अपने घरो में ही कैद रहना मुश्किल पड़ रहा है लोगों को ...

3 मई तक समय काटने में हो रही दिक्कत

By: Nitin Dongre

Updated: 18 Apr 2020, 04:13 PM IST

छुईखदान. कोरोना वायरस के कारण विगत 20 दिनों चल रहे लॉकडाउन को अब 3 मई तक जारी रखने की घोषणा के बाद लोग बेचैन हो रहे हैं। यह विडंबना है कि लोग कोरोना को जड़ से खत्म करने के लिए लॉकडाउन का समर्थन कर रहे हैं। इसके साथ ही बढऩे का समर्थन भी कर रहे हंै और परिवार की परेशानियों से मुक्त करने में झुलसने भी लगे हैं। लॉकडाउन से सबसे ज्यादा बच्चे परेशान हैं। छोटे-छोटे 5 से 7 वर्ष के बच्चे हैं आखिर वो करें। उनके सामने समस्या है कि वह करे क्या प्रति वर्ष गर्मी की छुट्टी होते है ननिहाल जाने की परंपरा भी इस बार कोरोना कि महामारी ने निगल लिया।

अक्सर छुट्टियों में भीड़ रहने वाले गार्डन गुलजार रहने वाले मैदान खाली पड़े हैं। अक्सर अपने गली मोहल्लो में क्रिकेट खेलने वाले बच्चे भी घरों मे ही बंद रह रहे हंै। सारे सार्वजनिक स्थानों पर सन्नाटा छाया हुआ है। लॉक डॉउन 3 मई तक जारी रहने की सूचना से तो लोग और भी बेचैन हो उठे हैं। उन महिलाओ की हालत और भी दयनीय हो गई है। घर पर काम का बोझ बढ़ गया है। थोड़ा बहुत फुर्सत निकालकर पड़ोसियों के साथ गप शप करना भी बंद हो गया है।

नगर के बच्चों के विचार

स्वरा वैष्णव ने कहा कि बहुत दिन हो गया छुटटी हुए घर में भी बोर लगने लगा है। मम्मी-पापा घर से निकलने नहीं देते, इसलिए घूमने भी नहीं मिल पा रहा है।

पूरब महोबिया ने बताया कि मम्मी पापा घर से नहीं निकलने देते। इस समय गर्मी की छुटटी में आइसक्रीम, गन्ना रस भी नहीं मिल पा रहा है।

पीहू तिवारी ने कहा है कि पेपर हो गया है हम लोग हर साल अपने मामा घर जाते हैं लेकिन पापा इस साल कहीं घुमाने नहीं ले गए।

रिद्धि महोबिया बताती हैं कि बहुत दिन हो गया पापा गार्डन नहीं ले जाते, गुपचुप भी नहीं खिलाते और घर पर ही खेलने बोलते है। नाना के घर भी नहीं ले जाऊंगा बोलते हैं।

नगर की महिलाओं के विचार

निधि तिवारी का कहना है कि घर में ही रहकर बोर लगता है। कोरोना के कारण इस समय मायके जाने नहीं मिल रहा है और तो और घर से भी नहीं निकल पा रहे हैं।

दीपाली जैन बताती हैं कि बच्चों को बहुत परेशानी हो रही है क्योंकि बच्चे बाहर का ज्यादा खाते हैं और अभी उन्हें मिल नहीं पा रहा है। साथ में घर से बाहर निकलने भी नहीं मिल रहा है।

किरण गुप्ता ने कहा कि मंदिर भी जाने नहीं मिल रहा है। साथ में मैं फील्ड वाली हूं। इस कारण और परेशानी हो रही है।

Nitin Dongre Desk
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