लॉकडाउन के दौरान दैनिक मजदूरों के सामने खड़ा हुआ अब रोजी-रोटी का संकट

जीवन उपयोगी सामग्री के दाम भी हुए दोगुने

By: Nakul Sinha

Updated: 18 Apr 2020, 04:23 PM IST

राजनांदगांव / डोंगरगढ़. लॉकडाउन बढऩे से ग्रामीण क्षेत्रों में दैनिक रोजमर्रा काम करने वाले गरीब मजदूरों की जिंदगी में जीवन यापन का संकट आन खड़ा हुआ है। सरकार ने इन मजदूरों के लिए दो महीने का चावल नि:शुल्क तो दे दिया है और शासन के नुमाइंदे इसे बड़ी शासकीय राहत के रूप में प्रचारित भी कर रहे हैं व वाहवाही लूट रहे हैं किन्तु राशन का मतलब चावल, तेल, सब्जी, मसाला, नमक शामिल है जबकि महज बीपीएल धारकों को एक रुपए में मिलने वाला चावल जो प्रतिमाह 35 किलो मिलता है 70 किलो चावल में 70 रूपए की छूट भिखारी की भांति मदद करने के बराबर है।

मुख्यमंत्री ग्रामीणों की पीड़ा को समझे तभी ग्रामीण जिंदा रह पाएंगे
सरकार ने यह मदद करके जैसे ग्रामीणों व गरीबों की तरफ से मुंह मोड़ लिया है और इस छोटी सी मदद कर अपनी जिम्मेदारी पूरी कर ली है। यह समझने वाले मुख्यमंत्री ग्रामीणों की पीड़ा को समझे तभी ग्रामीण जिंदा रह पाएंगे। उक्त उद्गार आदिवासी नेता सतीश कंवर ने सरकार पर लगाए हैं। उन्होंने कहा कि लॉकडाउन में शक्ति के बजाय लोग स्वस्फूर्त होकर सावधानी बरते सुरक्षित जीवन के लिए सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करें यही एक उपाय है जो हमें बचा सकता है। संपूर्ण देश ने इस प्रकोप से लडऩे के लिए अपनी पूरी ताकत लगा दी है। किंतु पलायन के रोकथाम रोजगार की हालत एवं ग्रामीण मजदूरों के साथ-साथ अन्य ग्रामीणों के लिए प्रदेश सरकार के पास कोई ठोस नीति नहीं है। उन्होंने कहा कि पूर्ण कर्जा माफी तथा पूर्ण शराबबंदी का दंभ भरने वाली सरकार व उनका प्रशासन जमाखोरी, कालाबाजारी रोकने में पूरी तरह असहाय असमर्थ हो गया है।

ग्रामीणों को पड़ रही है दोहरी मार
कंवर ने बताया कि ग्राम देवकट्टा सहित आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में पंचायत पदाधिकारियों ने लॉकडाउन का सख्ती से पालन कराया है। यहां तक की आवाजाही के मार्गों को विगत कई दिनों से बंद करके रखा गया है जिसमें ग्रामीणों के विचार भी नहीं सुने जा रहे। इसलिए ग्रामीण प्रशासन एवं गांव दो प्रकार के कानून की मार सहने को मजबूर है। गांव में बाहर से सब्जी लेना बेचना बंद है। सब्जी सहित किराना व जीवन उपयोगी वस्तुओं के दाम दोगुने हो चुके हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि गांव में किराना दुकानदार दोगुनी कीमत में जीवन उपयोगी सामग्री बेच रहे हैं, अतिरिक्त कमाई करने व लूटने की होड़ मची हुई है। ग्रामीण अधिक दाम पर सामग्री खरीदकर कर्जा लेकर जीवन यापन करने को मजबूर है। इस पर प्रशासन का कहीं कोई ध्यान नहीं है। उन्होंने जिलाधीश से इस दिशा में तत्काल पहल की मांग की है।

Nakul Sinha Desk
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