चोडऱाधाम के प्राचीन मंदिर में आज से लगेगा तीन दिवसीय आस्था का मेला

मेले में सीमा कौशिक की सांस्कृतिक प्रस्तुति होगी आकर्षण का केंद्र

By: Nakul Sinha

Published: 03 Mar 2019, 05:02 AM IST

राजनांदगांव/नर्मदा. नर्मदा से मलाजखण्ड रोड पर ग्राम जंगलपुर घाट से लगभग आधा किलो मीटर की दूरी पर स्थित डोंगेश्वर महादेव चोडऱाधाम प्राचीन काल से ही श्रद्धा एवं भक्ति का केन्द्र बना हुआ है साथ ही प्रकृति के गोद में स्थित यह स्थान छत्तीसगढ़ शासन से पर्यटक स्थल भी घोषित हो चुका है। यहां वर्ष में दो बार कार्तिक पूर्णिमा एवं महाशिवरात्रि पर लगने वाले मेले के दौरान छत्तीसगढ़ के अलावा मध्यप्रदेश ए महाराष्ट्र सहित अन्य प्रान्तों के हजारों श्रद्धालु महादेव का दर्शन करते हैं। इस वर्ष 3ए4 एवं 5 मार्च को तीन दिवसीय महाशिवरात्रि मेला का आयोजन किया जा रहा है जिसमें हजारों श्रद्धालु पहुंचेंगे। चोडऱा सेवा समिति के अध्यक्ष आनन्द पटेल ने बताया कि रविवार 3 मार्च से मंगलवार 5 मार्च तक तीन दिवसीय महाशिवरात्रि मेला का आयोजन किया गया है। 3 मार्च रविवार को रात्रि में छत्तीसगढ़ की ख्याति प्राप्त गायिका सीमा कौशिक की छत्तीसगढ़ी सांस्कृतिक कार्यक्रम की प्रस्तुति होगी। यहां कई बड़ी गुफाएं भी हैं। लोगों का मानना है कि ये गुफाएं मंडीप खोल तक जाती हैं, किन्तु ये भी आज तक रहस्य बना हुआ है। यहां कई वनस्पतियां एवं बड़े बड़े वृक्ष भी हैं जिसका आयुर्वेदिक औषधियों के रूप में प्रयुक्त होता हैं।

ऐसी है मंदिर की मान्यता
कैलाश पर्वत के समान बड़े-बड़े चट्टानों के बीच डोंगेश्वर महादेव का प्राचीन मंदिर स्थित है। मंदिर में शिवलिंग के ऊपर एक नंदी की प्रतिमा है जिसके मुख से गुप्त गंगा का पवित्र जल निरंतर प्रवाहित होकर शिवलिंग पर गिरता है। चाहे कितनी भी भीषण गर्मी हो ये जल प्रवाह कभी भी रूकता नहीं है। ये जल प्रवाह कहां से आ रहा है इसका रहस्य आज तक कोई नहीं सुलझा पाया है। लोगों की माने तो जिस तरह गंगा जल को यदि किसी पात्र में वर्षों रखे तो भी वो दूषित नहीं होता है उसी प्रकार ये गुप्त गंगा का जल भी कभी दूषित नहीं होता है, जो आश्चर्य की बात है। गुप्त गंगा का जल शिवलिंग पर प्रवाहित होते हुए मंदिर के सामने निर्मित एक कुंड में आता है, वहां से नीचे स्थित दो कुंड जो पुरुष व महिला श्रद्धालुओं के स्नान के लिए बनाया गया है वहां पहुंचता है। उसके बाद ये जल नर्मदा, दनिया, देवकर होते हुए शिवनाथ नदी में जाकर मिलता है। स्थानीय लोग गुप्त गंगा के पवित्र जल से चिड़चिड़ापनए दमाए मानसिक तनाव आदि रोगों का उपचार के अलावा फसल में होने वाले कीट प्रकोप का उपचार भी करते हैं। यहां कई बड़ी गुफाएं भी हैं। लोगों का मानना है कि ये गुफाएं मंडीप खोल तक जाती हैं, किन्तु ये भी आज तक रहस्य बना हुआ है। यहां कई वनस्पतियां एवं बड़े-बड़े वृक्ष भी हैं जिसका आयुर्वेदिक औषधियों के रूप में प्रयुक्त होता हैं।

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