दिग्विजय स्टेडियम समिति: बैठकों पर बैठकें होती रहीं, सालों से चल रही थी जांच, आखिरकार लाया गया अमल में और लिया निर्णय ...

दिग्विजय स्टेडियम समिति के खिलाफ उच्च न्यायालय में केस हुआ समाप्त

By: Nitin Dongre

Published: 14 Jun 2020, 09:05 AM IST

राजनांदगांव. जिला प्रशासन द्वारा मनोनीत समिति दिग्विजय स्टेडियम के तत्कालिन सचिव कुतबुद्दीन सोलंकी और समिति के अन्य सदस्यों पर चुनाव न कराने के आरोप लगाकर दिग्विजय स्टेडियम समिति को भंग करने के खिलाफ लगाई गई याचिका को हाइकोर्ट में याचिकाकर्ता की सहमति के बाद समाप्त करने का फैसला आया है। समिति के तत्कालीन सचिव कुतबुद्दीन सोलंकी ने बताया कि समिति का पदेन अध्यक्ष जिलाधीश होते है और एवं समिति के सदस्य निर्णय उनके हस्ताक्षर से स्वीकृत होते हैं।

समिति पर फर्म एवं सोसाइटी द्वारा यह आरोप लगाया गया था कि समिति धारा 27 एवं 28 का नियमानुसार पालन नहीं किया गया जबकि कार्यकारिणी की वर्ष में लगातार बैठक आयोजित की जाती थी। सोलंकी ने आरोप लगाया कि तत्कालीन सरकार ने राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता के चलते तत्कालीन जिलाधीश सिद्धार्थ कोमल सिंह परदेशी पर राजनीतिक दबाव डालकर समिति को भंग करा दिया था जबकि इसके लिये सबसे अधिक दोषी समिति का अध्यक्ष होना चाहिए, परंतु इसे अनदेखा कर भंग कर 13 मार्च 2012 को शासन ने प्रशासक नियुक्त कर दिया। दिग्विजय स्टेडियम समिति के पूर्व सचिव कुतबुद्दीन सोलंकी ने बताया कि मुझे दिग्विजय स्टेडियम समिति की प्रबंध कार्यकारिणी समिति द्वारा 15 नवंबर 1996 को दिग्विजय स्टेडियम समिति का सचिव सर्वसम्मति से चुना गया था।

प्रशासक नियुक्त किया गया था

सोलंकी ने बताया कि मेरे कार्यकाल में समिति द्वारा उत्कृष्ट कार्य किया गया एवं कई राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता का आयोजन भी स्टेडियम समिति द्वारा किया गया। मेरे कार्यकाल में निवृत्त होने के समय स्टेडियम समिति के बैंक एकाउंट में 22 मार्च 2011 को 20 लाख (बीस लाख रूपये) की फीक्स डिपोजिट थी। सोलंकी ने बताया कि मेरे कार्यकाल में पूर्ण ईमानदारी एवं जिम्मेदारी से समिति का कार्य किया गया परंतु दुर्भावनावश भारतीय जनता पार्टी की सरकार द्वारा तत्कालीन कलेक्टर पर दबाव डालकर समिति को भंग कर प्रशासक नियुक्त किया गया।

केस समिति के निर्णय के खिलाफ

इस निर्णय के खिलाफ तत्कालिन सचिव कुतबुद्दीन सोलंकी द्वारा हाईकोर्ट में केस दर्ज किया गया। उन्होंने बताया कि उनके वकील सतीश वर्मा वर्तमान में छत्तीसगढ़ शासन द्वारा सरकारी वकील उच्च न्यायालय में सरकारी वकील है। सोलंकी ने आगे बताया कि यह केस उच्च न्यायालय में डीपी शर्मा की बैंच में चल रहा था यह केस समिति के निर्णय के खिलाफ था। उक्त केस को वापस लेने के लिए लगातार अनुरोध किया जा रहा था। उक्त अनुरोध को ध्यान में रखकर केस को समाप्त करने का अनुरोध किया गया। उक्त आधार पर 26 सितंबर 2019 को उच्च न्यायालय के जज टीपी शर्मा द्वारा केस का निर्णय देते हुये इसे समाप्त कर दिया गया।

Nitin Dongre Desk
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