाद जल्दी मां बननने की स्थिति से हीमोग्लोबीन कम हो जाता है इसी से दिक्कतें होती है।

मैटरनिटी कॉम्प्लिकेशन : हीमोग्लोबीन कम होने और एनीमिक महिला होने के कारण डिलिवरी के दौरान दिक्कतें (मैटरनिटी कॉम्प्लिकेशन) हो जाते हैं। इसी कारण मातृ मत्यु दर का अनुपात बढ़ जाता है।

जागरूकता का अभाव : एनीमिया में सर्वाधिक बड़ी चुनौती जागरूकता का अभाव भी है। इसमें समझाने के बावजूद लोग समझने को तैयार नहीं होते। हालात ये हैं कि हीमोग्लोबीन की कमी सहित अन्य कमियां वे समझ नहीं पाते।

एनीमिया दूर हुआ तो स्वत: ही खत्म हो जाएगा कुपोषण
59.6 प्रतिशत एनीमिक महिलाएं होने के साथ ही जिले में दूसरी सबसे बड़ी चुनौती कुपोषण है। इसके लिए सेम-फ्री राजगढ़ अभियान चल रहा है। लेकिन यदि एनीमिक अभियान सुचारू रूप से चल पाता है तो इसी से आधी समस्या का समाधान हो जाएगा।

पूर्व सीएमएचओ और सीनियर डॉ. एसएस गुप्ता बताते हैं कि यदि एनीमिया को हरा दिया गया तो कुपोषण की दिक्कत स्वत: ही खत्म हो जाएगा। कमजोर, कम हीमोग्लोबीन वाली एनीमिक प्रसूताओं के ब"ो पोषण के अभाव में कुपोषित पैदा होते हैं।

जन्म लेने के बाद भी उन्हें पर्याप्त पोषण नहीं मिल पाने के कारण कुपोषण और भी बढ़ जाता है। यदि जागरूकता के साथ उन्हें सही पोषण मिलता रहा और एनीमिया पर अंकुश लगा तो कुपोषण का रेट कम किया सकता है।

जागरूकता के साथ चलाएंगे अभियान
हमारी कोशिश रहेगी कि कोई भी युवती 18 वर्ष से पहले मां न बनें। जब कोई बाल विवाह नहीं होगा और समय रहते प्रसूताओं का हीमोग्लोबीन चेक होता रहेगा तो निश्चित ही एनीमिक पेशेंट्स में कमी आएगी। इसी से हमारा लक्ष्य है कि कुपोषण पर भी अंकुश लगाया जाएगा। नातरा-झगड़ा, बाल विवाह का सीधा कनेक्शन भी इसी अभियान से है। ऐसे में अभियान को सतत चलाया जाएगा।
- निधि निवेदिता, कलेक्टर, राजगढ़

Rajesh Kumar Vishwakarma
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