पब्जी खेलने मना किया तो घर से भागा, ट्रक में राजनांदगांव, नागपुर फिर मुंबई के लिए निकला ...

पुलिस ने नाबालिग को सकुशल ढूंढ निकाला

By: Nitin Dongre

Published: 24 May 2020, 07:40 AM IST

राजनांदगांव. घर से रातों-रात भागने वाले नाबालिग बच्चे को लेकर यह खुलासा हुआ है कि पिता के पब्जी गेम खेलने से मना करने पर वह घर से भागा था। खैरागढ़ से ट्रक से राजनांदगांव और फिर वहां से अलग-अलग माध्यम से नागपुर तक पहुंचने के बाद वह बस में सवार होकर मुंबई के लिए निकला था। राजनांदगांव एसपी जितेन्द्र शुक्ल ने जानकारी देते हुए जिलेभर के थाना प्रभारियों को बच्चों से जुड़े मामलों में गंभीरता से काम करने के निर्देश दिए हैं।

उल्लेखनीय है कि खैरागढ़ शहर से दो दिन पहले लापता हुए नाबालिग को पुलिस ने 24 घंटे के भीतर सकुशल बरामद कर लिया है। नाबालिग को महाराष्ट्र के अमरावती के पास से बरामद किया गया। एसपी शुक्ल ने इस मसले को लेकर मीडिया से बात करते हुए कहा कि शुरुआती लापरवाही के बाद भी पुलिस ने 24 घंटे में बच्चे को खोज निकाला है।

योजनाबद्ध तरीके से भागा

एसपी शुक्ल ने बताया कि घर में पब्जी खेलने से मना करने पर नाबालिग ने घर से भागने की योजना बनाई और सबके सोने के बाद तड़के 4 बजे घर से अपना बैग लेकर निकल गया। खैरागढ़ से वह ट्रक से राजनांदगांव पहुंचा। इसके बाद वह अलग-अलग तरीकों से नागपुर पहुंचा। नागपुर में वह खुद को मुंबई का निवासी और खैरागढ़ में रहकर पढऩे वाला बताकर बस में बैठ गया। इसी दौरान पुलिस के सर्विलेंस में आने के बाद वह मिल गया।

बरती गई शुरुआत में लापरवाही

एसपी शुक्ल ने स्वीकार किया कि सुबह 8 बजे पुलिस तक बच्चे की गुमशुदगी की खबर मिल गई थी और 9 बजे तक उसका मोबाइल नंबर मिल गया था लेकिन खैरागढ़ पुलिस ने शुरुआती लापरवाही बरती। उन्होंने बताया कि 10 बजे उनके पास खबर आने के बाद उन्होंने तुरंत बच्चे के फोन को सर्विलेंस में डालने के निर्देश साइबर सेल को दिए। ऐसा हो जाने के बाद लोकेशन मिलता रहा और बच्चे को पकड़ लिया गया। एसपी ने कहा कि यदि स्थानीय स्तर पर तुरंत एक्टिव हुआ जाता तो दो घंटे पहले पुलिस को सफलता मिल जाती।

गंभीरता बरतने के निर्देश

एसपी शुक्ल ने जिलेभर के थाना प्रभारियों को बच्चों की गुमशुदगी और उनसे जुड़ी शिकायतों पर गंभीरता से काम करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि कई बार शुरुआती लापरवाही भारी पड़ जाती है।

पालक भी समझे बालमन

पुलिस कप्तान शुक्ल ने अभिभावकों से भी कहा कि वे अपने बच्चों के मन को समझें और सख्ती करने के बजाए उन्हें उचित तरीके से सही और गलत का अंतर बताएं।

Nitin Dongre Desk
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