63 बच्चियों को घर भेजने पर पर रोक, अब हाइकोर्ट तय करेगा भविष्य

राजसमंद में होटल के पीछे भवन से 67 बच्चियों को बालिका गृह में स्थानान्तरित करने का मामला

By: laxman singh

Published: 24 Jul 2018, 12:02 PM IST

राजसमंद. शहर में होटल के पीछे भवन में गौमुख आध्यात्मिक स्कूल से बालिका गृह में स्थानान्तरित बच्चियों के मामले में हाइकोर्ट जोधपुर में सोमवार को बालिकाओं की पढ़ाई प्रभावित होने, बालिका गृह में बंधक बनाकर रखने एवं गौमुख स्कूल का संबंध आध्यात्मिक विश्वविद्यालय से होने के आरोप- प्रत्यारोप दोनों पक्षों ने लगाए। अदालत ने दो टूक कहा कि बच्चियां सरकार की निगरानी में है, मगर सुरक्षित है या नहीं। इस पर गंभीरता देखना होगा। अगर गौमुख स्कूल का आध्यात्मिक विश्वविद्यालय से कोई संबंध नहीं है, तो उस संबंध में भी स्पष्ट जवाब व दस्तावेज पेश करें। अगर ऐसी ही टालमटोल की प्रवृत्ति दोनों पक्षों की रही, तो इस पूरे प्रकरण की अलग से कमेटी गठित कर जांच करवाई जा सकती है। राजसमंद में 63 बच्चियों को घर भेजने पर पर रोक, अब हाइकोर्ट तय करेगा भविष्य

हाइकोर्ट जोधपुर में जस्टिस संगीत लोढ़ा और वीरेन्द्र माथुर के समक्ष सिरोही कलक्टर, बाल विकास विभाग उप निदेशक सिरोही द्वारा की गई जांच व बाल आयोग को भेजी गई रिपोर्ट पेश की। इसी तरह बाल कल्याण समिति राजसमंद अध्यक्ष भावना पालीवाल ने 4 जुलाई को 67 बच्चियों को बालिका गृह में शिफ्ट करने की कार्रवाई रिपोर्ट के साथ राजनगर थाने में दर्ज एफआईआर की प्रतिलिपि पेश की। एफआईआर में बताया कि दिल्ली में गत महीनों आध्यात्मिक विश्विद्यालय से बाल आयोग द्वारा कई युवतियों को मुक्त कराया, जिसके संचालक विरेंद्र दीक्षित पर यौन शोषण व दुष्कर्म के भी आरोप लगे तथा उसी दीक्षित गौमुख स्कूल संचालित करने का ब्यौरा रखा। इस पर आध्यात्मिक स्कूल के अधिवक्ता अमोल कोकणे ने कहा कि गौमुख स्कूल का संचालन अलग है और इसकी समिति भी अलग है, जिसका आध्यात्मिक विश्वविद्यालय और उसके संचालक विरेंद्र दीक्षित से कोई वास्ता नहीं है। इस पर अदालत ने कहा कि अगर गौमुख स्कूल का आध्यात्मिक विश्वविद्यालय से कोई वास्ता नहीं है, तो उस संबंध में मय दस्तावेज के साथ जवाब पेश करें। सिरोही कलक्टर द्वारा बताया गया कि उनके द्वारा गौमुख आध्यात्मिक स्कूल का निरीक्षण किया, जिसकी भौतिक रिपोर्ट बाल आयोग को भेज दी गई और अग्रिम कार्रवाई आयोग ही बता सकता है। बच्चियों के परिजनों के अधिवक्ता कोकणे ने कहा कि बालिका गृह में बच्चियों के स्वास्थ्य, भोजन व सुरक्षा पर ध्यान नहीं देते हुए परामर्श के नाम पर उन्हें डराने, धमकाने व टॉर्चर करने के आरोप लगाए। इस पर अदालत ने कहा कि सभी बच्चियां सरकारी बालिका गृह में सुरक्षित है। फिर भी अगर बच्चियों के स्वास्थ्य व सुरक्षा का ख्याल नहीं रखा जा रहा है, तो ऐसी कोताही बर्दाश्त लायक नहीं है। दोनों पक्ष अपने तथ्यात्मक जवाब पेश करें और इस प्रकरण के संबंध में सारे दस्तावेज एक साथ पेश करें। वरना कोर्ट अलग से कमेटी गठित करके उच्च स्तरीय जांच करवा सकता है। अब हाइकोर्ट में अगली सुनवाई 30 जुलाई को होगी।

चार बच्चियों को घर भेजा
बाल कल्याण समिति द्वारा कुल 67 बच्चियों को कथित आध्यात्मिक स्कूल से बालिका गृह में शिफ्ट किया। दो बच्चियों के बालिग होने पर घर भेज दिया, जबकि छत्तीसगढ़ की दो बच्चियों को भी बाल कल्याण समितियों के माध्यम से घर भेज दिया। अब 63 बच्चियां बालिका गृह राजसमंद व उदयपुर में प्रवासरत है।

laxman singh Reporting
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