दीवार लेखन मामले में प्रशासन हरकत में आया, गांवों में जाकर ग्रामीणों से कर रहे पूछताछ

दीवार लेखन करने वालों की ली जा रही जानकारी

By: Nitin Dongre

Published: 24 Jul 2018, 10:43 AM IST

राजनांदगांव. चिटफंड में डूबे रुपए को वापस दिलाने की मांग को लेकर गांवों में 'बिना भुगतान, नहीं होगा मतदानÓ स्लोगन का दीवार लेखन होने के बाद शासन-प्रशासन हरकत में आ गया है। मंगलवार को प्रशासनिक टीम ने सोमनी क्षेत्र के गांवों में पहुंचकर ग्रामीणों से पूछताछ की है, कि इस तरह का दीवार लेखन कौन कर रहा है। एसडीएम अतुल विश्वकर्मा का कहना है कि चुनाव बहिष्कार के लिए ग्रामीणों को प्रेरित करना एक तरह से अपराधिक श्रेणी में आता है। ऐसे दीवार लेखन करने वालों पर कार्रवाई हो सकती है। फिलहाल पता लगाया जा रहा है।

चिटफंड में डूबे रुपए को वापस दिलाने की मांग को लेकर छत्तीसगढ़ नागरिक अधिकार समिति के नेतृत्व में अभिकर्ता व निवेशक लगातार लड़ाई लड़ रहे हैं। प्रदेश स्तरीय आंदोलन के बाद जिला मुख्यालयों में पहुंचकर भी कलक्टर को ज्ञापन सौंपा गया है। पिछले दिनों ही समिति के नेतृत्व में राजनांदगांव जिला मुख्यालय में एक दिवसीय धरना प्रदर्शन कर जिला प्रशासन को फिर आवेदन दिया गया था। इस दौरान कलक्टर को सौंपे गए आवेदन में समिति ने जल्द सकारात्मक पहल नहीं होने पर अगले चरण में गांवों में दीवार लेखन करने की बात कही थी। इसमें 'बिना भुगतान, नहीं होगा मतदानÓ का स्लोगन दीवारों मेें लिखने की जानकारी दी गई थी। इसके बाद ही समिति दीवार लेखन करा रही है।

सुलगते सवाल?

यदि कंपनी फर्जी थी, तो पूरे प्रदेशभर में सालों तक संचालित कैसे हुई?
जिला प्रशासन द्वारा निवेशकों व अभिकर्ताओं से पॉलसी के संबंध में दस्तावेजों को क्यों जमा कराया जा रहा है?
कोर्ट ने आदेशित किया है कि कंपनी की पूंजी को कुर्क कर निवेशकों का रुपए लौटाया जाए?

सोमनी क्षेत्र के एक को थाने बुलाने की जानकारी

सूत्रों से मिली जानकारी अनुसार सोमनी क्षेत्र के एक अभिकर्ता को थाने बुलाया गया था। खबर लिखे जाने तक उक्त व्यक्ति को बिना कारण बताए थाने में बिठाए रखा गया है। वहीं उनके मोबाइल व अन्य सामानों को भी जब्त रखा गया है।

सरकार की नाकामी

रूपेश दुबे, अधिवक्ता ने कहा कि शासन-प्रशासन को इस तरह की फर्जी कंपनियों पर शुरू से ही अंकुश लगाना था, लेकिन इसमें वे विफल रहे। लोग यदि मतदान नहीं करने का निर्णय लेे रहे हैं, तो ये सरकारी की नाकामी को ही उजाकर करता है। पीडि़त पक्ष अपनी परेशानी शासन-प्रशासन को ही बताता है। मतदान का बहिष्कार वैसे किसी को नहीं करना चाहिए, लेकिन मतदान नहीं करना किसी भी व्यक्ति के स्वतंत्रता के अधिकार में आता है।

स्लोगन का स्पष्ट उल्लेख किया गया

शुभम साहू, महासचिव छत्तीसगढ़ नागरिक समिति ने कहा कि समिति या कार्यकर्ता चुनाव बहिष्कार जैसी कोई बात नहीं लिख रहे हैं। पिछले दिनों १३ जून को राजनांदगांव कलक्टर को आवेदन देकर इस तरह के दीवार लेखन की जानकारी दी जा चुकी है। जिसमें स्लोगन का स्पष्ट उल्लेख किया गया है।

यह अपराधिक श्रेणी का काम

अतुल विश्वकर्मा, एसडीएम राजनांदगांव ने कहा कि चुनाव बहिष्कार के लिए लोगों को प्रेरित करना अपराधिक श्रेणी में आता है। पता लगाया जा रहा है कि यह किसके द्वारा किया जा रहा है। जांच कर उच्चाधिकारियों को जानकारी दी जाएगी, उनके निर्देशानुसार आगे की कार्रवाई होगी।

Nitin Dongre Desk
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