खाद-बीज के स्टॉक में लाखों के खेल की अधिकारी कर रहे जांच

खाद-बीज के स्टॉक में लाखों के खेल की अधिकारी कर रहे जांच

Nakul Ram Sinha | Publish: Jul, 20 2019 11:51:44 AM (IST) Rajnandgaon, Rajnandgaon, Chhattisgarh, India

कृषक सेवा सहकारी समिति घुमका में शिकायतों का अंबार

राजनांदगांव / घुमका. कृषक सेवा सहकारी समिति घुमका में लगातार कई शिकायतों का अंबार लगा हुआ है जिसके चलते काफी दिनों से उक्त सोसायटी विवादों में घिरी हुई है। वर्ष 2016-17 में धान खरीदी लिंकिंग मद का लगभग 25 लाख रुपए की राशि सोसायटी के माध्यम से किसानों के खाते में जमा होते हुए बैंक के खाते में जमा हो जाना था परंतु उक्त राशि के एवज में फर्जी बिल लगाकर इतनी बड़ी राशि का गोलमाल करने की शिकायत की जांच विगत 2 वर्षों से चल रही है और इस राशि के हेरा फेरी के चलते अब तक खाते में समायोजन नहीं किया जा सका है।

पहले हुई जांच हो चुका था खुलासा, पर कार्रवाई नहीं
साल भर पहले मामले का भंडाफोड़ होने के बाद जिला सहकारी केंद्रीय बैंक के प्रधान कार्यालय ने मामले की जांच के लिए आंतरिक परीक्षक विजय लाल धुर्वे को जांच का जिम्मा दिया था और उक्त जांच अधिकारी ने मामले की बारीकी से पड़ताल कर राशि की गड़बड़ी होना पाया। वे अपने प्रतिवेदन में तत्कालीन शाखा प्रबंधक एवं प्रबंध संचालक को दोषी ठहराते हुए राशि की वसूली एवं कार्यवाही के लिए लिखा था परंतु 2 वर्ष गुजर जाने के बाद भी ना तो राशि की वसूल हो पाई है और ना ही उक्त दोषी अधिकारियों के खिलाफ कार्यवाही हो पाई है। अलबत्ता मामले में विवाद बढ़ता देख तत्कालीन शाखा प्रबंधक नारायण जंघेल को निलंबित किया गया है और प्रबंध संचालक को बख्श दिया गया।

जांच अधिकारी बदलना भी समझ से परे
अचानक राज्य शासन की ओर से जिला सहकारी केंद्रीय बैंक के संचालक मंडल को जिले भर में गबन और गड़बड़ी के कई आर्थिक मामलों में ढिलाई बरतने के चलते बर्खास्त करने का नोटिस जारी किया गया है। समझा जा रहा है कि इस मामले में दबाव बढ़ता देख आननफानन में जिला सहकारी केंद्रीय बैंक प्रधान कार्यालय ने मामले की फाइलों में पड़ी धूल हटाते हुए छुरिया के शाखा प्रबंधक भारद्वाज को पुन: इस मामले की जांच करने का आदेश दिया है और विगत सप्ताह भर से मामले की पड़ताल भी जारी है। आखिर पूर्व में आंतरिक परीक्षक द्वारा जांच कर जिम्मेदारी तय कर देने के बाद भी मामले की पुन: जांच क्यों कराई जा रही है। इस बात को लेकर तरह-तरह के कयास लगाए जा रहे हैं। वहीं शासन की ऋण माफी की घोषणा के बाद ऋण माफी के आड़ में संचालक मंडल एवं एक लेखापाल के द्वारा कथित तौर पर पूर्व में खाद की निरंक जानकारी भेजे जाने के बाद भी पिछली तारीखों में लाखों रुपए के खाद की फर्जी परमिट जारी कर ऋण माफी का लाभ लेकर सोसायटी एवं सरकार को बड़ी राशि का चूना लगाया गया है और इससे भी बढ़कर शिकायत बताई जा रही है कि घुमका सोसाइटी के खाद स्टॉक में काफी अंतर भी बताया जा रहा है क्योंकि खाद वितरण के दस्तावेजों परमिट से अलग परचेज ऑन सेल मशीन में तारीख की भिन्नता भी मामले को संदेहास्पद बनाता है। इस मामले की जांच भी शाखा प्रबंधक भारद्वाज ही कर रहे हैं तथा उनके साथ जांच के लिए 2 सदस्य टीम भी लगी हुई है। अगर सभी मामलों की बारीकी से जांच की जाए तो निश्चित रूप से तमाम तरह की गड़बडिय़ों और आर्थिक अनियमितताओं का खुलासा तय है।

पखवाड़े भर में होगी जांच पूरी
सीईओ केंद्रीय सहकारी बैंक राजनांदगांव, सुनील वर्मा ने कहा कि चूंकि 25 लाख का मामला दो साल पुराना है और खाद स्टॉक का मामला भी काफी गंभीर है। दोनों मामलों की जांच छुरिया के प्रबंधक के साथ तीन लोगों की टीम कर रही है। पखवाड़े भर में जांच पूरी हो जाएगी।

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