scriptonly 77 people out of a population of 75000, who could give feedback? | ये भी अजीब... 75 हजार की आबादी में नपा को 77 लोग ही मिले, जो सफाई का फीडबैक दे सके? | Patrika News

ये भी अजीब... 75 हजार की आबादी में नपा को 77 लोग ही मिले, जो सफाई का फीडबैक दे सके?

फीडबैक लेने में भी नगर पालिका प्रशासन पीछे... कैसे स्वच्छता में अव्वल आएंगे?
feedback से की जाती है स्वच्छता सर्वेक्षण की रैंकिंग, ब्यावरा में गंदगी ही इतनी की फीडबैक में ही चल पता चल जाए हकीकत

राजगढ़

Published: April 01, 2022 09:03:35 pm

राजेश विश्वकर्मा
ब्यावरा.इंदौर-भोपाल जैसी चकाचौंध और सफाई का सपना संजोए बैठी ब्यावरा नगर परिषद जमीनी स्तर पर कुछ नहीं कर रही। हाल ये है कि सफाई को लेकर आंकड़ों में भी परिषद फैल है।
आपको यह जानकर आश्चर्य होगा कि जिले की सबसे बड़ी नगर परिषद में 75 हजार की आबादी में महज 77 लोगों का फीडबैक लिया। यानि फीडबैक इतने कम लोगों का लिया कि इसी से अंदाजा लगाया जा सकता है कि स्वच्छता सर्वेक्षण में हम किस स्थिति में हैं और प्रदेश या संभागस्तर पर हमारी रैंकिंग क्या होगी? हर दिन स्वच्छा और अन्य समस्याओं को लेकर पिछड़ रही ब्यावरा नपा जमीनी स्तर पर काम नहीं कर पा रही है। इसीलिए हर तरह से दिक्कतों का अंबार यहां है। विभागीय स्तर पर अधीनस्थ कर्मचारियों द्वारा किए जाने वाले प्रयास ही इतने कमजोर हैं कि अव्वल तो दूर बेहतर रैंकिंग भी मिल पाना मुश्किल लग रहा है। हाल ही में जारी हुई फीडबैक की रैंकिंग में ब्यावरा नगर पालिका बॉटम टॉप-5 में आई है। जिसमें महज 77 लोगों से जिम्मेदारों ने फीडबैक लिया कि सफाई की स्थिति क्या है? इसी के समतुल्य रायसेन के बैगमगंज में सर्वाधिक 18408 लोगों से फीडबैक लिया गया। बता दें कि अगले माह स्वच्छता सर्वेक्षण का रिजल्ट आने वाला है। ऐसे में इस सीमित फीडबैक से क्या ब्यावरा को रैंकिंग मिलेगी यह अंदाजा लगाया जा सकता है। पिछले सत्र में हमने 56000 लोगों से फीडबैक लिया था, इसके बाद प्रदेश में 27वें और नेशनल में 133 नंबर पर थे।
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...तो महज 0.12 प्रतिशत लोगों से जाने स्वच्छता के हाल
कुल मिलाकर ब्यावरा में प्रयास इतने कमजोर हैं कि हम लोगों से यह तक नहीं पूछ पा रहे हैं कि हमारी स्वच्छता की वास्तविकता क्या है? मौजूदा फीडबैक के आंकड़ों में यदि देखा जाए तो सबसे ज्यादा कमर्शियल और तीन-तीन फोरलेन, हाइवे से घिरे हुए ब्यावरा में बीते साल के स्वच्छता सर्वेक्षण का फीडबैक महज 0.12 प्रतिशत लोगों से ही लिया गया जो कि काफी कम है। मार्च में भोपाल सहित अन्य जगह की टीमें आईं, इनमें ब्यावरा नपा की टीम को भी सहयोग करना था लेकिन फीडबैक के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति ही हो पाई है। जिससे हम लगातार पिछड़ते जा रहे हैं।
अजनार कागजों में साफ हुई, शहर में भी दिखावे की स्वच्छता ज्यादा
ब्यावरा में सफाई सहित अन्य जनता से जुड़े काम कागजों में ही ज्यादा हो पाए हैं। अजनार नदी को 50 सालों में न यहां की नगर परिषद सुधार पाई न ही नेता। कागजों में ही उसे संवारने के प्लॉन बनते रहे। इसके अलावा शहरभर में नपा द्वारा किए जाने वाले प्रयासों में दिखावे की स्वच्छता ज्यादा हुई। वास्तविक प्रयासों के अभाव के कारण ही आज ब्यावरा इतना पिछड़ा हुआ है। सोशल मीडिया पर ब्यावरा नपा को ट्रोल किया जाता है, इसके मीम्स बनाए जाते हैं।
सपने इंदौर-भोपाल के, प्रयास आधे भी नहीं
मप्र की पहचान बन चुके इंदौर में स्वच्छता का इतना अनुशासन है कि रंग पंचमी की गेर के बाद नगर निगम ने सडक़ें धुलवा दी थी। वहां के अफसरों ने इतने प्रयास किए कि वहां क नागरिक भी सफाई को लेकर अनुशासित है। हमारे यहां तो डस्टबिन रखा भी हो तो बगल में कचरा फैंकने का कल्चर है। गाडिय़ां आती भी हैं तो उनका उपयोग कम होता है। प्रशासनिक स्तर पर भी कोई कष्ट उठाना नहीं चाहता कि शहर के हाल सुधर पाएं? इसीलिए सपने ही हम इंदौर-भोपाल जैसे देख रहे हैं जमीनी स्तर पर कोई काम नहीं कर रहे।
फीडबैक को आंकड़े में समझें
नगर परिषद जनसंंख्या फीडबैक
ब्यावरा 75000 77
बेगमगंज 45000 18404
मंडीदीप 1 लाख 8660
गुना 1 लाख 9718
(नोट : नगरीय प्रशासन विभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार)
अभी और फीडबैक लेंगे
स्वच्छता सर्वेक्षण को लेकर फीडबैक जारी है, यह संख्या कम है लेकिन हम प्रयासरत हैं। फीडबैक का यह क्रम लगातार एक माह और चलेगा, इसके बाद रिजल्ट आएगा। हम ज्यादा से ज्यादा लोगों को इसमें जोड़ेंगे।
-सुष्मा धाकड़, सीएमओ, नपा, ब्यावरा

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