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अजब-गजब एमपी : राजस्थान के ईलाज से ही ठीक होते हैं एमपी के इस जिले के मरीज!

जिले में करोड़ों रुपए सिर्फ हेल्थ पर खर्च, फिर भी भरोसा नहीं, राजस्थान के अस्पताल बन रहे सहारा
-डिलिवरी-सीजर तक यहां कराना पसंद नहीं करते, राजगढ़ तक के लोगों की पहली पसंद राजस्थान का झालावाड़, फिर इंदौर-भोपाल और उज्जैन का विकल्प

राजगढ़

Published: April 25, 2022 08:16:36 pm

राजेश विश्वकर्मा
ब्यावरा.central and state level के हर साल के Budget का यदि आकलन किया जाए तो पांच बड़े Medical college संचालित किए जा सकते हैं इतना खर्च अकेले राजगढ़ जिले में दिए जाते हैं, बावजूद इसके health Department की हकीकत किसी से छिपी नहीं है। ब्लॉक लेवल पर मेले लगाकर योजनाओं की जानकारी तो दे रहे लेकिन हकीकत में उन्हें लाभ मिल भी रहा या नहीं यह कोई नहीं जानना चाहता। करोड़ों रुपए सिर्फ हेल्थ पर खर्च कर देने के बावजूद विभाग पर जिले की जनता का भरोसा नहीं है। आधे से ज्यादा जिले को राजस्थान का झालावाड़ मेडिकल कॉलेज संभालता है और बाकि बचे हुए indore-bhopal-ujjain का रुख करते हैं।
दरअसल, दिन-ब-दिन बिगड़ती स्वास्थ्य सेवाओं से लोगों का भरोसा इसलिए भी उठ गया है कि यहां मूल उपचार कराने में भी ही आम आदमी को पसीने आ जाते हैं। डिलिवरी और सीजर करवाना बड़ी चुनौती से कम नहीं है। सिविल अस्पताल और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र तो दूरdistrict hospital में भी ये दिक्कतें आम हैं। यहां मूल diseases का the treatment तक समय पर नहीं पाता। किसी को यदि emergency होती भी है तो जिले के चारों ओर के कोनों से लगे अन्य शहरों के अस्पतालों की ओर लोग रुख करते हैं, लेकिन जिला अस्पताल में जाना कोई पसंद नही नहीं करता।
अजब-गजब एमपी : राजस्थान के ईलाज से ही ठीक होते हैं एमपी के इस जिले के मरीज!
अजब-गजब एमपी : राजस्थान के ईलाज से ही ठीक होते हैं एमपी के इस जिले के मरीज!
जानें क्या इमेज बना रखी है हेल्थ डिपार्टमेंट ने खुद की

जिला मुख्यालय से लोग झालावाड़ जाना पसंद करते हैं- : यदि कोई इमरजेंसी हो या डिलिवरी-सीजेरियन केस हो तो माचलपुर, जीरापुर, छापीहेड़ा, खिलचीपुर और यहां तक कि राजगढ़ शहर तक के लोग राजस्थान के झालावाड़ मेडिकल कॉलेज को प्राथमिकता देते हैं, वहां की स्वास्थ्य सेवाओं पर भरोसा करते हैं कोई जिला अस्पताल जाना पसंद नहीं करता।
सारंगपुर-पचोर तक के मरीज शाजापुर जाते हैं- : यदि कोई केजुअल्टी, एक्सीडेंटल केस या किसी भी प्रकार की इमजेंसी होती है तो सारंगपुर-पचोर, पड़ाना, लीमा चौहान सहित पूरे क्षेत्र के लोग पड़ोसी जिले शाजापुर या इंदौर-उज्जैन का रुख करते हैं। आज तक कोई केस सारंगपुर से जिला अस्पताल नहीं पहुंचा होगा। यानि यहां भी भरोसा न के बराबर ही है।
कुरावर-नरसिंहगढ़-ब्यावरा के लोग भोपाल जाते हैं- : हमेशा चर्चा में रहने वाले ब्यावरा अस्पताल के भी यही हाल हैं। कहने को यहां हाइवे जी सर्वाधिक केजुअल्टी आती हैं लेकिन बाकि सेवाएं में जनता का भरोसा नहीं है। किसी भी प्रकार की इरमजेंसी होते ही कुरावर, ब्यावरा औरा नरसिंहगढ़ के लोग भोपाल जाना ही पसंद करते हैं। स्थानीय स्तर पर कोई भरोसा नहीं करता।
कभी सीएचसी सेंटर पर होती थी डिलिवरियां, अब धूल खा रहे
केंद्रीय स्वास्थ्य मिशन और प्रदेशस्तरीय टीम का पूरा फोकस संस्थागत प्रसव और शत-प्रतिशत सीजेरियन केसेस पर होता है लेकिन यहां सब उल्टा है। यहां सामान्य डिलिवरियां तक सही से नहीं होती उल्टा उसमें रुपयों की लेन-देन के लिए विभाग ख्यात है। सीजेरयिन केसेस न के बराबर हो रहे हैं। तत्कतालीन कलेक्टर नीरज कुमार सिंह ने जिले के करीब पांच सीएचसी (कम्यूनिटी हेल्थ सेंटर) पर डिलिवरी पाइंट्स बनाए थे, कुछ डिलिवरी होने भी लगी थी लेकिन अब सभी केंद्र लगभग धूल खा रहे हैं। इसे लेकर खासी चिंताजनक स्थिति जिले की है.
सीने में दर्द भी हुआ तो भागना प़ड़ता है इंदौर-भोपाल या झालावाड़
इससे बड़ी शर्म की बात क्या होगी सिर्फ हेल्थ पर ही करोडो़ं रुपए खर्च किए जाने और सालों से इसे सुधारने के लिए प्रयासरत सरकारें अभी तक इसमें कुछ बेहतर परिवर्तन नहीं ला पाई हैं। जिले में इतने अस्पताल होने, विशेषज्ञ डॉक्टर्स के बावजूद किसी भी प्रकार की इमरजेंसी चाहे सीने में दर्द ही क्यों न हो सभी को इंदौर-भोपाल या झालावाड़ भागना पड़ता है। यानि यहां की स्वास्थ्य सेवाएं पूरी तरह से फेल है, इसी कारण दिक्कतें ही दिक्कतें हो रही है। जिस पर विभागीय जिम्मेदार भी ध्यान नहीं दे पाते।
फैक्ट-फाइल
-1 जिला अस्पताल
-4 सिविल अस्पताल
-5 सामुदायिक स्वास्थ केंद्र
-27 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र
-233 उप-स्वास्थ्य केंद्र
-5 सीएचसी सेंटर
(नोट : जानकारी स्वास्थ्य विभाग के अनुसार)
हम प्रयासरत हैं बेहतर के लिए
कुछ दिक्कतें संसाधनों की कमी है और बाकि की दिक्कतों को दूर करने का प्रयास कर रहे हैं। एचआर के लिए भी हम सतत लिख रहे है। जहां तक सुधार की बात है उसके लिए हम प्रयासरत हैं कि उसमें कुछ बेहतर किया जा सके। हम सतत मॉनीटरिंग कर रहे हैं।
-डॉ. दीपक पिप्पल, सीएचएमओ, राजगढ़
धीरे-धीरे सुधार हो रहा है
शासनस्तर पर पूरा फोकस स्वास्थ्य सेवाओं पर दिया जा रहा है अब लोकल स्तर पर ये लोग नहीं कर पा रहे हैं तो गलत है। हम यह जरूर कहेंगे कि इस दिशा में धीरे-धीरे सुधार हो रहा है। काम भी किए जा रहे हैं, लेकिन जो कमियां होंगी उन्हें हम जरूर दूर कराएंगे।
-रोडमल नागर, सांसद, राजगढ़

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