कोरोना मरीजों की सेवा में लगे जेआर को दो महीने से वेतन नहीं, कम वेतन में ही हॉस्टल फीस और बिजली बिल का फरमान ...

कोविड-19 अस्पताल में कार्यरत जूनियर डाक्टरों को मूलभूत सुविधा तक नसीब नहीं हो रहा, परेशानी

By: Nitin Dongre

Published: 28 May 2020, 06:27 AM IST

राजनांदगांव. पेंड्री स्थित संभाग स्तरीय कोविड-19 अस्पताल में कोरोना मरीजों की सेवा में लगे जूनियर डाक्टरों को दो महीने से वेतन नसीब नहीं हो है। इस वजह से उन्हें आर्थिक समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। जबकि वहां कार्यरत जूनियर डाक्टरों की माने तो रायगढ़ व जगदलपुर के मेडिकल कॉलेज अस्पताल में कार्यरत जेआर के मुकाबले उन्हें वेतन भी बेहद कम दिया जा रहा है। इसमें भी हास्टल फीस और बिजली बिल के लिए दो हजार रुपए उनके वेतन से ही लेने का फरमान अस्पताल प्रबंधन ने जारी किया है। चूंकि वर्तमान में एस्मा लागू है, तो ये डाक्टर अपनी मांगों को लेकर आंदोलन या काम नहीं कर पाने की समस्या भी नहीं बता पा रहे हैं। इसके बाद भी उन्होंने अपनी समस्या से डीएमई और मेडिकल कॉलेज की डीन डॉ. रेणुका गहिने को अवगत कराया है, फिर भी सुनवाई नहीं हो रही है।

ज्ञात हो कि वर्तमान समय में कोरोना संक्रमितों की जांच व इलाज सबसे बड़ी चुनौतीपूर्ण कार्य है। राजनांदगांव मेडिकल कॉलेज के लिए पेंड्री में तैयार किए नए भवन को संभाग स्तरीय कोविड-19 अस्पताल के रूप में तैयार किया गया है। वर्तमान में जिलेभर से मिले 34 पॉजिटिव मरीजों को यहीं रखा गया है। इसके अलावा संदिग्धों को भी यही कोरेंटाइन में रखकर उनका इलाज किया जा रहा है। कोविड-19 अस्पताल में मेडिकल कॉलेज से हाल ही में अपनी पढ़ाई पूरी कर निकले जूनियर डॉक्टरों की इंटरशिप में अपनी सेवा दे रहे हंै। यहां तकरीबन 77 जूनियर डॉक्टर कार्यरत हैं। इन डाक्टरों को दो माह से वेतन नहीं मिलने से इनकी परेशानी बढ़ते जा रही है। सामान्य खर्च के लिए भी घर से पैसे मंगाने पड़ रहे हैं, चूंकि अभी लॉकडाउन है, तो उनके परिवार में आर्थिक समस्या बनी हुई है।

कूलर और पानी की व्यवस्था नहीं

कोरोना काल में अपनी जान का परवाह किए बगैर सेवा दे रहे रेडेंसियल डाक्टरों को मूलभूत सुविधा तक नसीब नहीं हो रही है। क्वारेंटाइन सेंटर में कूलर तक नहीं है, तो वहीं अस्पताल में पानी की कमी होने के कारण इन डाक्टरों को अपने चार मंजिला हास्टल में पानी लेकर चढऩा पड़ रहा है। पेयजल और कूलर के लिए रोजाना पानी भरना पड़ रहा है। लगातार ड्यूटी देने के बाद भी उनसे एक हजार रुपए बिजली का बिल लिया जा रहा है। इससे संकट की घड़ी में सेवा दे रहे डाक्टरों में मायूषी का माहौल है।

नहीं आया कोई जवाब

डॉक्टर आशीष मिश्रा, डॉ. दिनेश, डॉ. अमित पटेल व डॉ. आशीष मंडल ने बताया कि प्रदेश के अन्य मेडिकल कॉलेज अस्पताल में सेवा दे रहे जेआर को उनसे अधिक वेतन दिया जा रहा है। वहां वेतन से हास्टल फीस और बिजली बिल के लिए राशिन भी नहीं काट रहे। मामले को लेकर डीन व डीएमई को पत्र लिखा गया है, वहां से कोई जवाब नहीं आया है।

शिकायत नहीं आई है

मेडिकल कॉलेज डीन डॉ. रेणुका गहिने ने कहा कि मेरे पास ऐसे किसी डॉक्टर की शिकायत नहीं आई है ये कोई बहुत बड़ी समस्या भी नहीं है।

Nitin Dongre Desk
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