#Positive Story : रोशनी खोई पर हौसला नहीं, बना बैंक का अस्सिटेंट मैनेजर

#Positive Story : रोशनी खोई पर हौसला नहीं, बना बैंक का अस्सिटेंट मैनेजर
Blind youth become Bank Asst Manager

Satyanarayan Shukla | Publish: Jul, 11 2016 11:31:00 AM (IST) Rajnandgaon, Chhattisgarh, India

महज 2 वर्ष की आयु में दोनों आंखों की रोशनी खो चुके आदिवासी युवक कीर्तन ने अपने हौसलों की बदौलत हर बाधाओं को पार करते हुए वर्तमान में आंध्रा बैंक भिलाई के असिस्टेंट मैनेजर की पोस्ट पर पदस्थ हैं।

राजनांदगांव. महाराजपुर  (चिचोला) के दिव्यांग कीर्तन चंद्रवंशी ने कई  विषम परिस्थितियों के बाद भी उस मुकाम को हासिल किया है जिसके लिए सामान्य लोगों को भी पाने में कई तरह की दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। महज 2 वर्ष की आयु में दोनों आंखों की रोशनी खो चुके आदिवासी युवक कीर्तन ने अपने हौसलों की बदौलत हर बाधाओं को पार करते हुए वर्तमान में आंध्रा बैंक भिलाई के असिस्टेंट मैनेजर की पोस्ट पर पदस्थ हैं। 

मां ने मजदूरी कर पाला
कीर्तन ने बताया कि उसके परिवार के मुखिया पिता की मृत्यु के बाद उसकी माँ ने बेहद गरीब परिस्थितियों में भी मजदूरी कर उसके साथ उनकी दो छोटी बहनों को भी पढ़ा-लिखाकर बड़ा किया। उन्होंने अपनी सफलता का श्रेय संस्कार श्रद्धांजलि के अध्यक्ष सतीश भट्टड़ को देते हुए बताया कि संस्था द्वारा उच्च शिक्षा के लिए सीडी व डीवीडी उपलब्ध कराया गया। इन्हीं के सहयोग से जगतगुरु रामभद्राचार्य विवि चित्रकूट से बीएड की डिग्री प्राप्त कर दिल्ली में आईएएस की कोचिंग भी ले रहे हैं।

समाज में उपेक्षित और पीड़ित की मदद
दिव्यांग युवक कीर्तन छत्तीसगढ़ पीएससी के लिए भी कोचिंग कर रहा है। उसका कहना है कि प्रशासनिक सेवा में रहकर वे ऐसे लोगों की मदद करना चाहते हैं कि समाज में उपेक्षित और पीडि़त हैं। 25 साल के कीर्तन उन गरीबों की भी मदद करने की इच्छा रखता है जो तंगी के कारण चाहकर भी पढ़ाई नहीं कर पाते। 

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