8 करोड़ फूंके, फिर भी गंदा हो रहा ऐतिहासिक तालाब, 17 करोड़ के प्रोजेक्ट की मॉनिटरिंग नहीं ...

अफसर आफिस में बैठकर ही कह रहे गंदा पानी को कर दिया गया है डायवर्ट

By: Nitin Dongre

Published: 07 Mar 2020, 08:45 AM IST

राजनांदगांव. बूढ़ासागर-रानीसागर सौंदर्यीकरण के नाम पर नगर-निगम ने अब तक करीब 8 करोड़ रुपए फूंक दिए, लेकिन बूढ़ासागर तालाब में निस्तारी का गंदा पानी समाहित होने से रोकने के लिए कोई काम नहीं हो सका है। यही कारण है कि अब भी शहर की जनता को निस्तारी के लिए यहां साफ पानी नसीब नहीं हो रहा है। बूढ़ासागर में अब भी आधे शहर की निस्तारी का पानी समाहित हो रहा है। इसे रोकने या तालाब के पानी की सफाई के लिए निगम द्वारा सिर्फ योजना बनाई गई, काम कागजों में हो रहा है। आठ करोड़ रुपए फूंकने के बाद भी ऐतिहासिक तालाब को गंदा होने से नहीं बचाया जा सका है।

तालाब में तीन तरफ से अब भी गंदा पानी समाहित हो रहा है। नया बस स्टैंड की ओर से बड़ा नाले से गंदा पानी आ रहा है। इसके अलावा जमातपारा में स्थित नाले से निस्तारी का पानी भी तालाब में मिल रहा है। इसके साथ ही किनारे लगने वाले ठेले-खोमचे और शीतला मंदिर से निकलने वाले फूल-मालाओं का अवशेष तालाब में ही फेंका जा रहा है। उधर तालाब के पश्चिम में भी यही हाल है। इन सबको रोकने के लिए कहीं कोई काम नहीं हुआ।

बूढ़ासागर तालाब का रकबा घटाकर पाथवे बना दिया

'पत्रिका' के पड़ताल में खुलासा हुआ है कि सफाई और सौंदर्यीकरण के नाम पर सिर्फ खेल हो रहा है। तालाब से सिल्ट निकालने के नाम पर पहले खेल चला। इसके बाद बूढ़ासागर तालाब का रकबा घटाकर पाथवे बना दिया गया। यहां पौधे लगाए उसमें से आधे मर चुके हैं। बूढ़ासागर में दिग्विजय कॉलेज से लेकर जीई रोड तक दीवार बनाया गया है, उसमें थ्री-डी पेंटिंग कराने की बात कही गई थी। सामान्य पेंटिंग ही कराई गई। पेंटिंग किसकी है, नाम लिखना उचित नहीं समझा गया। रानीसागर के पचरी व दीवार की सिर्फ पुताई करा दी गई। बूढ़ासागर में गंदगी समाहित न हो इसके लिए कोई काम नहीं किया गया। इस तरह रानीसागर-बूढ़ासागर के सौंदर्यीकरण के नाम पर कागजी घोड़ा दौड़ाया जा रहा है।

सिल्ट की निकासी पूरी नहीं हो पाई

ज्ञात हो कि एक साल पहले बूढ़ासागर के पानी से भयानक बदबू उठ रही थी। पानी गंदा होने के कारण मछलियां मर रही थीं। इस बदबू से आधा शहर परेशान हो गया था। इसके बाद बूढ़ासागर व रानीसागर सौंदर्यीकरण के लिए योजना बनाई गई। बूढ़ासागर के गंदे पानी की निकासी के लिए दिग्विजय कॉलेज के सामने से नाली बनाई गई। इसके बाद यहां से सिल्ट निकालने का काम किया गया। इसमें देरी की वजह से बारिश शुरू हो गई और तालाब से सिल्ट की निकासी पूरी नहीं हो पाई। एक साल बाद अब स्थिति फिर ज्यों की त्यों बन गई है।

साढ़े 17 करोड़ का प्रोजेक्ट

ज्ञात हो कि यह पूरा प्रोजेक्ट करीब साढ़े १७ करोड़ रुपए का है, जिसके तहत रानीसागर-बूढ़ासागर सहित आसपास के उद्यानों में सौंदर्यीकरण का कार्य करना है। इसके तहत पुष्प वाटिका, ओपन थियेटर, योगा हाल, दिग्विजय कॉलेज में वाटर फाल, रिटेनिंग वाल, वाटर फाउंटेन, एडवेंचर जोन, त्रिवेणी परिसर गार्डन में लैंडस्केपिंग, रानीसागर व बूढ़ासागर में स्टोन पीचिंग, प्रवेश द्वार सहित आसपास के उद्यानों में कार्य किया जाना है।

सौंदर्यीकरण का काम जारी है

नगर-निगम ईई दीपक जोशी ने कहा कि तालाब में अब गंदा पानी नहीं जा रहा है। गंदा पानी को डायवर्ट कर दिया गया है। सौंदर्यीकरण का काम जारी है। सभी कार्य बेहतर ढंग से हो रहे हैं। इसमें कुछ और सुधार हो, तो वो भी किया जाएगा।

Nitin Dongre Desk
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