शासकीय कर्मचारियों को बिना आफिस आए मिल रा पूरा वेतन, मनरेगा मजदूरों को भी घर बैठे रोजी दे सरकार

गरीब मजदूरों के पक्ष में समाजसेवियों ने रखी मांग

By: Nakul Sinha

Published: 18 Apr 2020, 04:39 PM IST

राजनांदगांव / जोंधरा. क्षेत्रीय समाजसेवियों ने संयुक्त बयान जारी कर शासन से मांग की है कि मनरेगा मजदूरों को भी बिना काम पर गए मजदूरी प्रदान की जावे। उन्होंने अपने बयान में कहा कि कोरोना कोविड १९ के चलते संपूर्ण भारत में धारा १४४ लागू है, लोगों को घरों से न निकलने की अपील की जा रही है, एक साथ समूह में एकत्र नहीं होना है, बिना जरूरी काम के घर से निकलना अपराध है, संपूर्ण देश थम सा गया है। स्कूल, कॉलेज, निजी कंपनियों में ताला लगाया गया है। अधिकांश शासकीय कर्मचारियों को घर बैठे ही वेतन दिया जा रहा है तो क्या मनरेगा के मजदूरों की जान इतनी सस्ती है कि मनरेगा के तहत मजदूरी कराया जा रहा है। क्या इन लोगों के जान की कोई कीमत नही है, जब पूरे देश में कोरोना के लिए मुख्यमंत्री सहायता कोष की राशि मात्र कोरोना पीडि़तो और चिकित्सा व्यवस्था के लिए ही है।

गरीब मजदूरों को सरकार क्यों नहीं दे रही बिना काम के मजदूरी
शासकीय कर्मचारियों को घर बैठे वेतन देने सरकार की मजबूरी है तो शासकीय मनरेगा में महामारी को देखते हुए उनको भी घर बैठे मजदूरी क्यों नही मिल सकती, क्योकि ये गरीब मजदूर है? क्या इनकी कोरोना से मौत नही हो सकती? समाजसेवियों ने कहा है कि सोशल डिसटेंस मनरेगा में कतई पालन नहीं हो सकता यह संभव ही नही है। क्योंकि गांव में लोग एक साथ बैठ कर खाने वाले है। उन्होनें मांग की है कि मनरेगा मजदूरों को मजदूरी उनके खाते में अविलंब डाली जाए और जहां मनरेगा का कार्य जारी है उसे अविलंब बंद किया जाए। समाजसेवी मिथलेश ठाकुर, लक्ष्मीचंद जैन, दीनूराम ठाकुर, रामसाय उके, गौतम सुरेन्द्र, पंचराम, भागीरथी राणा आदि ने यह मांग शासन से की है।

Nakul Sinha Desk
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