एक तरफ नौतपा तो दूसरी ओर कोरोना वायरस बरपा रहा कहर, ग्रामीणों सहित छोटे व्यवसायियों की आर्थिक स्थिति हुई बदतर

कोरोना के चलते साप्ताहिक बाजार भी हुए बंद

By: Nakul Sinha

Published: 28 May 2020, 05:12 AM IST

राजनांदगांव / जोंधरा. सन् २०२० इतिहास के पन्नों पर हमेशा के लिए अमिट हो गया। प्रकृति ने जो कहर, जख्म मानव को दिए है, वह अहसनीय रहा है। प्रवासी मजदूरों के आगमन के साथ ही छत्तीसगढ़ में भी कोरोना ने रफ्तार पकड़ ली है। वहीं शहर के साथ-साथ ग्रामीण जीवन भी अस्त व्यस्त हो गया है। किसी भी ग्राम में पहले किसी विशेष एक दिन बाजार लगा करता था पर अब वह बाजारवाद बिल्कुल समाप्त हो गया है। किसी भी ग्राम में अब कोई बाजार नही लगता, छोटे व्यापारी सप्ताह में चार से पांच दिन ग्रामों में लगने वाले बाजार को करके अपना और अपने परिवार का पेट पालते थे। अब वह अपनी गृहस्थी चलाने में समस्याओं का सामना कर रहे है।

ग्रामीणों के पास मात्र मनरेगा कार्य
वहीं पलायन में गए मजदूर बाहर से पैसा कमाकर अपने व अपने परिवार का पोषण करते थे वो भी अब समाप्त हो गया है। गांवों में ग्रामीणों के पास सिवाय रोजगार गारंटी के और कोई काम नही रह गया है। उनका परिवार इसी खर्चे पर इन दिनों चल रहा है। दूसरी तरफ नवतपा के पहले दिन से ही सूर्य आग की वर्षा कर रहे है। पारा नौतपा के दिन से ही प्रतिदिन ४५ डिग्री पार होते जा रहा है। ग्रामीण कृषकों के लिए ये दिन खेती किसानी के हिसाब से बहुत महत्वपूर्ण होते है, क्योंकि १५ जून के आसपास बारिश लग जाती है और किसान अपने खेतों में व्यस्त हो जाते है। इसके पूर्व खेतों की साफ-सफाई करना भी आवश्यक होता है पर तेज पड़ रही गर्मी के कारण बहुत कम किसान ही इन दिनों अपने खेतों में नजर आ रहे है।

सीएम ने दी राहत
बहरहाल ग्रामीण किसानों को राज्य की भूपेश सरकार से बड़ी राहत लगातार मिलती जा रही है। जहां अभी सरकार द्वारा बेचे गए धान के अंतर की राशि बैंक खातों में डाली गई है। वहीं तीन माह का राशन भी नि:शुल्क प्रदान किया जा रहा है। वहीं आने वाला वक्त राज्य सरकार के लिए भी अग्रिपरीक्षा साबित हो सकता है।

Nakul Sinha
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