महाराष्ट्र से बसों में आ रहे हजारों, यहां की व्यवस्था हुई फेल, सोशल डिस्टेंसिंग तार-तार ...

सरकारों में सामंजस्य की कमी के चलते परेशान हो रहे लोग

By: Nitin Dongre

Published: 16 May 2020, 04:16 AM IST

अतुल श्रीवास्तव @ राजनांदगांव पत्रिका. छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र के बार्डर पर राजनांदगांव जिले के बागनदी में महाराष्ट्र से आने वालों की भीड़ ने मजदूरों के हित में काम करने के सरकारी दावों की पोल खोलकर रख दी है। इस भीड़ ने केन्द्र सरकार और महाराष्ट्र सरकार के साथ छत्तीसगढ़ सरकार के आपसी सामंजस्य की कमी को भी उजागर कर दिया है। बार्डर में हर दिन 10 से 15 हजार लोग पहुंच रहे हैं और उनके लिए यहां की जा रही व्यवस्था ऊंट के मुंह में जीरे की तरह है।

केन्द्र सरकार ने लाकडाउन के तीसरे चरण में आवाजाही के लिए दी है। इस छूट ने लाकडाउन के साथ ही सोशल डिस्टेंसिंग का मजाक बनाकर रख दिया है। मजदूर ट्रकों में एक दूसरे पर लदकर यहां पहुंच रहे हैं या फिर पैदल ही सैकड़ों किलोमीटर का सफर तयकर बार्डर में पहुंच रहे हैं। महाराष्ट्र सरकार की बसों में ही हजारों लोग पहुंच रहे हैं। बागनदी में जिला प्रशासन ने इस तरह आने वाले प्रवासी मजदूरों और पास लेकर आने वालों के लिए अलग-अलग स्टेशन बनाए हैं लेकिन जो भीड़ उमड़ रही है, उसके लिए व्यवस्था नाकाफी है और इसके चलते भगदड़ की स्थिति निर्मित हो रही है।

महाराष्ट्र ने किया यह

देश के सबसे ज्यादा कोरोना संक्रमित राज्य महाराष्ट्र के तकरीबन सभी बड़े शहरों में छत्तीसगढ़, झारखंड, उड़ीसा और बिहार के मजदूर और श्रमिक रह रहे हैं। लंबे लाकडाउन के चलते काम धंधा बंद होने और इनके लिए रहने खाने की व्यवस्था करने की दिक्कत के बाद महाराष्ट्र ने अपनी सारी परिवहन सेवा को इनको अपने राज्य से इनके गंतव्य तक भेजने में झोंक दिया है। हालांकि वह यह काम अधूरा कर रहा है। इन सभी राज्यों के प्रवासी श्रमिकों और अन्य लोगों को महाराष्ट्र राज्य परिवहन की बसें छत्तीसगढ़ सीमा में बागनदी तक छोड़ रही हैं। इसके चलते यहां अच्छी खासी भीड़ जमा हो रही है।

यहां होना चाहिए यह

महाराष्ट्र सरकार अपनी सरकारी बस सेवा के माध्यम से प्रवासी लोगों को नि:शुल्क यहां तक भेज रही है। इसी तर्ज पर छत्तीसगढ़ सरकार को मानवीय रुख अख्तियार करते हुए अपने खर्च पर लोगों को उनके गांव तक भेजने की व्यवस्था कर सकती है। छत्तीसगढ़ के लोगों को उनके गांव और दूसरे राज्यों के लोगों को उनके राज्य के बार्डर तक भेजा जा सकता है। अभी ट्रकों में लदकर या फिर अधिक कीमत पर सफर करने लोग मजबूर हो रहे हैं।

केन्द्र ट्रेन चलाए तो मिलेगी बडी़ राहत

देशभर से पैदल और असहनीय यात्रा कर अपने गांव जाने की जद्दोजहद में लगे लोगों की तस्वीरें आ रही हैं। इससे छत्तीसगढ़ और राजनांदगांव भी अछूता नहीं है। यहां भी लोग कठिन सफर कर रहे हैं। केन्द्र सरकार ने सोशल डिस्टेंसिंग का पालन कराने और एक जगह से दूसरी जगह लोग न जाएं, इसके लिए करीब डेढ़ महीने पहले लाकडाउन लगाया था लेकिन अब न सिर्फ लोगों का परिवहन बढ़ गया है बल्कि सोशल डिस्टेंसिंग की भी धज्जियां उड़ रही हैं। ऐसे में लोगों को सुरक्षित परिवहन सुविधा देने रेल सेवा शुरु किया जाना सबसे सही उपाय होगा। हर दिन में एक ही क्षेत्र में दस-पंद्रह हजार लोगों के परिवहन से देशभर में लोगों की आवाजाही का अंदाजा लगाया जा सकता है। देशभर में फैली आपाधापी को रेल सेवा के माध्यम से ही नियंत्रित किया जा सकता है।

इससे कम में कर लेते हवाई सफर

बागनदी बार्डर में पुणे से अपनी पत्नी, एक बच्ची सहित नौ लोगों के साथ आकर अपने घर कवर्धा जाने ट्रक या बस का इंतजार करते राकेश यादव मिले। राकेश ने बताया कि प्रति व्यक्ति 35 सौ रुपए लेकर एक निजी बस ने उन्हें पुणे से बागनदी तक छोडा़ है। अब गांव जाने की समस्या है। राकेश और उसके साथ मौजूद साथियों ने खर्च भी किया और तकलीफ भी झेल रहे हैं। इतने में वो हवाई सफर कर सकते थे।

पैदल पहुंची गर्भवती

घर पहुंचने की कोशिश में लोग किसी भी हाल में हों, बस निकल पड़े हैं। बेमेतरा के रहने वाले 11 लोग हैदराबाद में फंसे थे। जब कोई रास्ता नहीं दिखा तो पैदल ही निकल पड़े। इन लोगों में धरमवीर जांगड़े भी हैं। धरमवीर की पत्नी ममता जांगड़े गर्भवती हैं। आठवां महीना चल रहा है। धरमवीर ने बताया कि काम छूटा तो कई दिन इंतजार किया। जब सब रास्ते बंद हुए तो पैदल ही निकल पड़े। बीच-बीच में ट्रकों में कुछ दूर तक बैठ यात्रा की और किसी तरह यहां पहुंच गए।

हुई एक महिला की डिलीवरी तकलीफदायक

सफर और मुश्किलों के बीच एक परिवार के लिए अच्छी खबर भी बागनदी से आई है। पुणे से पैदल बेमेतरा के लिए अपने परिवार के साथ निकली एक गर्भवती का सुरक्षित प्रसव बागनदी में ही हुआ। त्रिवेणी पति संतोष साहू नाम की इस महिला का प्रसव एएनएम रोशनी राजपूत ने कराया। इस महिला ने ढाई किलो वजन के बच्चे को जन्म दिया।

इसलिए कम नहीं हो रही भीड़

महाराष्ट्र से बसों के जरिए और अन्य साधनों से बार्डर पर आने वाले लोगों को ट्रकों या फिर बसों के जरिए भेजने की व्यवस्था राजनांदगांव का जिला प्रशासन कर रहा है लेकिन इसकी गति बेहद धीमी है। पत्रिका टीम ने शुक्रवार दोपहर करीब ढाई बजे से लेकर चार साढ़े 4 बजे तक बार्डर में मौजूद रहकर स्थिति को समझा। इस दो घंटे में ही महाराष्ट्र राज्य परिवहन की करीब 25 से 30 बसों में लोग यहां पहुंचे जबकि यहां से इतने समय में तीन से चार बसों और इतने ही ट्रकों में लोगों को बिठाकर भेजा जा सका। साफ है कि बार्डर में आने वाले हजारों की संख्या में हैं और यहां से भेजे जाने वाले बमुश्किल सैकड़ा भर।

आ रही ऐसी भी शिकायतें

बागनदी बार्डर पर प्रशासन और पुलिस की टीम ट्रकों को रोककर उसमें लोगों को बिठाकर रवाना कर रही हैं। बार्डर में लोगों के लिए पुलिस प्रशासन ने बसें भी लगाई हैं लेकिन कई लोगों ने शिकायत की कि बस वाले बेमेतरा के लिए साढ़े 3 सौ रुपए तक मांग रहे हैं। हालांकि पता चला है कि इस तकलीफ को दूर करने विभाग मशक्कत में जुटा है।

बांट रहे बिस्कुट का पैकेट

बार्डर पर भूखे प्यासे पहुंचने वाले लोगों के लिए पुलिस प्रशासन ने बिस्कुट और जिला प्रशासन ने चना मुर्रा जैसे सूखे नाश्ते की व्यवस्था की है। पुलिस के शिविर में लोगों को बिस्कुट के पैकेट दिए जा रहे हैं।

Nitin Dongre Desk
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