दो माह पहले आई जांच टीम ने समस्त दस्तावेजों को खंगालने ले गए अपने साथ, पर अब तक नहीं हुई कोई कार्रवाई

देवकटटा पंचायत में जांच के दौरान टीम को मिले थे कई नए मामले

By: Nakul Sinha

Published: 03 Jan 2020, 10:43 AM IST

राजनांदगांव / डोंगरगढ़. ग्राम देवकट्टा की सरपंच एवं पूर्व सचिव तथा वर्तमान सचिव द्वारा फर्जी बिल लगाकर कई लाखों रूपए शासकीय राशि हजम करने का मामले में 31 अक्टूबर को जांच टीम ने गांव के पंचों, सरपंच, पूर्व सचिव, वर्तमान सचिव, शिकायतकर्ता तथा ग्रामीणों की उपस्थिति में दस्तावेज खंगाले जहां अन्य चौकाने वाले नए मामले भी जांचकर्ता अधिकारियों के हाथ लगे। किंतु 2 माह बाद भी सरपंच व सचिव के उपर प्रशासन कोई कार्यवाही नहीं की जिससे ग्रामीणो में आक्रोश उत्पन्न हो रहा है। वहीं इस पंचायत में हुए अन्य भ्रष्टाचार के मामले को लेकर ग्रामीणों ने 4 नवंबर को कलक्टर से शिकायत की। जिसके परिपालन में सीईओ द्वारा ग्रामीणों को दो दिन बाद जांच करवाने का आश्वासन मिला है। इस प्रकरण को लेकर सत्तापक्ष के चर्चित 1 विधायक द्वारा अधिकारियों को मामले में बचाने के निर्देश भी दिए गए हैैै जबकि संबंधित सरपंच भाजपा कार्यकाल के दौरान बेखौफ शासकीय राशि डकारते हुए ग्रामीणों पर रौब जमाते रही। जहां अब इनके भ्रष्टाचार के बिल ब्वाउचर प्रमाण सहित अधिकारियों को ग्रामीणों ने उपलब्ध कराए जिसे पूर्व में जांच में गए अधिकारी भी दंग रह गए किंतु मात्र दस्तावेज जब्ती की कार्यवाही कर शांत बैठ गए।

पंचायत में फर्जी बिल लगाने का हुआ था खुलासा
फर्जी बिल में यह भी खुलासा हुआ कि गांव में साढे चार सौ परिवारों में सरपंच ने शौचालय निर्माण में 650 नग मुर्गा मंगाया है, जहां एक मुर्गे की दर 450 प्रतिनग के हिसाब से 157500 रूपए का खुलेतौर पर गबन किया है। वहीं गांव में लगभग डेढ़ सौ शौचालय पूर्व से ही निर्मित थे और सरपंच ने नियमों को ताक पर रखकर रिकार्ड जब्ती उपरांत बिना प्रस्ताव के गांव की गलियों में 14वें वित से राशि निकालकर गांव में हीरो बनने के लिए सीसीरोड बनाने का कार्य करवा रही है। जिसकी गुणवत्ता पर भी ग्रामीणों ने सवाल उठाए है। बताया जाता है कि भ्रष्टाचार प्रमाणित होने के बाद भी जांचकर्ता अधिकारी तहसीलदार द्वारा जब्त किए गए रिकार्ड में कार्यवाही ना करते हुए मामले को दबाने में लगे है जिससे सरपंच के हौसले बढ़ गए है और वर्तमान में निर्विरोध सरपंच बनने के लिए ग्रामीणों के द्वार खटखटा रही है। इस संबंध में एसडीएम अविनाश भोई ने बताया कि इस प्रकरण में क्या कार्यवाही हुई है सीईओ से पता करके बताता हूं।

जांच के दौरान टीम ने शिकायत को सही माना
गौरतलब हो कि 31 अक्टूबर को तहसीलदार लवकेश ध्रुव, सीईओ लक्ष्मण कचलाम, आरईएस एसडीओ कीर्तीप्रकाश पवार, लोकनिर्माण के इंजी.यदु, उपअभियंता विजय मेहरा सहित करारोपण अधिकारी सी कुजुर ने ग्राम देवकट्टा पहुंचकर दस्तावेजों की जांच तथा ग्रामीणों से पूछताछ उपरांत समस्त दस्तावेज, 14वें वित, ओडीएफ, मुलभूत कैशबुक, संबंधित व्हाउचर, पासबुक, पंचायत की कार्यवाही पंजी 2016-17 व 2017-18, ग्रामसभा रोकड़ पंजी, स्वच्छता अभियान, सामग्री वितरण पंजी, ओरिजनल बिल 49 नगर ओरिजनल मस्टररोल जब्त कर २अपनी अभिरक्षा में तहसीलदार ध्रुव ने तहसील कार्यालय ले गए। जहां ग्रामीणों से चर्चा में यह बात भी सामने आई थी कि गांव के शौचालय निर्माण व आंगनबाड़ी भवन की छत में रिपेरिंग कार्य के लिए 86-86 सीमेंट बोरी के फर्जी बिल की जांच में जांच टीम ने स्थल निरीक्षण कर शिकायत सही पाया। वहीं बाजार नीलामी पिछले वर्ष 91 हजार में गई थी किंतु इस वर्ष सरपंच नीरा पटेल व सचिव श्रीराम ने चोरीचुपके से अपने चहेते ठेकेदार को 62 हजार में बाजार नीलाम पर दे दिये जहां पंचायत में किसी प्रकार पंचायत प्रस्ताव भी नहीं लिया गया।

Nakul Sinha
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