जाति व रंगभेद कर नौकरी से निकालने का आरोप

जाति व रंगभेद कर नौकरी से निकालने का आरोप

Nitin Dongre | Publish: Jul, 14 2018 11:05:10 AM (IST) Rajnandgaon, Chhattisgarh, India

अंचल में आदिवासी बेटियों के साथ अन्याय

राजनांदगांव. मानपुर में संचालित एक निजी स्कूल शिशु मंदिर में तीन आदिवासी महिला शिक्षकों के साथ जाति व रंगभेद करने का मामला सामने आया है। जाति व उनके रंग को लेकर प्रबंधन ने उन्हें नौकरी से निकाल दिया है। इससे परेशान युवतियों ने मामले की शिकायत गुरुवार को जिला प्रशासन से की है। यहां भी उन्हें संतोषप्रद जवाब नहीं मिला। अफसरों ने कहा कि यह निजी स्कूल का मामला है, वे किस शिक्षक को रखते हैं यह उनका अपना फैसला है। इस जवाब से मायूष युवतियों ने इसकी शिकायत थाने में करने की ठानी है।

पीडि़त शिक्षक लिकेश्वरी रावटे व चंचल सलामे ने बताया कि उन दोनों के अलावा सरोज जाड़े को स्थानीय शिशु मंदिर प्रबंधन ने बिना किसी पूर्व सूचना, नोटिस दिए नए शिक्षा सत्र में नौकरी से निकाल दिया है। नौकरी से निकाले जाने का स्पष्ट कारण भी नहीं बता रहे हैं। कारण पूछे जाने पर कहा जाता है कि आप सुंदर नहीं हो, आपका प्रिंसिपल के साथ व्यवहार अच्छा नहीं है। इसका विरोध करने पर स्कूल प्रबंधन ने कहा कि आप थाने में जाओ, कोर्ट में जाओ वहां अपनी समस्या बताओ।

उन्होंने बताया कि स्कूल प्रबंधन महिलाओं के आत्मसम्मान को ठेस पहुंचा रहा है। शाला विकास समिति के अध्यक्ष व कोषाध्यक्ष पर मनमानी करने का आरोप लगाए हैं। बताया कि शिशु मंदिर सन १९९१-९२ से संचालित हो रहा है। यहां पहली से दसवीं तक की पढ़ाई कराई जाती है। यहां करीब ४०० बच्चे हैं। इसके लिए १२ शिक्षक हैं। बताया कि वे डीएलएड की पढ़ाई कर रहे हैं। नौकरी से निकाले जाने पर उनकी पढ़ाई भी प्रभावित होगी।

उन्होंने शाला विकास समिति के अध्यक्ष पर जातिगत टिप्पणी करते हुए धमकी दी जाती है, कि जहां जाना जाओ और शिकायत करो। इससे हम मानसिक रूप से भी परेशान हुए हैं। इसकी शिकायत हमने बीईओ व स्थानीय सीईओ से भी की है, लेकिन उन्होंने किसी तरह कोई जांच या कार्रवाई नहीं की है।

पूजा मेश्राम, प्राचार्य शिशु मंदिर मानपुर ने कहा कि उनका आरोप पूरी तरह गलत है। शाला विकास समिति के पदाधिकारियों के साथ उनका रवैय्या ठीक नहीं होने के कारण स्कूल प्रबंधन ने यह फैसला लिया है। इसमें मेरी कोई भूमिका नहीं है। इसकी जानकारी उन्हें शिक्षा सत्र शुरू होने से पहले ही अप्रैल में दे दी गई थी। पिछले दिनों शाला विकास समिति की बैठक में भी उन शिक्षकों ने गलत और असभ्य ढंग से बात की थी।

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