आंैधी के अंदरूनी गांवों में नहीं पहुंचा विकास, अंधेरे में जिंदगानी

आंैधी के अंदरूनी गांवों में नहीं पहुंचा विकास, अंधेरे में जिंदगानी

Nakul Ram Sinha | Publish: Sep, 10 2018 12:37:54 PM (IST) Rajnandgaon, Chhattisgarh, India

सरकार के दावे का पोल खोलती औंधी क्षेत्र के गांव की जमीनी हकीकत, मूलभूत सुविधा से अछूता, संचार क्रांति से भी अनजान

राजनांदगांव / अंबागढ़ चौकी. राजनांदगांव जिले के अंतिम छोर औंधी क्षेत्र में एक ऐसा गांव है, जहां आज भी ग्रामीण मूलभूत सुविधाओं से वंचित हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि यहां के लोग मोबाइल तक से अंजान हैं। वनांचल के इस गांव में सड़क बिजली, पानी, स्वास्थ्य व शिक्षा की कोई सुविधा नहीं है। यहां के बाशिंदे आज भी जीवनयापन के लिए पूरी तरह खेती-किसानी व जंगल पर निर्भर हैं। बड़ी बात यह है कि इस गांव के बारे में प्रशासन को भी जानकारी नहीं है। इधर प्रदेश के मुखिया विकास यात्रा निकाल करोड़ों फूंक रहे हैं। बुधवार से विकासयात्रा के दूसरे चरण की शुरुआत पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने की है। हम बात कर रहे हैं, मानपुर से ४० व औंधी से १८ किमी दूर बसे ग्राम पंचायत पेंदोड़ी के आश्रित गांव मेटातोड़के की। यहां छह परिवार निवास करते हैं, यहां की कुल आबादी 70 है। यहां ०-१५ वर्ष के ८ बच्चे हैं। इन परिवारों का स्मार्टकार्ड भी नहीं बना है।

धर्मिक देवी-देवताओं की पहचान नहीं
यहां के लोगों को हिंदू रीति रिवाज और त्योहारों की जानकारी नहीं है। लोग हिंदू देवी-देवताओं के तस्वीर को नहीं पहचानते। उल्टा संवाददाता से ही पूछने लगे ये कौन लोग हैं। यहां के लोग गणेश पूजा, नवरात्रि जैसे पर्वो को नहीं मनाते। यहां के लोग अपने पूर्वजों व जंगलों के पेड़ पौधों की पूजा करते हैं। वहीं यहां के लोग मुख्यमंत्री, सासंद, विधायक और अन्य जन प्रतिनिधियों को भी नहीं जानते। इन्हें अपने सरपंच का नाम तक नहीं मालूम।

कंधे पर लाते हैं राशन
यहां निवासरत बच्चों ने कभी स्कूल नहीं देखा। ग्रामीणों को राशन व अन्य सामान के लिए करीब ३-४ किमी दूर पैदल चलकर कांकेर जिले के ग्राम गुंडाहुर से लाना पड़ता है। ग्रामीण एक सप्ताह का राशन कंधे पर लादकर जंगल के दुर्गम रास्तों से होते हुए अपना गांव पहुंचते हैं। इनका जीवन सिर्फ जंगल तक ही सिमट कर रह गया है।

आज भी मासिक धर्म को अपवित्र मानते हंै
इस गांव में आज भी महिलाओं को मासिक धर्म आने पर अपवित्र मानते हैं। इन्हें घर के काम काज से दूर घर से अलग कमरे में रखा जाता है। उसके खाने की व्यवस्था भी वहीं होती है।

मूलभूत सुविधाओं से आज भी वंचित है औंधी क्षेत्र का गांव
जहां देश डिजीटल इंडिया बनाने का सपना देख रहा हो, वहां आजादी के सात दशक बाद भी ऐसे गांव हैं, जहां मूलभूत सुविधा नहीं हो, ये खबर आश्चर्य करने वाली है। यहां के ग्रामीणों को शासन की किसी योजना का भी लाभ नहीं मिलता।

एसडीएम मोहला, पीएल यादव का कहना है कि क्षेत्र के गांव में ऐसी समस्या है। इसकी जानकारी हम तक नहीं आई है। आज के समय में लोग ऐसे जीवन जी रहे हंै, यह बड़ी बात है। गांव जाकर सभी सुविधाओं के लिए पहल की जाएगी।

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