किसान हुए बर्बाद, सब्जियों में मुनाफा तो दूर लागत निकालना हुआ मुश्किल

खड़ी फसल को चराई व खुला छोड़ रहे हैं कृषक

By: Nakul Sinha

Published: 05 May 2020, 11:50 AM IST

राजनांदगांव / डोंगरगांव. लॉकडाउन के चलते पहले सब्जी बाडिय़ों को बचना मुश्किल कर दिया था। किसानों ने जैसे-तैसे मेंटेनेंस कर फसलों को दौ पैसे की आवक की संभावना को देखते हुए संभाला था परंतु मुनाफा तो दूर किसानों को फसलों की लागत व वर्तमान मजदूरी निकालना मुश्किल हो गया है। नतीजा यह है कि ज्यादातर सब्जी बाडिय़ों को किसानों ने अब भगवान भरोसे छोड़ दिया है। कुछ तो फसलों को जानवरों को चराने में लगा रहे हैं वहीं ज्यादातर किसान खड़ी फसल की समूल जोताई कर फसलों को नष्ट कर रहे हैं।

क्या कहता है बाजार
यदि सब्जी बाडिय़ों की बात करें तो लॉकडाउन बाद पहले पखवाड़े में मजदूरों की कमी का सामना कर फसलों को सहजने वाले किसानों को अब तक फसलों का सही दाम नहीं मिल पाया है। कृषक किशोर साहू, नरेश सोनकर, लोकेश, देवी पटेल व अन्य ने बताया कि बीते वर्ष इसी सीजन में लोकल सब्जियों की डिमांड व दाम भी पर्याप्त थी परंतु इस वर्ष लॉकडाउन में डिमांड को ही नगण्य कर दिया है। नतीजा यह कि बीते वर्ष थोक बाजार में 40 रूपए में बिकने वाली भिंड़ी का दाम सोमवार को खुलते बाजार में 3 रूपये किलो खुला। इसी प्रकार लौकी, भटा, बरबट्टी, मिर्च, धनिया जैसी अन्य महंगी फसलों को भी किसान औने-पौने दामों में बेचने पर भी मजबूर हैं।

क्या है हालात
मिर्च के लगातार गिरते दामों को देख मटिया के प्रगतिशील कृषक रामकुमार गुप्ता ने भिंड़ी व मिर्च की तोड़ाई बंद कर जानवरों को चराने के लिए लगा दिया गया है। इसी प्रकार बरगांव के किशोर साहू ने आधे एकड़ में लगी मिर्च की खड़ी फसल को वाजिब दाम ना मिलने के चलते जोताई कर दिया। वहीं बगदई के नरेश सोनकर ककड़ी व मिर्च के फसलों पर खाद पानी देना बंदकर फसल को सूखने के लिए छोड़ दिया है। इस संदर्भ में किसनों ने बताया कि फसलों के रख-रखाव, लागत, तोड़ाई व ढुलाई जैसे अन्य खर्च वर्तमान स्थिति में निकालना असंभव है। ऐसी विकट परिस्थिति व मजबूरी में फसलों को तबाह कर देना ही ज्यादा उचित है। कृषकों ने बताया कि फसलों की इतनी न्यूनतम दाम कभी नहीं थी। सब्जियों के दामों में थोड़ी बढ़ोत्तरी की संभावना थी किन्तु बाहरी आवक के कारण लोकल किसान तबाह हो गए है।

Nakul Sinha
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