मुस्लिम समाज में बहिष्कृत करने वाले समाज के ठेकेदारों को 6-6 माह का कारावास तथा एक-एक हजार रूपए के अर्थदंड

आठ साल पूर्व का मामला

By: Nakul Sinha

Published: 01 Mar 2020, 05:01 AM IST

राजनांदगांव / डोंगरगढ़. न्यायालय से कल शुक्रवार को एतिहासिक फैसला मजिस्टेट मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी अश्विनी चतुर्वेदी के द्वारा दिए गए आदेश में नगर के मुस्लिम समाज के पदाधिकारी को भारतीय दंड संहिता 1860 के तहत ६-६ माह का कारावास तथा एक-एक हजार के अर्थदंड से दंडित किया गया। ज्ञात हो कि आठ वर्ष पूर्व 16 मार्च 2012 को जामा मस्जिद गोलबाजार में नमाज के बाद ऐलान किया गया कि मजहर खान, वसीम कुरैशी, जावेद कुरैशी, गुलाम फस्तफा, अब्दुल गफूर, साबिर अलि, सहनवाज, शमीम अख्तर, मोहसिन खान, एवं इनके परिवार के लोगो को बहिष्कृत कर जात से बाहर किया जाता है तथा इन्हें एवं इनके परिवार को जामा मस्जिद गोलबाजार डोंगरगढ़ एवं चारमीनार मस्जिाद बुधवारीपारा डोंगरगढ़ में नमाज पढऩे नहीं दिया जाएगा। साथ ही इन नौ परिवार में किसी की मृत्यु होने पर मस्जिद से लाश ले जाने वाला डोला स्नान कराने का तख्ता, विशेष नमाजे जनाजा के लिए मौलना नहीं जाएंगे तथा इन नौ परिवारों को कब्रिस्तान में लाश दफनाने नहीं दिया जाएगा तथा शादीब्याह में बतैन आदि नहीं दिया जाएगा और समाज को कोई भी कार्यक्रम होने पर इन परिवारों के सदस्यों को नहीं बुलाया जाएगा। साथ ही इन्हें कोई सलाम करेगा और ना ही इनके सलाम का जवाब दिया जाएगा, ना ही इन लोगो से लेन देन नहीं किया जाएगा और समाज का कोई भी व्यक्ति इनसे किसी प्रकार का सबंध रखने पर उन्हें भी समाज से बहिष्कृत किया जाएगा।

इन्हीं परिवार को 2012 में भी किया गया था बहिष्कृत
जानकारी अनुसार इन्ही परिवार के उपर 4 फरवरी 2012 को शमीम भाई सोडेवाला को जब मस्जिद में नमाज अदा करने के दौरान ईमाम ने शमीम भाई को मस्जिद कमेटी में आप को समाज से बहिष्कृत किया जाता है कहकर उन्हें मस्जिद से बाहर निकाला गया। इसी प्रकार 20 अप्रेल 2012 को इकबाल हुसैन के घर शादी समारोह में तथा 15 जून को चारमीनार मस्जिद द्वारा नमाज के पूर्व एनाउंस किया गया कि जूता चप्पल दुकानवाला बद मजहबीं बद हकीदा और काफिर है इसलिए उसे जात से निकाल दिया गया है आदि प्रताडना से प्रताडि़त हुए सौडावाले ने इसकी शिकायत एसडीएम, थाना प्रभारी, पुलिस अधीक्षक से की। जहां न्याय नहीं मिलने पर उन्होंने अधिवक्ता दौलत महोबिया के माध्यम से कोर्ट में परिवाद दायर किया। जहां आठ वर्ष की लंबी लड़ाई के बाद मजिस्ट्रेट ने परिवादी शमीम भाई और शहनवाज खान ने मस्जिद कमेटी के सदर एजाज खान, लियाकत अलि, अब्दुल वाहिद कुरैशी, मो.फारूख, अब्दुल मतीन के खिलाफ परिवाद प्रस्तुत किया।

शुक्रवार को गवाहों के बयान के बाद सुनाया गया फैसला
कल शुक्रवार को आए फैसले में न्यायालय द्वारा दंाडिक अपराध 244, 14 दर्ज कर न्यायाधीश अरिूवनी चतुर्वेदी द्वारा संपूर्ण गवाहों जावेद कुरैशी, गुलाम मुस्तफा, अब्दूर गफीर, शाहनवाज, शमीम अख्तर रिजवान हुसैन के बयानों के बाद आरोपी एजाज खान, लियाकत अलि, अब्दुल वाहिद कुरैशी, मो.फारूख, अब्दुल मतीन के खिलाफ अपराध प्रमाणित पाए जाने पर धारा 500 भारतीय दंड संहिता 1860 के तहत प्रत्येक को ६-६ माह का कारावास तथा एक-एक हजार के अर्थदंड से दंडित किया गया।

Nakul Sinha
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