बच्चों की लंबी उम्र के लिए माताओं ने रखा हलषष्ठी व्रत

बच्चों की लंबी उम्र के लिए माताओं ने रखा हलषष्ठी व्रत

Nakul Sinha | Publish: Sep, 04 2018 11:09:42 AM (IST) Rajnandgaon, Chhattisgarh, India

मनाया पर्व

राजनांदगांव / सोमनी. ग्राम में हलषष्ठी का पर्व मनाया गया जिसमें माताओं ने अपने संतान की सुख समृद्धि व लंबी उम्र के लिए हलषष्ठी व्रत रखी। वैसे तो हिन्दू धर्म में कई व्रत और त्यौहार हैं, पर इस अंचल में दो व्रत ऐसे हैं जिन पर महिलाओं की सबसे ज्यादा आस्था है। एक तीजा और दूसरा कमरछठ, हलषष्ठी के व्रत की पूजन विधि और इसके नियम शुरू से सबके कौतुहल का विषय रहे हैं। सभी महिलाएं एक जगह एकत्रित होती हैं, वहां पर आंगन में एक गडढा खोदा जाता है जिसे सगरी कहा जाता है। महिलाएं अपने-अपने घरों से मिटटी के खिलौने, बैल, शिवलिंग, गौरी-गणेश इत्यादि बनाकर लाती हैं जिन्हें उस सगरी के किनारे पूजा के लिए रखा जाता है। उस सगरी में बेल पत्र, भैंस का दूध, दही, घी, फूल, कांसी के फूल, सिंगार का सामान, लाई और महुए का फूल चढ़ाया जाता है। महिलाएं एक साथ बैठकर हलषष्ठी माई के व्रत की कथाएं सुनती हैं। उसके बाद शिवजी की आरती व हलषष्ठी देवी की आरती के साथ पूजन समाप्त होता है।

नगर में जगह-जगह हुआ आयोजन
गंडई पंडरिया. अपनी संतान के दीर्घायु और सुख समृद्धि के लिए अंचल की माताएं शनिवार को हलषष्ठी का व्रत रखा। इस दौरान मुहल्लो के ब्राम्हणों के घर सगरी बनाकर एक झुंड में नगर की माताएं पूरे विधि विधान के साथ पूजा-अर्चना की। दोपहर बाद इस पर्व में बिना हल से जुताई से उत्पन्न अन्न, खम्हार का दातुन के साथ इसके पत्ते का दोना बना के सात प्रकार के अन्न का भोग लगाया गया साथ ही छ: प्रकार की भाजी पसहर चावल भैस का दूध, दही का भोग लगाया एवं माताएं पुजा अर्चना कर अपने बच्चों के पीठ पर कपड़े का बनाया पोती लगाकर बच्चों के दीर्घायु होने की कामना की। भोजन के रूप में बने पसहर चावल का सेवन कर उपवास को तोड़ा।

रामायण पाठ भी
जालबांधा. नगर में हलषष्ठी पर्व पर रामायण पाठ का आयोजन किया गया जिसमें बतौर मुख्य अतिथि विधायक गिरवर जंघेल उपस्थित होकर रामायण कथा का आनंद लिया। इस अवसर पर कांग्रेस अध्यक्ष भीखमचंद छाजेड़ सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे।

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