ADMISSION AGE RULE CHANGE : अब 7 वर्ष तक की उम्र के बच्चों को मिलेगा पहली कक्षा में प्रवेश

ADMISSION AGE RULE CHANGE :  अब 7 वर्ष तक की उम्र के बच्चों को मिलेगा पहली कक्षा में प्रवेश

Laxman Singh Rathore | Publish: Mar, 14 2018 11:55:30 AM (IST) Rajsamand, Rajasthan, India

एक वर्ष बढ़ाई उम्र सीमा

राजसमंद/आईडाणा. निशुल्क शिक्षा का अधिकार आरटीई के तहत निशुल्क प्रवेश पाने वाले बच्चों को लेकर सरकार ने बड़ी रियायत दी है। अब कक्षा प्रथम से शुरू होने वाले स्कूल में आरटीई के तहत प्रवेश पाने वाले बालक की अधिकतम उम्र सीमा छह से बढ़ाकर सात साल कर दी है। अब अधिक उम्र के चक्कर में निशुल्क प्रवेश पाने से वंचित होने वाले कई बच्चों को इसका फायदा मिलेगा। आरटीई कानून के तहत हर निजी स्कूल में गरीब तबके के बच्चों का 25 प्रतिशत सीटों पर निरूशुल्क प्रवेश होता आया है। इन बच्चों का खर्चा सरकार वहन करती है, लेकिन इसका लाभ लेने के लिए सरकार ने अभिभावक के आर्थिक रूप से कमजोर होने की शर्त के साथ-साथ स्कूल में प्रवेश पाने वाले बालक की उम्र भी निर्धारित कर रखी है। इसमें प्रमुख रूप से एलकेजी कक्षा से शुरू होने वाली पढ़ाई वाले स्कूल में प्रवेश के लिए पिछले साल तक छात्र-छात्रा की उम्र तीन साल से अधिकतम चार साल तक की तय कर रखी है। वहीं यूकेजी में संबंधित छात्र की न्यूनतम उम्र चार साल से अधिकतम पांच साल व प्रथम में पांच साल या उससे अधिक छह वर्ष तक थी। एंट्री लेवल पर नियम बदलने से इसका लाभ गरीब परिवार के बच्चों को मिलेगा।

न्यूनतम तीन साल, अधिकतम सात साल
सरकार ने इस सत्र में आरटीई के तहत प्रवेश पाने वाले छात्र-छात्रा की आयु सीमा में एलकेजी कक्षा को छोडक़र अन्य कक्षाओं में उम्र बढ़ाई है। इसमें एंट्री लेवल की कक्षा एलकेजी है तो उसमें प्रवेश पाने वाले छात्र की उम्र तो न्यूनतम तीन साल व अधिकतम चार साल है। वहीं यूकेजी में संबंधित छात्र की न्यूनतम साढ़े तीन साल अधिकतम पांच वर्ष है। पहली कक्षा में न्यूनतम उम्र साढ़े चार वर्ष से अधिकतम छह वर्ष है। इसके अलावा एंट्री लेवल कक्षा प्रथम है तो उसके लिए न्यूनतम उम्र छात्र.छात्रा की पांच वर्ष व अधिकतम सात वर्ष रखी गई है।

’निजी स्कूलों का किया था सत्यापन’
शिक्षा का अधिकार अधिनियम के तहत निजी स्कूलों ने 25 प्रतिशत सीटों पर स्कूलों में निशुल्क प्रवेश दिया था। इसके बाद शिक्षा विभाग की ओर से निशुल्क प्रवेश को लेकर सत्यापन करवाया था। सत्यापन के बाद सही पाए गए स्कूलों के लिए पुनर्भरण राशि का प्रस्ताव भेजा था। कुछ स्कूल ऐसे हैं, जिन्होंने पुनर्भरण राशि को लेकर दावा प्रपत्र शिक्षा विभाग को भेजा नहीं है। आरटीई के तहत निजी स्कूल में प्रवेश के लिए जिस किसी ने ऑनलाइन आवेदन किया है, साथ ही संबंधित का स्कूल में प्रवेश के लिए नाम आया है तो कोई भी निजी स्कूल संचालक प्रवेश को लेकर आनाकानी नहीं कर सकता है। मना करने पर अभिभावक जिला शिक्षा अधिकारी, प्रारंभिक में शिकायत दर्ज करवा सकता है।

इनका कहना है
जिस विद्यालय में पहली कक्षा से प्रवेश आरटीई के तहत होगा, वहां अधिकतम 7 वर्ष उम्र तक के बच्चे को प्रवेश मिलेगा।
शिवकुमार व्यास, प्रभारी आरटीई, राजसमंद

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