थ्री ऑन थ्री, ये है भारत का ऐसा शहर जिसके जुनून में बसा खेल, 32 देशों के खिलाडिय़ों को बताने हम हो रहे तैयार

Dakshi Sahu

Publish: Dec, 07 2017 12:48:21 (IST) | Updated: Dec, 07 2017 04:33:50 (IST)

Rajnandgaon, Chhattisgarh, India
थ्री ऑन थ्री, ये है भारत का ऐसा शहर जिसके जुनून में बसा खेल, 32 देशों के खिलाडिय़ों को बताने हम हो रहे तैयार

करीब ढाई साल बाद राजनांदगांव का नाम पूरे विश्व में चर्चित हो जाएगा। साल 2020 में राजनांदगांव में विश्व बॉस्केटबॉल चैम्पियनशिप का आयोजन होगा।

अतुल श्रीवास्तव@राजनांदगांव. करीब ढाई साल बाद राजनांदगांव का नाम पूरे विश्व में चर्चित हो जाएगा। साल २०२० में राजनांदगांव में विश्व बॉस्केटबॉल चैम्पियनशिप का आयोजन होगा। है, सिर्फ एक खेल का टूर्नामेंट लेकिन यह एक खेल पूरी दुनिया को बता देगा कि एक ऐसा भी शहर है, जिसके भीतर जुनून की हद तक खेल बसा हुआ है। विश्वभर के ३२ देशों के खिलाड़ी यहां आएंगे और अपने खेल जौहर का प्रदर्शन करेंगे।

इस खेल आयोजन के लिए जिन संसाधनों की जरूरत होगी, वो अभी यहां नहीं है। संसाधनों के नजरिए से इस शहर को शून्य से शुरूआत करनी होगी। इसके लिए अभी ढाई साल का वक्त भी है। बॉस्केटबॉल के खेल में विश्व के कई देशों में सैकड़ों टूर्नामेंट खेलकर अनगिनत गोल्ड, सिल्वर और कांस्य जीतकर इस शहर के खिलाडिय़ों ने जो तस्वीर पेश की है, उसी की बदौलत एक बड़ा टूर्नामेंट इस शहर को मिला है और अब मेजबानी का अवसर आने वाला है।

हॉकी की नर्सरी के रूप में पूरे छत्तीसगढ़ में प्रसिद्ध राजनांदगांव ने पिछले कुछ सालों में बॉस्केटबॉल के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धि दर्ज की है। साई का सेंटर खुलने के बाद खिलाडिय़ों के लिए कई रास्ते खुल गए। अब एक बड़ा आयोजन होना है। विश्व स्कूल बॉस्केटबॉल चैम्पियनशिप (थ्री ऑन थ्री) की मेजबानी के लिए कई देशों के बीच मुकाबले में भारत ने बाजी मारी और भारत में छत्तीसगढ़ के प्रवेश द्वार पर बसे राजनांदगांव को होस्ट शहर के रूप में चुना गया है।

यह खुश होने का अवसर है लेकिन आयोजन को बेहतर ढंग से करने के लिए फिलहाल हमारे पास हौसलों को छोड़कर कुछ नहीं है। अंतरराष्ट्रीय मापदंड का एक भी मैदान इस शहर के पास नहीं है। इसके लिए राज्य सरकार को स्कूल गेम्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (एसजीएफआई), भारतीय खेल प्राधिकरण (साई) के साथ लंबी कार्ययोजना तैयार करनी होगी। न सिर्फ कार्ययोजना बनानी होगी, बल्कि इसे समयसीमा में पूरा भी करना होगा।

इस आयोजन के लिए सरकार एक अलग विभाग ही बनाएगी या फिर स्कूल शिक्षा विभाग के माध्यम से ही काम होगा, यह अभी तय नहीं है। दरअसल, मेजबानी मिलने की घोषणा हो गई है। यहां इसे लेकर सूचनाएं भी आ गई हैं लेकिन राज्य सरकार के अफसर अब तक अधिकृत पत्र के इंतजार में हैं। इसके आने के बाद ही यहां इसे लेकर हलचल होने के आसार हैं।

ऐसे मिली मेजबानी
अक्टूबर महीने के दूसरे हफ्ते में इटली में २०२० के विश्व स्कूल खेल के आयोजन को लेकर बैठक हुई थी। इंटरनेशनल स्कूल फेडरेशन (आईएसएफ) की इस बैठक में एसजीएफआई ने टेबल टेनिस और बॉस्केटबॉल की मेजबानी भारत को मिले, ऐसा दावा किया था। और भी कई देश इन खेलों के लिए दावे कर रहे थे।

इसी बैठक में चीन ने भारत से सहयोग मांगा। एसजीएफआई ने टेबल टेनिस के लिए सहयोग दिया और उससे बॉस्केटबॉल के लिए सहयोग मांगा। इस तरह बॉस्केटबॉल की मेजबानी भारत को मिली और चीन को टेबल टेनिस व जिम्नास्टिक का खेल मिल गया। मेजबानी मिलने की घोषणा आईएसएफ के सीईओ व सेक्रेटरी जनरल जेन कॉलेन ने की।

इंडोर मैदान की ऐसी होगी जरूरतें
इस वक्त यहां दिग्विजय स्टेडियम के नवनिर्माण का काम चल रहा है। करीब ४० करोड़ रूपए की लागत से नया स्टेडियम बनाया जा रहा है। फिलहाल मौजूद एक इंडोर मैदान जल्द ही टूटने वाला है। यहां तीन इंडोर मैदान बनेंगे। दो इंडोर बॉस्केटबॉल के लिए और एक बैडमिंटन के लिए होगा।

थ्री ऑन थ्री टूर्नामेंट के लिए छह कोर्ट की जरूरत को देखते हुए बॉस्केटबॉल का एक और इंडोर मैदान बनाना होगा ताकि इसमें छह कोर्ट बनाए जा सकें। नए बनने वाले इंडोर मैदान को एयरकंडीशंड करने की कोई योजना नहीं है, जबकि ऐसा करना होगा। आयोजन अप्रैल में होगा और उस समय गर्मी रहेगी।

ऐसे में इसके लिए नए बनने वाले इंडोर मैदान को लेकर अभी से एसी या फिर डक्टिंग पद्धति को लेकर कार्ययोजना तैयार करनी होगी। चैम्पियनशिप के सारे मैचों का सीधा प्रसारण होगा। ऐसे में इसके लिए लगने वाले उपकरणों को ध्यान में रखते हुए इंडोर मैदान में जगह का चिन्हांकन करना होगा। पहली बार इतना बड़ा आयोजन होगा। ३२ देशों के खिलाड़ी आएंगे। शहर और आसपास से भी मैच देखने लोग आएंगे। ऐसे में बैठक व्यवस्था को लेकर भी अभी से विचार करना होगा।

मल्टीपर्पस हॉल बनाना होगा
चैम्पियनशिप के उद्घाटन और समापन के मौके पर होने वाले समारोह के लिए एक बड़े मल्टीपर्पस हॉल की जरूरत होगी। यह अभी शहर में नहीं है। इस हॉल में सभी ३२ देशों के खिलाडिय़ों का मार्च-पास्ट होगा और उनका जमावड़ा होगा। ऐसे में यह हॉल काफी बड़ा बनाना होगा।

यह भी एयरकंडीशंड ही होगा। इस हॉल को बनाने के लिए जगह का चयन करना और फंड की व्यवस्था करना सरकार के लिए चुनौती का काम होगा। हालांकि पता चला है कि इसके लिए जमीन की तलाश का काम चल रहा है और इस हॉल को शिक्षा विभाग के फंड से बनाने पर विचार चल रहा है।

आवास की यह है तैयारी
विश्व स्कूल चैम्पियनशिप आठ से दस दिनों का होगा। एसजीएफआई ने चैम्पियनशिप में हिस्सा लेने आने वाली टीमों के आवास के लिए प्रारंभिक तौर पर आईएसएफ को जो जानकारी दी है, उसमें शहर के कुछ प्रमुख होटलों के अलावा दुर्ग और भिलाई के कुछ होटलों के नाम दिए गए हंै। रायपुर के स्वामी विवेकानंद एयरपोर्ट से लेकर चिन्हांकित होटलों की दूरी का रोड मैप तैयार कर भेजा गया है।

अगले साल ही आएगी तेजी
ऐसा समझा जा सकता है कि इस मसले में अब नए साल यानि २०१८ में ही कुछ तेजी आएगी। राज्य सरकार को विधिवत पत्र मिलने के बाद भारत सरकार, स्कूल गेम्स फेडरेशन ऑफ इंडिया और साई का प्रतिनिधिमंडल यहां का दौरा करेगा। यहां यह टीम उपलब्ध सुविधाओं को समझने के अलावा आयोजन के लिए और जरूरी संसाधन जुटाए जाने की कार्ययोजना तैयार करेगी।

प्रमुख देश, जिनकी टीमें आएंगी
जर्मनी, फ्रांस, टर्की, इटली, स्पेन, साइप्रस, चाइना, ग्रीस, ब्राजील, रूस, कजाकिस्तान, इंग्लैंड, आस्ट्रिया, आस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड, डेनमार्क, बेल्जियम, क्रोएशिया।

खेल विभाग के सहायक संचालक व एसजीएफआई के कोषाध्यक्ष एसआर कर्ष ने कहा कि हमें आयोजन की जिम्मेदारी मिल गई है। अब विधिवत पत्र का इंतजार कर रहे हैं। इसके बाद पूरे आयोजन के लिए मूलभूत सुविधाओं की आवश्यकताओं को लेकर प्रस्ताव तैयार कर राज्य सरकार को भेजा जाएगा। नए इंडोर मैदान, नया मल्टीपर्पस हॉल और तमाम तरह की सुविधाओं पर काम किया जाएगा। हम यहां बेहतर से बेहतर आयोजन करेंगे।

साई के प्रबंधक व अंतरराष्ट्रीय बास्केटबॉल कोच राजेश्वर राव ने कहा कि राजनांदगांव में विश्व स्कूल चैम्पियनशिप के आयोजन के लिए जल्द ही सारी कार्ययोजना तैयार कर उस पर काम शुरू कर दिया जाएगा। एक सर्वसुविधायुक्त हॉल के लिए एक दो जगह जमीन देखी गई है। साई के लिए स्वीकृत १५ एकड़ जमीन में से १० एकड़ में हॉल बनाने पर भी विचार किया जा सकता है। यहां इस खेल के होने से खिलाडिय़ों को काफी फायदा होगा।

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