शिक्षा विभाग की लापरवाही उजागर, शिक्षक की कमी से बच्चों की पढ़ाई ठप्प

शिक्षा विभाग की लापरवाही उजागर, शिक्षक की कमी से बच्चों की पढ़ाई ठप्प

Nakul Ram Sinha | Publish: Oct, 14 2018 11:52:05 AM (IST) Rajnandgaon, Chhattisgarh, India

दो माह पूर्व की थी शिकायत

राजनांदगांव / ठेलकाडीह. मामला गुरूघासीदास उच्चतर माध्यमिक विद्यालय ठेलकाडीह का है जहां गत दिनों विद्यालय में पदस्थ एक शिक्षक का प्रशासन ने तबादला कर दिया। शिक्षक शशिकांत दुबे के तबादले के बाद से 12वीं और 11वीं कक्षा में कला संकाय के दो विषयों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। इसके बाद स्कूली बच्चों ने 8 अगस्त को शिक्षक को वापस लाने की मांग को लेकर कलक्टर को ज्ञापन भी सौपा है।

दो माह से नहीं हो रही पढ़ाई
दो माह से ज्यादा हो चुके हैं लेकिन शिक्षक की व्यवस्था अब तक नहीं हो पाई है। जबकि शिक्षक के तबादले से पढ़ाई पूरी तरह से चौपट हो गई है। या यू कहे कि इस स्कूल में शिक्षक की व्यवस्था को लेकर न तो जिलाधीश और न ही शिक्षा विभाग द्वारा किसी प्रकार की कोशिश की गई। ऐसे में सवाल यह उठता है कि स्कूली बच्चें आखिर शिक्षक की मांग को लेकर किसके पास जाए। शिक्षा जैसे गंभीर मामले को लेकर प्रशासन इतने सुस्त क्यों हो गए है, यह समझ से परे है। बहरहाल शिक्षक के तबादले से स्कूली बच्चों के साथ-साथ पालकगण भी नाराजगी जाहिर कर रहे है। पालकों ने स्कूल में जल्द से जल्द शिक्षक की व्यवस्था कराने की प्रशासन से मांग की है।

इन विषयों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है
सप्ताह भर से गुरूघासीदास शासकीय उच्चतर माध्यमिक स्कूल में 12वीं और 11वीं की कला संकाय के राजनीति शास्त्र और इतिहास विषय की पढ़ाई शिक्षक के अभाव में पूरी तरह से ढप पड़ा हुआ है। इन विषयों की पढ़ाई नही होने से स्कूली छात्र-छात्राएं मानसिक रूप परेशान हो रहे है। ऐसे में शिक्षा विभाग को चाहिए की जल्द से जल्द शिक्षक की व्यवस्था करें ताकि स्कूली बच्चें हरेक विषयों की पढ़ाई मन से कर सकें।

विभाग शिक्षकों पर कार्रवाई करने में अव्वल
जिला शिक्षा विभाग द्वारा छोटे-छोटे मामले में शिक्षकों का ट्रांसफर, वेतन रोको जैसे कार्रवाई करना आम बात हो गई है। यदि शिक्षक किसी कारणवश या किसी परेशानी से 5 मिनट देरी से स्कूल पहुंचते जाते है और पकड़ में आ जाते है। उसके बाद विभागीय उस शिक्षक पर विभागीय गाज गिर जाती है। लेकिन आज एक सप्ताह हो गए है, ठेलकाडीह स्कूल शिक्षक की कमी से जूझ रहा है। ऐसा नही है कि प्रशासन को परेशानी से अवगत नहीं कराया गया है। इसके बाद भी जिम्मेदार अधिकारी इस समस्या से अंजान बैठे है। आखिर सप्ताह भर से बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। इसके जिम्मेदार कौन है? क्या ऐसे लापरवाह अधिकारियों पर कार्रवाई नहीं होनी चाहिए। सवाल यह भी उठता है कि क्या इस तरह की मनमानी से शिक्षा विभाग में व्यवस्था सुधरेगी।

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