महामारी पर भक्तों की आस्था भारी मंदिरों में जले आस्था की ज्योत ...

भक्तों के घरों पर ही उनके नाम की ज्योति जली

कौड़ीकसा. कोरोना का महामारी पूरे विश्व में प्रभावशील है जिसके कारण जनता कफ्र्यू के बाद एक जगह सामूहिक रूप से एकत्रित न होने शासन की शक्ति मंदिरों में प्रतिबंध उसके बाद भी भक्तों की आस्था भारी पड़ रही है। भक्त अपने नाम का ज्योत मंदिरों में जलवा रहे हैं।

चैत्र मास के शुक्ल पक्ष के पहली तिथि के साथ हिन्दू नव वर्ष प्रारंभ हो जाता है। प्रथम दिवस से ही नवरात्रि का पर्व प्रारंभ हो जाता है, नौ दिनों तक आदि शक्ति के अलग-अलग नौ रूपों की अराधना की जाती है। भक्त जन नौ दिनों तक देवी में मंदिर अथवा अपने घरों में अखंड ज्योति कलश का स्थापना करते हैं जो नौ दिनों तक अनवरत जलते रहती है।

प्रतिबंध लगाया गया है

इस वर्ष भी 25 मार्च से नवरात्रि का प्रारंभ होना है, इसके पूर्व से देश क्या पूरे विश्व में कोरोना वायरस का प्रकोप चल रहा है। जिससे रोग मुक्त होने के लिए केन्द्र व राज्य सरकार तरह तरह के बचाव के प्रयास कर रहे हैं, जिसके लिए जनता कफ्र्यू उसके बाद सामूहिक आयोजन उत्सवों पर भी प्रतिबंध लगाया गया है। कोरोना का वायरस का फैलाव न हो इसके लिए मंदिरों या अन्य धार्मिक स्थलों पर सामूहिक रूप से एकत्रित होने प्रतिबंध लगाया गया है, पूजा अर्चना वहां के पंडित या पूजारी ही कर सकेंगे जिसके चलते मंदिरों में भक्तों के प्रवेश को प्रतिबंधित किया गया है फिर भी भक्तों के आस्था को नहीं डिगा पा रहे हैं। भक्तजन अपने आस्था का ज्योत मंदिर प्रांगण में स्थापित करवाने के लिए मंदिर समितियों के पास राशि जमा करा रहे हैं। ज्योत जलाने के बाद भक्त नौ दिनों में एक दिन दर्शन करने आ जाते थे लेकिन इस बार दर्शन करने नहीं आएंगे, घर पर ही रहकर देवी का अराधना करेंगे, ज्योत मंदिर में जलती रहेगी।

भक्त स्थिति सामान्य होने के बाद कभी भी दर्शन कर सकते हैं

यह बताना लाजिमी होगा की प्रत्येक नवरात्रि में बड़े मंदिरों में ज्योत के लिए एडवांस बुकिंग हो जाता है। छोटे या स्थानीय देवालयों में तत्कालिक राशि जमा लिया जाता है, ज्योति की स्थापना मंदिर ट्रस्ट द्वारा की जाती है। इससे भक्तों की आस्था खंडित नहीं होगा। सिर्फ इतना कि भक्त कोरोना वायरस को हराने के लिए नौ दिन तक मंदिर नहीं आएंगे। मंदिर प्रशासन का कहना है कि अंतिम दिवस हवन पूजन विसर्जन हो जाएगा। भक्त स्थिति सामान्य होने के बाद कभी भी दर्शन के लिए आ सकते हैं। यह शास्वत सत्य है कि हवन से आसपास की कीटाणु नष्ट हो जाते है व वातावरण शुद्ध होता है, आज भी गांवों में किसी प्रकार की प्राकृतिक विपदा महामारी यहां तक की पशुधन की हानि होने पर भी देवी की अराधना करते हैं व प्रकोप से मुक्ति पाते हैं।

Nitin Dongre Desk
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