कंपनी बदली लेकिन अब तक नहीं पहुंची नई गाडिय़ां, 'बीमारू' गाडिय़ों के भरोसे आपात चिकित्सा सेवा का दावा ...

राजनांदगांव में दौड़ रही जीकेवी की गाडिय़ां बेहद पुरानी हो चुकी

By: Nitin Dongre

Updated: 06 Jan 2020, 07:31 AM IST

राजनांदगांव. प्रदेश में आपात चिकित्सा सुविधा देने वाली कंपनी को राज्य स्तर पर बदल तो दिया है, लेकिन अब तक नई कंपनी की गाडिय़ां नहीं पहुंची है। ऐसे में पुरानी कंपनी की कंडम और 'बीमारूÓ गाडिय़ों के भरोसे ही स्वास्थ्य विभाग द्वारा आपात चिकित्सा सेवा देने का दावा किया जा रहा है, लेकिन इस वजह से ये गाडिय़ां समय पर नहीं पहुंच पा रही है। हालांकि पुलिस विभाग की गाडिय़ों (११२) का भी आपात चिकित्सा के लिए मदद लिया जा रहा है।

जिले में जीवीके कंपनी की १३ गाडिय़ां आपात सेवा के लिए संजीवनी १०८ के रूप में दौड़ रही थी। इनमें से ज्यादातर गाडिय़ां रख-रखाव के अभाव में कंडम हो चुकी है। फिलहाल गिनती की गाडिय़ां ही सड़क पर है, लेकिन नई कंपनी द्वारा अब तक गाडिय़ां नहीं भेजे जाने के कारण इन्हीं खटारा गाडिय़ों से आपात कालीन मरीजों को अस्पताल तक लाया जा रहा है। ज्ञात हो कि २९ नवंबर को राज्य सरकार द्वारा जिला चिकित्सा अधिकारियों को जारी पत्र में जिले में पहले आपात चिकित्सा सेवा के लिए जिम्मेदार जीवीके कंपनी से करार खत्म होने की जानकारी दी थी। रायपुर की स्थानीय कंपनी जय अंबे प्राइवेट लिमिटेड को जिम्मेदारी देने का भी उल्लेख हुआ था। कहा गया था कि जल्द ही कंपनी की नई गाडिय़ां जिले में भेजी जाएगी।

जय अंबे को इसकी जिम्मेदारी

राज्य सरकार ने संजीवनी एंबुलेंस की सेवा दे रही जीवीके कंपनी से करार खत्म करते हुए रायपुर की स्थानीय कंपनी जय अंबे को इसकी जिम्मेदारी दी है। 108 संजीवनी एबुलेंस का नाम वहीं रहेगा, लेकिन इसे हैदराबाद की जीवीके कंपनी नहीं, बल्कि रायपुर की स्थानीय कंपनी चलाएगी। सरकार ने जिस कंपनी को ठेका दिया है, वह 1099 शव वाहन की सुविधाओं पर काम कर चुकी है।

Nitin Dongre Desk
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