जिले के जनप्रतिनिधि गायब, अधिकारी खामोश, जनता की परेशानियां सुनने वाला कोई नहीं!

सियासी भूचाल ने बढ़ा दी जनता की मुसीबतें
जनता से जुड़े तमाम मामलों में बात करने वाला तक कोई नहीं, प्रदेश सरकार की अस्थिरता के बाद बढ़ी दिक्कतें

By: Rajesh Kumar Vishwakarma

Published: 19 Mar 2020, 07:57 PM IST

ब्यावरा.मध्य प्रदेश की मौजूदा सरकार की अस्थिरता से नीचले स्तर पर भी लोगों का जनजीवन प्रभावित हुआ है। हर दिन चल रही सियासी उठापटक से जिलेभर में लोगों को न जनप्रतिनिधि मिल पा रहे हैं और न ही जिम्मेदार अधिकारी। अपनी बुनियादी समस्याओं के लिए लोग परेशान हो रहे हैं।
रोजमर्रा के जरूरी कार्यों के साथ ही अन्य तमाम काम पर लगभग ग्रहण लग चुका है। लोग अपनी बुनियादी सुविधाओं के लिए तरस रहे हैं। पानी, सड़क, बिजली से जुड़ी तमाम सुविधाओं को लेकर जनता इधर-उधर हो रही है लेकिन कहीं कोई सुनवाई उनकी नहीं हो रही। ऊपर से कोरोना के कहर के चलते जनसुनवाई भी लगभग थम गई है, जिसके कारण जनता अपनी परेशानी नहीं बता पा रही है।
कोरोना के कहर में भी रोकस वसूल रही राशि
प्रदेश में हालात अस्थिर है और बची हुई रफ्तार कोरोना ने घटा दी। स्वास्थ्य विभाग जहां तमाम सुविधाएं मरीजों को देने का दावा कर रहा वहीं, जिला अस्पातल सहित तमाम सिविल अस्पतालों की रोगी कल्याण समितियां मरीजों सर्दी, खांसी के मरीजों से भी ओपीडी शुल्क (१०) लिया जा रहा है। वहीं भर्ती के लिए ४0 रु. सिविल अस्पताल और 70 जिला अस्पताल में लिए जा रहे हैं। अब यदि जरूरतमंद व्यक्ति यह नहीं दे पाता तो अस्पताल पहुंच नहीं पाते। इसमें तमाम तरह के निर्णय विधायक की मौजूदगी में लिए जाते हैं लेकिन वे लंबे समय से गायब हैं।

प्रशासन शून्य, कोई काम नहीं हो रहे
नगर पालिका और अन्य तमाम सकारी सिस्टम से जुड़े कार्यों के लिए लोग पहले अफसर फिर जनप्रतिनिधियों के पास पहुंचते हैं लेकिन जिले की स्थिति इतनी दयनीय है कि प्रशासनिक तंत्र के नाम पर सबकुछ शून्य हो चुका है। कोई कुछ भी कहने-सुनने वाला नहीं है। किसी प्रकार का कोई काम जनता का नहीं हो पा रहा है। अधिकारी अपने हिसाब से ही पूरे काम करने में जुटे हैं।
कनेक्शन कट रहे, एक तरफा हो रही कार्रवाई
बिजली कंपनी के आम तौर पर आने वाले मनमाने बिलों पर भले ही कोई सुनवाई न होती हो लेकिन इन दिनों वसूली को लेकर सख्ती जारी है। यदि किसी का गलत तरीके से कनेक्शन काट भी दिया गया तो वे किसके पास जाऐं? भाजपा और कांग्रेस दोनों ही दलों के बड़े नेता लगभग गायब हैं। विधायक, सांसद कोई भी जिले में नहीं होने से ऐसे तमाम काम के लिए लोग परेशान हो रहे हैं।
जानें जिले के जनप्रतिनिधियों की स्थिति
सासंद : सांसद रोडमल नागर दिल्ली हैं, अपने संसदीय कार्यों में व्यस्त है।
विधायक : ब्यावरा, राजगढ़, खिलीचपुर, जीरापुर और नरसिंहगढ़ के विधायक करीब डेढ़ सप्ताह से गायब हैं।
नपा अध्यक्ष : करीब दो माह पहले पूरे हो चुके कार्यकाल के बाद तमाम नगरीय परिषदों में प्रशासक के भरोसे व्यवस्थाएं हैं, जो कि सीधे जनता से जुड़ नहीं पा रहे।
जनपद अध्यक्ष : जनपद का कार्यकाल भी पूरा हो चुका है साथ ही ग्राम पंचायतों का भी। गांव की जनता भी अब इधर-उधर भटकने को मजबूर हैं।

...और अधिकारियों के हाल- जागरूक लोगों तक से बात नहीं करते
जिले में कोरोना अलर्ट हो या अन्य कोई भी जनता से जुड़ा मुद्दा, किसी पर भी जिम्मेदार बात करने को तैयार नही हैं। आम जनता तो दूर जागरूक लोगों और मीडिया तक से जिम्मेदार अधिकारी बात नहीं करते। लोग इस कदर परेशान हैं कि उनका फोन तक नहीं उठाया जाता। लंबे समय से ऐसी स्थिति निर्मित हो रही है।
आम जनता बोली- कोई बात करने वाला नहीं
जनता आखिर जाए कहां? हर दिन की परेशानियां सामने आती हैं तो या तो अधिकारी के पास वे जाते हैं या नेताओं के, लेकिन वर्तमान में दोनों ही ओर से उन्हें मदद नहीं मिल पा रही।
-सचिन श्रीवास्तव, एडव्होकेट, ब्यावरा
आम जनता की परेशानियों को लेकर कोई गंभीरता जनप्रतिनिधियों में नहीं रही। वर्तमान हालातों को देखकर लगता है कि लोग सिर्फ परेशान होने के लिए ही हैं। इस अस्थिरता ने जनता को अस्थिर कर दिया।
-डी. आर. यादव, रिटायर्ड शिक्षक, ब्यावरा
बात कर निकालेंगे रास्ता
वैसे हमारी कोशिश है कि लोगों से संवाद स्थापित कर उनकी परेशानियों को समझें। रही बात रोकस की ओपीडी पर्ची और भर्ती की फीस की तो इस संबंध में हम डॉक्टर्स से बात करते हैं। जो आम लोगों के लिए फायदेमंद होगा वह करेंगे।
-संदीप अस्थाना, एसडीएम, ब्यावरा

Rajesh Kumar Vishwakarma
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