1994 से निकाय के स्कूलों में नहीं हुई शिक्षकों की भर्ती, 75 प्रतिशत बच्चों की संख्या घटी ...

हाल-ए-शिक्षा व्यवस्था: नगरीय निकाय के स्कूलों में प्राध्यापकों की कमी

By: Nitin Dongre

Published: 06 Jan 2020, 07:24 AM IST

गोविंद साहू @ राजनांदगांव. शहर में संचालित नगरीय निकाय के दोनों ही स्कूलों में १९९४ से नियमित शिक्षकों की भर्ती नहीं होने से पढ़ाई पूरी तरह ठप हो गई। जैसे-तैसे जन भागीदारी शिक्षकों के भरोसे कोर्स पूरा कराया जा रहा है। इस वजह से परीक्षा परिणाम में गिरावट आने के कारण स्कूलों में लगातार बच्चों की दर्ज संख्या कम हो रही है। दर्ज संख्या में 75 फीसदी से अधिक गिरावट आ गई है। हालांकि इन दोनों स्कूलों को 2015 से शिक्षा विभाग को हैंडओवर कर दिया गया है। शिक्षा विभाग के अधीन होने के बाद भी यहां शिक्षक सहित अन्य कर्मचारियों की कमी बनी हुई है।

शहर में ठाकुर प्यारेलाल उच्चतर माध्यमिक विद्यालय व सर्वेश्वर दास नगर-पालिक निगम उच्चतर माध्यमिक विद्यालय आजादी के पहले से संचालित स्कूलें हैं। इन स्कूलों में प्राध्यापक व अन्य कर्मचारियों के नवीन पदों की संरचना नहीं की गई। जबकि यहां पदस्थ शिक्षक समयावधि पूर्ण होने पर लगातार रिटायर्ड हो रहे हैं।

प्यारेलाल में पांच तो म्यूनिस्पल में 8 नियमित शिक्षक

ठाकुर प्यारेलाल स्कूल में प्राचार्य सहित पांच शिक्षक तो म्यूनिस्पल स्कूल में 8 नियमित शिक्षक पदस्थ हैं। जबकि नए सेटअप के अनुसार दोनों स्कूलों में 24-24 प्राध्यापकों की व्यवस्था होनी चाहिए। दोनों ही स्कूल में शिक्षा का अधिकार कानून का पालन नहीं हो रहा है। इन स्कूलों में बच्चों की दर्ज संख्या में लगातार गिरावट के बाद भी शासन-प्रशासन द्वारा कोई ठोस पहल नहीं किया गया। यह भी हैरान करने वाली बात है।

विषय विशेषज्ञों की कमी

इन स्कूलों में हिंदी-अंग्रेजी व अन्य विषय के प्राध्यापकों की कमी बनी हुई है। जबकि दोनों स्कूलों में चारों संकाय (आर्ट, साइंस, मैथ्स और कामर्स) की पढ़ाई हो रही है। जनभागीदारी शिक्षकों की व्यवस्था के लिए बच्चों को अतिरिक्ति शुल्क चुकाना पड़ रहा है।

ताला लगाने की स्थिति न आ जाए

एक समय था जब इन स्कूलों में बच्चों की संख्या ढाई से तीन हजार हुआ करती थी, लेकिन अब म्यूनिस्पल स्कूल में 593 (363 बालक, 217 बालिका) अध्ययनरत हैं, तो वहीं ठाकुर प्यारेलाल स्कूल की बात करें तो यहां 320 बच्चे ही अध्ययनरत हैं। शासन-प्रशासन की अनदेखी के कारण ये स्कूल दम तोड़ रहे हैं। कहीं ऐसा न हो कि एक समय में नामी स्कूलों में गिने जाने वाले इन स्कूलों में ताला लगाने की स्थिति न आ जाए।

अनुदान व फर्नीचर तक नहीं मिल रहे

मिली जानकारी अनुसार ये स्कूल 2015 से शिक्षा विभाग के अधीन संचालित हो रही है। इसके बाद भी इन दोनों स्कूलों को शासन की ओर से आज तक कोई अनुदान नहीं मिला है। इसके अलावा विभाग से कभी फर्नीचर तक नहीं मिले हैं।

अध्यापन कराया जा रहा है

म्यूनिस्पल स्कूल राजनांदगांव के प्रभारी प्राचार्य संजीव मिश्रा ने कहा कि नियमित शिक्षकों की नियुक्ति नहीं होने के कारण थोड़ी दिक्कतें आती है। जनभागीदारी शिक्षकों के माध्यम से अध्यापन कराया जा रहा है।

कोर्स पूरा कराया जाता है

ठाकुर प्यारेलाल स्कूल के प्राचार्य आरएस बघेल ने कहा कि पढ़ाई व्यवस्था में परेशानी तो आती है। जनभागीदारी शिक्षकों से कोर्स पूरा कराया जाता है।

पत्र लिखकर अवगत कराएंगे

जिला शिक्षा अधिकारी हेमंत उपाध्याय ने कहा कि शिक्षकों की भर्ती शासन स्तर से होती है। इन स्कूलों शिक्षकों की पदपूर्ति शासन को ही करना है। इसके लिए पत्र लिखकर अवगत कराएंगे।

Nitin Dongre Desk
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