तीसरे अशरे में रोजदार जहन्नम से निजात के लिए करेंगे इबादत

कुरान की तिलावत के संग कोरोना से मुक्ति की मांगी दुआ

By: Nakul Sinha

Published: 16 May 2020, 07:01 AM IST

राजनांदगांव / डोगरगढ़. रमजान उल मुबारक का दूसरा मगफिरत का अशरा अब रूखसत होने को चला।आखरी पडाव में पहुंच चुके रमजान के दूसरे अशरे में रोजेदारो ने गुनाहो की माफी के लिए इबादतें तेज कर दी है शुक्रवार को आखरी अशरा शुरू होने के बाद जहन्नम से निजात के लिए दुआऐं मागी जाएगी रमजान के दौरान इबादत के बदले तौर तरीके के बीच लाकडाउन का सन्नाटा जहां करोना संक्रमण से लडऩे की सामूहिक भागीदारी की दास्तां बयां कर रहा है वही रमजान ए पाक महीने में घरों में रहकर अल्लाह की इबादत मुस्लिम समाज ने लोग करोना से मुक्ति की दुआ कर रहे हैं रमजान के 20 वें दीन सुबह शहेरी से शुरू हुआ इबाद का दौर शाम को इफतारी तक चलता रहा नगर में स्थित सभी मस्जिदों के मौलनीयो ने रमजान के इस पाक महीने में घर में रहकर अल्लाह की इबादत करने और शारीरिक दूरी बनाए रखने के संदेश को जेहन में बैठाकर परिवार के साथ कुरान ए पाक की तिलावत पढ़ें पांच पारे की नमाज अदा करके समाज के लोगों ने अपना धार्मिक मर्यादा के साथ ही सामाजिक मर्यादा का भी निर्वहन किया।

अल्लाह का सबसे बडा इनाम है
व्यवसायी अयुबखान ने कहा कि रमजान अल्लाह पाक के इनामो और एहसानो में सबसे बडा इनाम रमजान उल मुबारक है यह महीना बरकत और रहमत वाला है अल्लाह ने रमजान का महीना देकर बंदो पर एहसान किया है इस माह की फजीलत है कि इसमें अल्लाह पाक अपने बंदो के सवाब सत्तर गुना बढा देता है इस महीने में जन्नत के दरवाजे खोल दिए जाते है और जहन्नुम के दरवाजे बंद कर दिये जाते है।

इसी माह में अल्लाह ताला की रहमतें होती है
मौलाना मोहम्मद शकील चिश्ती का कहना है कि रमजान उल मुबारक बड़ी बरकतों वाला महीना है। इस माहे मुबारक में अल्लाह ताला की रहमतें आम होती हैं ।इसकी अहमियत का अंदाजा इस से लगाया जा सकता है कि कुरान ए मुकद्दस का नुजूल भी इसी पाक महीने में हुआ और हदीस शरीफ में आया है कि रमजान शरीफ के लिए जन्नत साल भर सजाई जाती है और उम्मते मोहम्मदिया के लिए जन्नत के दरवाजे खोल दिये जाते हैं । जहन्नम के दरवाजे बन्द कर दिए जाते हैं और अल्लाह तआला इस महीने में बेशुमार लोगों की मगफिरत फरमाता है।

रमजान में सब्र का करें पालन
डॉ.शोबी खान ने करोना संक्रमण के दौरान माहे रमजान मुबारक ने दस्तक दी है रहमतों और बरकतों के 1 महीने का रमजान अन्य 11 महीने जिंदगी जीने के आदाब सिखाता है रोजा आचार, व्यवहार, मानवता, हमदर्द व गमख्वारी का सबक देता है सब्र का रमजान से गहरा ताल्लुक है बदली परिस्थितियों में सब्र के इस पाक महीने में हमे और भी धैर्य व संयम का सबूत देना है इसलिए बदले हालात में हमारा फर्ज बनता है कि हम लॉकडाउन का पालन करते हुए अपने घरों में ही रहे।

Nakul Sinha
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