सर्व धर्म के बच्चों के लिए प्रत्येक रविवार को बौद्ध सेवा समिति द्वारा की जा रही है ये पहल ...

राज्य सरकार के आदेश के पहले दो साल से दी जा रही जानकारी

By: Nitin Dongre

Published: 03 Dec 2019, 08:59 AM IST

गोविंद साहू @ राजनांदगांव. राज्य सरकार द्वारा स्कूली बच्चों को सप्ताह में एक दिन संविधान की प्रस्तावना का वाचन कर विशेष रूप से जानकारी देने निर्देश जारी किया गया है। हर सोमवार को स्कूलों में ऐसा होना भी शुरू हो गया है लेकिन इस निर्देश के पहले ही राजनांदगांव में बौद्ध सेवा समिति द्वारा शांतिनगर स्थित करुणा बौद्ध विहार भवन में दो साल से हर रविवार संविधान की प्रस्तावना का वाचन कराने के साथ ही इसकी विशेषता सहित अन्य सामान्य ज्ञान की जानकारी दी जा रही है। यह एक अनुकरणीय पहल है। यहां हर सप्ताह औसतन करीब ४० बच्चे पहुंचते हैं।

इस संस्था के माध्यम से बच्चों को जानकारी देने वाले संदीप कोल्हाटकर ने बताया कि यहां ५० से अधिक बच्चे पहुंचते हैं, लेकिन औसतन ४० से अधिक बच्चे हर सप्ताह आते हैं। ये बच्चे सभी समुदाय से हैं। इन बच्चों की सुबह १० से १२ बजे तक क्लास लगाई जाती है, जहां उनके अलावा बच्चों को सुनीता इलमकार, सहयोगी पूनम कोल्हाटकर, संजय हुमने व राजकुमार उइके द्वारा संविधान की प्रस्तावना सहित इसके संबंध अलग-अलग जानकारी दी जाती है। बच्चों को महापुरुषों की जीवनी सहित विभिन्न क्षेत्रों में उपलब्धि हासिल कर चुके लोगों की कहानी बताकर भी प्रेरित किया जाता है।

बच्चे फर्राटे मौखिक पढ़ रहे प्रस्तावना

यहां हर वर्ग के बच्चों के साथ तीन साल से लेकर १८ वर्ष तक बच्चे क्लास में शामिल हो रहे हैं। इस तरह की क्लास शुरू करने का उद्देश्य के बारे में कोल्हाटकर ने बताया कि हमारे देश के बच्चों को धर्म और व्यवहारिक ज्ञान के साथ संविधान की जानकारी होना भी जरूरी है। हम चाहते थे बच्चों को संविधान की पूरी जानकारी स्कूली शिक्षा में ही मिल जाए, इसी को ध्यान में रखते हुए छोटा सा प्रयास करते हुए इस तरह की क्लास की शुरुआत की गई। यहां आ रहे ज्यादातर बच्चों को संविधान की प्रस्तावना मौखिक याद है।

बच्चों को पढ़ाया जा रहा हिस्टोरिकल अल्फाबेट

यहां बच्चों को हिस्टोरिकल अल्फाबेट पढ़ाया जा रहा है, जिसमें ए फॉर आंबेडकर, बी फॉर बुद्ध, जे फॉर ज्योतिभा, के फॉर कबीर, एन फॉर नेल्सन मांडेला और ओ फॉर ओबामा पढ़ाया जा रहा है। इस संबंध में बताया गया कि इससे बच्चों में इन महापुरुषों का नाम याद हो जाएगा और इन्हें जानने की ललक जगेगी। ऐसे ही महापुरुषों की जीवनी संबंधी भी बच्चों को जानकारी दी जाती है।

Nitin Dongre Desk
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