फिर लापरवाही: गायों को ऐसे गौशालाओं में छोड़ा जहां कोई सुविधा नहीं

दुर्ग जिले के राजपुर के शगुन गौशाला में बड़ी संख्या में मवेशियों की मौत के बाद बचे हुए मवेशियों को दूसरे गौशाला में भेजा जा रहा है।

राजनांदगांव. दुर्ग जिले के राजपुरा के शगुन गौशाला में बड़ी संख्या में मवेशियों की मौत के बाद बचे हुए मवेशियों को दूसरे गौशाला में भेजा जा रहा है। प्रशासन ने तीन ट्रकों में 100 मवेशियों को लेकर दो दिन तक घुमाया। इनमें से 8 मवेशियों की मौत हो चुकी है। सात की रास्ते में और दो ने गौशाला में उतरते ही दम तोड़ दिया। वहीं पत्रिका की पड़ताल में इस बात का खुलासा हुआ कि प्रशासन ने ऐसे गौशाला में मवेशियों को छोड़ा है जो कि पहले से ही संकट से घिरा है। नौ माह से अनुदान नहीं मिलने से मवेशियों को मुश्किल से चारा-पानी दे रहे हैं। इसके लिए संस्था को कर्ज तक लेना पड़ गया है।

मवेशियों को रखने की पर्याप्त व्यवस्था नहीं
श्रीगणेश गौशाला में पहले से ही साढ़े 400 मवेशियों को रखने की पर्याप्त व्यवस्था नहीं है, पर रिस्क उठाते हुए 93 मवेशियों को यहां छोड़ा गया है। इनमें से दो की उतारते वक्त मौत हो गई। वहीं गौशाला में इन सैकड़ों मवेशियों के हिसाब से शेड की व्यवस्था नहीं है। टिन का शेड लगाने की बजाये वैकल्पिक रूप से शेड बनाया गया है जो कि तेज बारिश होने पर काम नहीं आएगा। चारा-पानी देने के लिए सीमेंट की टंकी नहीं हैं। बड़ी बात यह है कि इस गौशाला को गौसेवा आयोग की ओर से 9 माह से अनुदान राशि नहीं दी गई है।

बचाने का प्रयास
यदू ने खुद स्वीकारा की यहां सैकड़ों मवेशियों के हिसाब से व्यवस्था नहीं है पर हर हाल में गौवंशों को बचाने अपने स्तर पर प्रबंधन करेंगे। बताया कि राजपुरा से लाए गई गायों की हालत बेहद खराब है। पत्रिका टीम पहुंची तो गायों को चराने के लिए जंगल की ओर छोड़ा गया था। वहीं मृत दो गायों का पोस्टमार्टम करने वाले डॉक्टर ने बताया कि भूख की वजह से इनकी मौत हुई है।

संस्था के अध्यक्ष राजीव यदू ने बताया कि आयोग को लगातार पत्राचार कर रहे हैं पर अनुदान देने आनाकानी की जा रही है। यहां पहले से ही साढ़े ४ सौ गौवंशों को रखकर सेवा करते आ रहे हैं। अनुदान राशि मिलने पर दिक्कत नहीं होती थी पर अब संकट के दौर से गुजरना पड़ रहा है। यदू ने बताया कि जब उन्हे इस बात का पता चला कि दो दिन से गौवंशों को लेकर प्रशासन के अफसर भटक रहे हैं, तब उन्होने रिस्क लेकर मवेशियों को गौशाला में छोडऩे कहा।

हालत पहले से सुधरी
डोंगरगांव के पशु चिकित्सा डॉ. महेश केसरिया ने बताया कि अनुदान राशि के लिए गौसेवा आयोग को पत्र भेजा गया है। राजपुर से लाई गई गायों की हालत पहले से सुधरी है।

गायों को यहां रिस्क लेकर रखा

श्रीगणेश गौशाला गनेरी डोंगरगांव के अध्यक्ष राजीव यदु ने बताया कि राजपुरा से लाई गई गायों को यहां रिस्क लेकर रखा गया है। संस्था को ९ माह से अनुदान प्राप्त नहीं हुआ है। इस वजह से चारा को लेकर दिक्कत हो रही है।

Satya Narayan Shukla Desk/Reporting
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