बिहार से खरीदकर लाए नाबलिग बच्चों से करवा रहे थे मजदूरी, अधिकारी बेखबर

बिहार से खरीदकर लाए नाबलिग बच्चों से करवा रहे थे मजदूरी, अधिकारी बेखबर

Amit Mishra | Publish: Apr, 15 2019 01:53:52 PM (IST) Rajgarh, Rajgarh, Madhya Pradesh, India

राजगढ जिले का मामला...

ब्यावरा. मानव तस्करी के लिए राष्ट्रीय स्तर पर ख्यात जिले में एक और मामला खरीद-फरोख्त का आया है, जिसमें बिहार से लाए गए नाबालिग (13-14 वर्ष के) बच्चों से उपार्जन केंद्रों पर बोरियां उठवाई जा रही थीं। खास बात यह है कि इतनी बड़ी लापरवाही पर न जिम्मेदार अधिकारी की नजर पड़ी, ना यह सुनिश्चित हो पाया कि आखिर ये बच्चे काम कैसे कर रहे हैं?


दो नाबालिग से करवाया जा रहा था काम ...
जब पुलिस प्रशासन की टीम को इसकी जानकारी मिली तो चाइल्ड लाइन टीम के साथ पहुंची पुलिस व प्रशासन की टीम ने उन्हें मुक्त करवाया। गिंदौरहाट उपार्जन केंद्र पर बाल मजदूरी का उक्त मामला सामने आया है। जहां बिचौलियों द्वारा बिहार से लाए गए दो नाबालिग से काम करवाया जा रहा था।

जुर्माने का प्रावधान...
बच्चों को यह तक पता नहीं है कि उन्हें कितने रुपए मिलना है। उन्होंने बताया कि परिजनों को एक-एक हजार रुपए देकर ठेकेदार ले आया। करीब सप्ताहभर से बच्चे 50-50 किलो की गेहूं की बोरियां उठाने का काम कर रहे हैं। मामले न सिर्फ बाल मजदूरी का प्रकरण बनना है बल्कि जुर्माने का प्रावधान भी है।

बिहार के ठेकेदारों ने उपार्जन केंद्र प्रभारी को सौंपे बच्चे
प्रथम दृष्टया यह सामने आया है कि उक्त बच्चों को बिहार के ही ठेकेदार द्वारा भेजा गया है। साथ ही कुछ बिचौलिए जो बच्चों के परिजनों को चंद रुपए देकर यहां बाल मजदूरी के लिए उन्हें यहां ले आते हैं।


पिछले साल भी उक्त ठेकेदार सोसायटी में मजदूर लाया था, इस बार भी 60 मजदूर आए थे लेकिन काम पर 30 को ही रखा। उक्त 30 मजदूरों का रिकॉर्ड गिंदौरहाट केंद्र पर है लेकिन नाबालिग बच्चों का कोई रिकॉर्ड उनके पास नहीं मिला।

दो दिन पहले केंद्र से भाग निकले थे बच्चे...
जानकारी के अनुसार केंद्र से उक्त चार नाबालिग 12 अप्रैल को भाग गए थे। एक पूणु के ठेकेदार ने पकड़ लिया, दो उनके गांव भाग गए और एक को ब्यावरा जीआरपी ने पकड़कर चाइल्ड लाइन को सौंप दिया।

13 वर्षीय बच्चे ने चाइल्ड लाइन को पूरा वाकया बताया। प्रशासन की टीम ने गिंदौरहाट केंद्र पहुंची, जहां प्रशासनिक अधिकारियों की मौजूदगी में प्रकरण बनाया गया।


बंधुआ मजदूरी व बाल तस्करी का भी प्रकरण...
बंधुआ मजदूरी अधिनियम-1976 के अनुसार नाबालिग को किसी अन्य राज्य में ले जाकर काम करवाना गलत है। साथ ही किशोर न्याय अधिनियम-2015 के तहत इस तरह के मामले मानव बाल तस्करी के अंतर्गत भी आते हैं।


18 साल से कम उम्र के बच्चों से जोखिम वाले काम करवाना इस दायरे में आता है। इसके अलावा बंधुआ मजदूरी के तहत दूसरे राज्य में काम के लिए ले जाना और काम के पैसे ठेकेदार द्वारा लेन-देन करना भी बंधुआ मजदूरी की श्रेणी में है। बच्चों को इस काम से निकाल कर जिला प्रशासन द्वारा बंधुआ मजदूरी से मुक्ति प्रमाण-पत्र जारी किया जाता है।

पुलिस के साथ पहुंची प्रशासनिक टीम...
चाइल्ड लाइन टीम के साथ प्रशासनिक अमला भी केंद्र पर पहुंचा जहां रात आठ बजे नायब तहसीलदार, आईसीपीएस, श्रम विभाग, पुलिस द्वारा उपार्जन केंद्र पर तलाशी ली गई। नायब तहसीलदार प्रदीप भार्गव, संरक्षण अधिकार सुरेंद्र शर्मा, चाइल्ड लाइन के केंद्रसमंयवक मनीष दांगी, लेबर इंस्पेक्टर अजय शाह, काउंसलर नरेंद्र व्यास, राहुल चौरसिया और पुलिस गार्ड की मौजूदगी में बच्चों को मुक्त किया गया।


वहां टीम को एक 14 वर्षीय बालक मिला जिसे एक दिन पहले भागने के दौरान ठेकेदार ने पकड़ लिया था। वहां मौजूद लोगों से पूछताछ की तो उन्होंने बच्चों द्वारा काम करवाना कबूला। बता दें कि दोनों बच्चों को पहले चाइल्ड लाइन के पास रखा जाएगा फिर परिवार बाल कल्याण समिति को सौंपा जाएगा, इसके बाद उनके घर भेजा जाएगा।

 

जो भी दोषी होगा, उस पर होगी एफआईआर ...
शासकीय उपार्जन केंद्र पर काम करवाना अशोभनीय है। सीडब्ल्यूसी कमेटी के पास प्रकरण को प्रस्तुत किया जा रहा है। उसमें जो भी दोषी होगा उसमें प्रकरण दर्ज कर कार्रवाई की जाएगी। इस तरह के जितने भी मामले होंगे उनमें कार्रवाई होगी।
-निधि निवेदिता, कलेक्टर,राजगढ

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