स्टाफ नर्स, आया और वार्ड ब्वॉय के भरोसे संचालित हो रहा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, यहां आया भी कर रही मरीजों से वसूली ...

सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में समस्याओं का अंबार है। यहां डॉक्टर कभी टाइम पर नहीं आते। कभी तो आते ही नहीं और आते भी है तो औपचारिकता निभाकर लौट जाते हैं।

By: Nitin Dongre

Published: 01 Aug 2020, 08:01 AM IST

छुईखदान. ब्लॉक के एकमात्र सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में समस्याओं का अंबार है। यहां डॉक्टर कभी टाइम पर नहीं आते। कभी तो आते ही नहीं और आते भी है तो औपचारिकता निभाकर लौट जाते हैं। इन डाक्टरों को अपने प्राइवट क्लीनिक में जाने की जल्दी रहती है। मामले में जिम्मेदार अधिकारी भी डाक्टरों की मनमानी को जानते हुए भी खामोश बैठे हैं। कार्रवाई व व्यवस्था सुधारने का सिर्फ आश्वासन ही दिया जाता है। जबकि इस अस्पताल में छुईखदान से लेकर बकरकट्टा तक यहां लोग इलाज कराने आते हैं। गंडई, साल्हेवारा, बुंदेली, उदयपुर के मरीज यहां रिफर होकर पहुंचते हैं।

रात में कोई ड्यूटी डाक्टर मौजूद नहीं होता। रात में नर्स एवं चौकीदार के भरोसे ही पूरा अस्पताल छोड़ दिया जाता है। आपातकाल में कोई मरीज अस्पताल पहुंचता है, तो वहां डॉक्टर नहीं रहता। वार्ड बॉय व नर्स के द्वारा ही मरीज का प्राथमिक उपचार कर दिया जाता है, उसके बाद जरूरत पड़ी तो डॉक्टर को बुलाते हैं और उसको आने में तकरीबन आधा घंटा लग जाता है। अस्पताल में सारी सुविधाएं होने के बाद भी मरीजों को किसी भी प्रकार का लाभ नहीं मिल पाता है। डॉक्टर अस्पताल में मरीज देखते तो है, लेकिन दवाई अधिकतर बाहर मेडिकल से ही लिखा जाता है। सभी डॉक्टरों के टेबल में मेडिकल का पर्ची रखा रहता है।

पूरा अस्पताल रात के समय नर्स के भरोसे रहता है

सर्व सुविधा युक्त अस्पताल में आज तक किसी भी महिला का प्रसव कराते वक्त डॉक्टर उपस्थित नहीं रहता, उन्हें स्टाफ नर्स एवं आया के भरोसे छोड़ दिया जाता है। यही वजह है कि नर्स एवं आया के द्वारा मरीजों के परिवार वालों से प्रसव उपरांत खर्च पानी के लिए रुपए की मांग की जाती है। नहीं देने पर अनाप-शनाप गाली-गलौज किया जाता है। उनको डराया धमकाया जाता है। पूरा अस्पताल रात के समय नर्स के भरोसे रहता है। जितने भी प्रसव छुईखदान में होता है, उसमें स्टाफ नर्स द्वारा ही कराया जाता है। डॉक्टर देखते भी नहीं हैं, उनको पता ही नही रहता है, किसका प्रसव हुआ सुबह ड्यूटी पर आने के बाद राउंड किया जाता है, तब उनको पता चलता है कि इतने महिलाएं प्रसव उपरांत अस्पताल मे भर्ती हैं। आज तक 5 महीनों से एक डॉक्टर जो उदयपुर में पदस्थ है, जिसका मौखिक शिकायत कलेक्टर से करने के बावजूद भी अभी तक बीएमओ के द्वारा किसी भी प्रकार का कदम नहीं उठाया गया है।

डॉक्टर की कमी है

बीएमओ लीला रामटेके ने कहा कि डॉक्टर की कमी है। इसलिए उदयपुर का डॉक्टर 4 महीने से यही हैं। मेरे को इधर-उधर जाना पड़ता है, तो वहीं इलाज करता है।

Nitin Dongre Desk
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